{"_id":"65107476712ec825b8008dd5","slug":"rampur-news-risihi-panchami-fair-rampur-hp-news-c-178-1-ssml1031-5892-2023-09-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rampur Bushahar News: ऋषि पंचमी मेले में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देकर लौटे देवता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rampur Bushahar News: ऋषि पंचमी मेले में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देकर लौटे देवता
विज्ञापन
दलाश में मेले के दौरान लोग देवताओं को विदाई देते हुए। संवादं
दलाश (कुल्लू)। दो दिवसीय ऋषि पंचमी मेला रविवार को देवताओं की विदाई के साथ संपन्न हो गया। इस दौरान देवी-देवताओं ने लोगों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दिया। मेले के अंतिम दिन पांचों देवताओं के रथ दलाश मंदिर से निकले।
मंदिर से मेला स्थल सौह तक लोगों ने देवताओं के रथ को नाचते गाते हुए पंहुचाया। जब देवता मेला स्थल सौह पंहुचे तो वहां हजारों लोगों ने सेब और अखरोट फेंककर उनका स्वागत किया। दिनभर मेले में नाटियों का दौर चलता रहा। मेले में दूरदराज से आए व्यापारियों ने भी यहां जमकर कारोबार किया।
आखिरी दिन जैसे ही देवताओं के रथ मेला मैदान में पहुंचे तो हजारों की संख्या में उपस्थित लोगों की भीड़ का नजारा देखने लायक था। बाद में क्षेत्र से आए हजारों लोगों ने मेला मैदान में भव्य नाटी का आयोजन किया।
विज्ञापन
मेले के समापन समारोह में आनी के विधायक लोकेंद्र कुमार बतौर मुख्यातिथि मौजूद रहे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि मेले जहां हमारे प्राचीन संस्कृति को संजोए रखते हैं, वहीं इससे अपनी संस्कृति को भी बढ़ावा मिलता है। उन्होंने क्षेत्र वासियों को मेले की बधाई दी।
विज्ञापन
मंदिर से मेला स्थल सौह तक लोगों ने देवताओं के रथ को नाचते गाते हुए पंहुचाया। जब देवता मेला स्थल सौह पंहुचे तो वहां हजारों लोगों ने सेब और अखरोट फेंककर उनका स्वागत किया। दिनभर मेले में नाटियों का दौर चलता रहा। मेले में दूरदराज से आए व्यापारियों ने भी यहां जमकर कारोबार किया।
विज्ञापन
आखिरी दिन जैसे ही देवताओं के रथ मेला मैदान में पहुंचे तो हजारों की संख्या में उपस्थित लोगों की भीड़ का नजारा देखने लायक था। बाद में क्षेत्र से आए हजारों लोगों ने मेला मैदान में भव्य नाटी का आयोजन किया।
विज्ञापन
मेले के समापन समारोह में आनी के विधायक लोकेंद्र कुमार बतौर मुख्यातिथि मौजूद रहे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि मेले जहां हमारे प्राचीन संस्कृति को संजोए रखते हैं, वहीं इससे अपनी संस्कृति को भी बढ़ावा मिलता है। उन्होंने क्षेत्र वासियों को मेले की बधाई दी।

दलाश में मेले के दौरान लोग देवताओं को विदाई देते हुए। संवादं