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Rampur Bushahar News: एसबीआई को ऋण वसूली मामले में राहत, 6.22 लाख ब्याज सहित की वसूलने का मिला अधिकार
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सिविल जज की अदालत ने सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर।
कुल्लू जिले के आनी में भारतीय स्टेट बैंक को एक ऋण वसूली मामले में बड़ी राहत मिली है। सिविल जज ने बैंक के पक्ष में फैसला सुनाया है। बैंक को दीवान चंद और एक अन्य से 6,22,539 रुपये और 12.70 फीसदी वार्षिक ब्याज वसूलने का अधिकार दिया गया है। दीवान चंद ने 3 मई, 2016 को एसएमई क्रेडिट कार्ड योजना के तहत ऋण के लिए आवेदन किया था। यह ऋण रेडीमेड गारमेंट्स और जनरल गुड्स के छोटे कारोबार के लिए पांच लाख रुपये का था। बैंक ने 10 जून, 2016 को पांच लाख रुपये का ऋण स्वीकृत किया। एक अन्य व्यक्ति ने इस ऋण के लिए गारंटर के रूप में हस्ताक्षर किए थे। दीवान चंद ऋण चुकाने में विफल रहे, जिससे उनका खाता अनियमित हो गया। बैंक ने 11 फरवरी, 2020 को कानूनी नोटिस भेजा लेकिन भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद बैंक ने अदालत में वसूली का मुकदमा दायर किया। अदालत ने पाया कि बैंक ने अपना मामला सफलतापूर्वक स्थापित किया है। प्रतिवादियों ने ऋण लेने से इन्कार किया था। उन्होंने दावा किया कि गारंटर एक घरेलू और अनपढ़ व्यक्ति है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें कोई कानूनी नोटिस नहीं मिला। हालांकि, बैंक ने ऋण आवेदन, स्वीकृति पत्र, गारंटी समझौता और कानूनी नोटिस जैसे दस्तावेज पेश किए। बैंक के प्रबंधक अमनदीप ने भी गवाही दी, जिसे अदालत ने विश्वसनीय माना। प्रतिवादी धोखाधड़ी के अपने दावों के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं कर पाए। सिविल जज ने अपने आदेश में कहा कि बैंक 6,22,539 रुपये की राशि वसूलने का हकदार है। इस राशि पर 12.70 फीसदी वार्षिक ब्याज भी देय होगा। प्रतिवादी संयुक्त और व्यक्तिगत रूप से इस राशि का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर।
कुल्लू जिले के आनी में भारतीय स्टेट बैंक को एक ऋण वसूली मामले में बड़ी राहत मिली है। सिविल जज ने बैंक के पक्ष में फैसला सुनाया है। बैंक को दीवान चंद और एक अन्य से 6,22,539 रुपये और 12.70 फीसदी वार्षिक ब्याज वसूलने का अधिकार दिया गया है। दीवान चंद ने 3 मई, 2016 को एसएमई क्रेडिट कार्ड योजना के तहत ऋण के लिए आवेदन किया था। यह ऋण रेडीमेड गारमेंट्स और जनरल गुड्स के छोटे कारोबार के लिए पांच लाख रुपये का था। बैंक ने 10 जून, 2016 को पांच लाख रुपये का ऋण स्वीकृत किया। एक अन्य व्यक्ति ने इस ऋण के लिए गारंटर के रूप में हस्ताक्षर किए थे। दीवान चंद ऋण चुकाने में विफल रहे, जिससे उनका खाता अनियमित हो गया। बैंक ने 11 फरवरी, 2020 को कानूनी नोटिस भेजा लेकिन भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद बैंक ने अदालत में वसूली का मुकदमा दायर किया। अदालत ने पाया कि बैंक ने अपना मामला सफलतापूर्वक स्थापित किया है। प्रतिवादियों ने ऋण लेने से इन्कार किया था। उन्होंने दावा किया कि गारंटर एक घरेलू और अनपढ़ व्यक्ति है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें कोई कानूनी नोटिस नहीं मिला। हालांकि, बैंक ने ऋण आवेदन, स्वीकृति पत्र, गारंटी समझौता और कानूनी नोटिस जैसे दस्तावेज पेश किए। बैंक के प्रबंधक अमनदीप ने भी गवाही दी, जिसे अदालत ने विश्वसनीय माना। प्रतिवादी धोखाधड़ी के अपने दावों के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं कर पाए। सिविल जज ने अपने आदेश में कहा कि बैंक 6,22,539 रुपये की राशि वसूलने का हकदार है। इस राशि पर 12.70 फीसदी वार्षिक ब्याज भी देय होगा। प्रतिवादी संयुक्त और व्यक्तिगत रूप से इस राशि का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी हैं।