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Rampur Bushahar News: बारिश और बर्फबारी से किसानों और बागवानों को मिली राहत
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विशेषज्ञों की सलाह, बागवान पौधे रोपने के साथ ही मल्चिंग का कार्य करें शुरू
तापमान में गिरावट से वूली एफिड, माइट और कैंकर जैसे रोगों से भी मिलेगी निजात
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। दो दिनों से ऊंचाई वाले क्षेत्रों में चल रही बर्फबारी और बारिश से किसानों और बागवानों को बड़ी राहत मिली है। विशेषज्ञों ने बागवानों को मौसम खुलते ही बगीचों का प्रबंधन और नए पौधे रोपने का कार्य शुरू करने की सलाह दी है। बारिश से तापमान एकदम नीचे जाने से वूली एफिड, माइट और कैंकर जैसे रोगों से से भी निजात मिलेगी। इस साल सर्दियों में अभी तक बीते सालों की तुलना कम हिमपात हुआ है। विशेषज्ञों की मानें तो अब बागवान तौलियों से घास निकालकर मल्चिंग का काम शुरू कर सकते हैं। ऐसा करने से बगीचों में लंबे समय तक नमी बरकरार रहेगी। बागवानी विशेषज्ञ एवं पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डाॅ नरेंद्र कायथ का कहना है कि जिन बागवानों ने पेड़ों पर चूना और नीले थोथे का लेप नहीं लगाया है, वह भी यह काम पूरा कर कर सकते हैं। सेब के नए पौधे लगाने और बगीचों में मौसम खुलने का बाद ग्राफ्टिंग का काम भी शुरू कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि नए पौधे रोपने के लिए सेब और अन्य फलों की किस्म का चयन विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार ही करें। जिन बागवानों ने बगीचों में तौलिया बनाकर खाद-गोबर डालने का कार्य किया है, यह दो दिनों से हो रही ताजा बर्फबारी-बारिश में सही तरीके से मिश्रित होकर आगामी फसल के लिए वरदान साबित होगी। कृषि विशेषज्ञ के अनुसार किसान खेतों में मटर और अन्य बेमाैसमी सब्जी की बिजाई का काम भी शुरू कर सकते हैं। इसके अलावा जहां पर सब्जी की पौध तैयार हो चुकी वे किसान मौसम खुलने के बाद पौधों की रोपाई भी कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस बारिश से फसलों में खासकर गेंहू को संजीवनी मिली है।
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तापमान में गिरावट से वूली एफिड, माइट और कैंकर जैसे रोगों से भी मिलेगी निजात
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। दो दिनों से ऊंचाई वाले क्षेत्रों में चल रही बर्फबारी और बारिश से किसानों और बागवानों को बड़ी राहत मिली है। विशेषज्ञों ने बागवानों को मौसम खुलते ही बगीचों का प्रबंधन और नए पौधे रोपने का कार्य शुरू करने की सलाह दी है। बारिश से तापमान एकदम नीचे जाने से वूली एफिड, माइट और कैंकर जैसे रोगों से से भी निजात मिलेगी। इस साल सर्दियों में अभी तक बीते सालों की तुलना कम हिमपात हुआ है। विशेषज्ञों की मानें तो अब बागवान तौलियों से घास निकालकर मल्चिंग का काम शुरू कर सकते हैं। ऐसा करने से बगीचों में लंबे समय तक नमी बरकरार रहेगी। बागवानी विशेषज्ञ एवं पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डाॅ नरेंद्र कायथ का कहना है कि जिन बागवानों ने पेड़ों पर चूना और नीले थोथे का लेप नहीं लगाया है, वह भी यह काम पूरा कर कर सकते हैं। सेब के नए पौधे लगाने और बगीचों में मौसम खुलने का बाद ग्राफ्टिंग का काम भी शुरू कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि नए पौधे रोपने के लिए सेब और अन्य फलों की किस्म का चयन विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार ही करें। जिन बागवानों ने बगीचों में तौलिया बनाकर खाद-गोबर डालने का कार्य किया है, यह दो दिनों से हो रही ताजा बर्फबारी-बारिश में सही तरीके से मिश्रित होकर आगामी फसल के लिए वरदान साबित होगी। कृषि विशेषज्ञ के अनुसार किसान खेतों में मटर और अन्य बेमाैसमी सब्जी की बिजाई का काम भी शुरू कर सकते हैं। इसके अलावा जहां पर सब्जी की पौध तैयार हो चुकी वे किसान मौसम खुलने के बाद पौधों की रोपाई भी कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस बारिश से फसलों में खासकर गेंहू को संजीवनी मिली है।