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Rampur Bushahar News: पत्तझड़ के बाद सेब के बगीचों में प्रशिक्षित लोगों से काटछांट जरूरी
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। सेब के बगीचाें में अगले महीने से पत्तझड़ के बाद काट-छांट का काम शुरू किया जा सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह कार्य हमेशा प्रशिक्षित व्यक्ति से ही करवाएं। सुसुप्त अवस्था के दौरान ही पौधों में काटछांट का कार्य उचित माना गया है। बागवानी विशेषज्ञ की सलाह से ही सफल बागवानी उत्पादन में पेड़ों की सिधाई और काटछांट का विशेष महत्व के साथ पौधे को विशेष आकार दिया जाता है। बड़े पेड़ों में काटछांट व्यापक वृद्धि और फल उत्पादन के लिए की जाती है। इससे उन टहनियों और शाखाओं की बढ़ोतरी प्रोत्साहित की जाता है जो पेड़ के आकार बनाने और उसकी पैदावार को देने में सक्षम हों। काटछांट का पहला उद्देश्य टहनियों और शाखाओं को ठीक क्रम और अंतर के रख रखाव से है। घनी टहनियों के बगीचों में फफूंद जनित रोग और कीट की अधिक संभावना रहती है। वरिष्ठ बागवानी विशेषज्ञ एवं जिला कृषि विज्ञान केंद्र के पूर्व प्रभारी डाॅ नरेंद्र कायथ का कहना है कि प्रारंभिक वर्षों में पौधे की सिधाई ढांचा बनाने के लिए मजबूत तने का निर्माण करना ताकि वे फल के बोझ को सहन कर सके। काटछांट से पौधे की आवश्यक क्रियाओं को नियंत्रण में रखा जाता है। रोग ग्रस्त और सूखी टहनियों को निकाल कर स्वस्थ शाखाओं की उत्पति होती है। इससे बगीचों में दवाइयों के छिड़काव, फलों की तुड़ाई कम खर्च पर सुविधाजनक तरीके से किया जा सकता है। नवीनीकरण पद्धति से कम उपजाऊ वाले भाग को निकाल कर नए बीमें तैयार किए जाते हैं। इससे फल उत्पादन क्षमता बढ़ती है। तापमान में कमी आने के बाद जब पौधा सुसुप्त अवस्था में रहता, वहीं समय सेब के बगीचों की काटछांट के लिए उपयुक्त माना जाता है।
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रोहड़ू। सेब के बगीचाें में अगले महीने से पत्तझड़ के बाद काट-छांट का काम शुरू किया जा सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह कार्य हमेशा प्रशिक्षित व्यक्ति से ही करवाएं। सुसुप्त अवस्था के दौरान ही पौधों में काटछांट का कार्य उचित माना गया है। बागवानी विशेषज्ञ की सलाह से ही सफल बागवानी उत्पादन में पेड़ों की सिधाई और काटछांट का विशेष महत्व के साथ पौधे को विशेष आकार दिया जाता है। बड़े पेड़ों में काटछांट व्यापक वृद्धि और फल उत्पादन के लिए की जाती है। इससे उन टहनियों और शाखाओं की बढ़ोतरी प्रोत्साहित की जाता है जो पेड़ के आकार बनाने और उसकी पैदावार को देने में सक्षम हों। काटछांट का पहला उद्देश्य टहनियों और शाखाओं को ठीक क्रम और अंतर के रख रखाव से है। घनी टहनियों के बगीचों में फफूंद जनित रोग और कीट की अधिक संभावना रहती है। वरिष्ठ बागवानी विशेषज्ञ एवं जिला कृषि विज्ञान केंद्र के पूर्व प्रभारी डाॅ नरेंद्र कायथ का कहना है कि प्रारंभिक वर्षों में पौधे की सिधाई ढांचा बनाने के लिए मजबूत तने का निर्माण करना ताकि वे फल के बोझ को सहन कर सके। काटछांट से पौधे की आवश्यक क्रियाओं को नियंत्रण में रखा जाता है। रोग ग्रस्त और सूखी टहनियों को निकाल कर स्वस्थ शाखाओं की उत्पति होती है। इससे बगीचों में दवाइयों के छिड़काव, फलों की तुड़ाई कम खर्च पर सुविधाजनक तरीके से किया जा सकता है। नवीनीकरण पद्धति से कम उपजाऊ वाले भाग को निकाल कर नए बीमें तैयार किए जाते हैं। इससे फल उत्पादन क्षमता बढ़ती है। तापमान में कमी आने के बाद जब पौधा सुसुप्त अवस्था में रहता, वहीं समय सेब के बगीचों की काटछांट के लिए उपयुक्त माना जाता है।