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Rampur Bushahar News: काजा, समदो में मजदूरों का अनिश्चितकालीन प्रदर्शन सातवें दिन भी जारी
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पूह(किन्नौर)। दीपक प्रोजेक्ट वर्कर्स यूनियन संबंधित सीटू की अनिश्चितकालीन हड़ताल बुधवार को सातवें दिन में प्रवेश कर गई। बीआरओ प्रबंधन के 175 मजदूरों को नौकरी से निकालने के विरोध में ये मजदूर काजा और समदो में अनिश्चितकालीन हड़ताल कर रहे हैं। मजदूरों ने चेताया कि अगर उन्हें जल्द नौकरी पर नहीं रखा गया तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
दीपक प्रोजेक्ट वर्कर्स यूनियन संबंधित सीटू के अध्यक्ष नौरबु सम्फेल, महासचिव तंडूप फूंचोक, उपाध्यक्ष प्रीतम, रवि, पूजा, संजू और राजेश सहित अन्यों ने कहा कि 175 मजदूर पिछले 12 सालों से अपने और परिवार का पालन पोषण बीआरओ से करवाए जा रहे सड़क के रखरखाव के कार्य से कर रहे हैं। इस दुर्गम क्षेत्र में रोजगार के साधन काफी सीमित हैं।
साल में एक फसल के अलावा रोजगार का कोई दूसरा साधन नहीं है। यहां की भौगोलिक परिस्थितियां जीवनयापन करने के लिए काफी कठिन हैं। ऐसे में बीआरओ प्रबंधन द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना के मौखिक रूप से आदेश देकर 175 मजदूरों को यह कहना कि अब यहां पर रोजगार नहीं है, जबकि समदो से काजा सड़क के रख-रखाव का काम अभी भी बीआरओ ही कर रहा है।
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यह कार्य निजी कंपनी को अभी तक नहीं दिया गया है। ऐसी परिस्थिति में रोजगार के चले जाने से आने वाली परेशानियों के कारण सभी मजदूरों पर मानसिक दबाव लगातार बढ़ रहा है और मजदूरों को परिवार का भरण पोषण करना और बच्चों को शिक्षा देना काफी मुश्किल हो जाएगा क्योंकि ये सभी मजदूर पूरी तरह इसी रोजगार पर निर्भर हैं। केंद्र की सरकार सीमावर्ती सड़कों को निजी कंपनी को दे रही है।
यूनियन ने बीआरओ प्रबंधन को चेताया कि अगर शीघ्र अति शीघ्र मजदूरों को वापस नौकरी पर नहीं लिया गया तो यूनियन स्थानीय लोगों को साथ में लेकर मोदी सरकार के खिलाफ उग्र आंदोलन किया जाएगा।
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दीपक प्रोजेक्ट वर्कर्स यूनियन संबंधित सीटू के अध्यक्ष नौरबु सम्फेल, महासचिव तंडूप फूंचोक, उपाध्यक्ष प्रीतम, रवि, पूजा, संजू और राजेश सहित अन्यों ने कहा कि 175 मजदूर पिछले 12 सालों से अपने और परिवार का पालन पोषण बीआरओ से करवाए जा रहे सड़क के रखरखाव के कार्य से कर रहे हैं। इस दुर्गम क्षेत्र में रोजगार के साधन काफी सीमित हैं।
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साल में एक फसल के अलावा रोजगार का कोई दूसरा साधन नहीं है। यहां की भौगोलिक परिस्थितियां जीवनयापन करने के लिए काफी कठिन हैं। ऐसे में बीआरओ प्रबंधन द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना के मौखिक रूप से आदेश देकर 175 मजदूरों को यह कहना कि अब यहां पर रोजगार नहीं है, जबकि समदो से काजा सड़क के रख-रखाव का काम अभी भी बीआरओ ही कर रहा है।
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यह कार्य निजी कंपनी को अभी तक नहीं दिया गया है। ऐसी परिस्थिति में रोजगार के चले जाने से आने वाली परेशानियों के कारण सभी मजदूरों पर मानसिक दबाव लगातार बढ़ रहा है और मजदूरों को परिवार का भरण पोषण करना और बच्चों को शिक्षा देना काफी मुश्किल हो जाएगा क्योंकि ये सभी मजदूर पूरी तरह इसी रोजगार पर निर्भर हैं। केंद्र की सरकार सीमावर्ती सड़कों को निजी कंपनी को दे रही है।
यूनियन ने बीआरओ प्रबंधन को चेताया कि अगर शीघ्र अति शीघ्र मजदूरों को वापस नौकरी पर नहीं लिया गया तो यूनियन स्थानीय लोगों को साथ में लेकर मोदी सरकार के खिलाफ उग्र आंदोलन किया जाएगा।