फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Rampur Bushahar News ›   rampur news, protest, menrega, employee,

Rampur Bushahar News: मजदूर विरोधी फैसले को लेकर सीटू ने मनाया काला दिवस

Tue, 12 Dec 2023 05:25 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 12 Dec 2023 05:25 PM IST
विज्ञापन
ग्रामीण स्तर पर मजदूरों ने काम रोकने वाली अधिसूचना को फूंका, जमकर की नारेबाजी
विज्ञापन


मजदूर विरोधी फैसले के खिलाफ चलाएंगे विभिन्न अभियान : अमित

संवाद न्यूज एजेंसी

रामपुर बुशहर। मनरेगा एवं निर्माण मजदूर यूनियन संबधित सीटू के बैनर तले मंगलवार को गांवों और पंचायतों में काम रोकने वाली अधिसूचना को सार्वजनिक तौर पर फूंका गया और मजदूरों ने सरकार के फैसले के खिलाफ जन अभियान, पद यात्रा और पर्चा वितरण अभियान चलाने की योजना तैयार की है। सीटू जिला शिमला महासचिव अमित ने कहा कि मंगलवार 12 दिसंबर के दिन को हिमाचल के मनरेगा और निर्माण मजदूरों ने काले दिवस के रूप में मनाया। हिमाचल प्रदेश सरकार का पिछला एक साल मनरेगा और निर्माण मजदूरों के लिए अंधकार भरा रहा है। कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आते ही अपने कार्यकाल के पहले दिन 12 दिसंबर 2022 को सबसे पहले मनरेगा मजदूरों को श्रमिक कल्याण बोर्ड से बाहर करने का फैसला लिया था। सरकार के मजदूर विरोधी फैसले के कारण मजदूरों को बच्चों की शिक्षा के लिए मिलने वाली सहायता राशि, विवाह, चिकित्सा, मृत्यु एवं अन्य सहायता पूरी तरह बंद है। बोर्ड में मजदूरों का पंजीकरण और नवीनीकरण का काम पिछले एक साल से बंद पड़ा है। बोर्ड से मिलने वाली सहायता राशि बीते तीन वर्षों से लंबित है। इस कारण प्रदेश के कुल चार लाख 48 हजार मजदूर प्रभावित हो रहे हैं। यह वास्तव में भवन एवं अन्य निर्माण कामगार कानून 1996 की उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि सीटू से संबंधित मनरेगा व निर्माण मजदूर यूनियन और अन्य सभी यूनियनें इस निर्णय का लगातार विरोध कर रही हैं लेकिन मुख्यमंत्री इस बारे में पूरी तरह तानाशाही वाला रवैया अपना रहे हैं और बोर्ड में मनरेगा मजदूरों के पंजीकरण, नवीनीकरण और उनके लाभों को बहाल नहीं कर रहे हैं। अमित ने कहा कि सीटू ने अब विभिन्न मजदूर संगठनों और हिमाचल किसान सभा के साथ मिलकर सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने का फैसला लिया है। इसके तहत ही मंगलवार को सभी गांवों और पंचायतों में काम रोकने वाली अधिसूचना को सार्वजनिक तौर पर फूंका है। इसके बाद डेढ़ माह तक गांव-गांव में सरकार के इस फैसले के खिलाफ जन अभियान, पद यात्रा और पर्चा वितरण अभियान चलाया जाएगा। सरकार ने अपना फैसला नहीं बदला तो अप्रैल मई में होने वाले लोकसभा चुनाव में इस सरकार के खिलाफ वोट देने के लिए मजदूरों को जागरूक किया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed