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रोहडू के गांवों में धूप लेकर नंगे पांव वीरभद्र सिंह को देखने आते थे ग्रामीण
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रोहडू। विधानसभा क्षेत्र के दूरदराज गांव तक अपने नेता वीरभद्र सिंह के प्रति लोगों की कुलदेवता के समान आस्था रही है। जब वीरभद्र सिंह दूरदराज गांव में दौरे पर आते थे तो बुजुर्ग लोग रास्ते में घर से बाहर धूप बत्ती लेकर नंगे पैर उनसे मिलने के लिए निकला करते थे। ऐसे पल देख कर कई बार वे भावुक हुए बुजुर्गो को हाथ का सहारा देकर उनका हालचाल पूछा करते थे।
रोहडू विधानसभा क्षेत्र के गांव में जब भी बड़े स्तर पर सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रम होते तो देवताओं की पालकी वीरभद्र सिंह के सामने जरूर निकलती थी। ऐसे अनुष्ठानों में उनका या परिवार के किसी सदस्य की मौजूदगी को अनिवार्य माना जाता रहा। इसको लोग पुरानी बुशहर रियासत के साथ भी जोड़ कर देखते थे।
रोहडू विधानसभा क्षेत्र के हर अनुष्ठान में अभी तक वीरभद्र सिंह या उनके परिवार कर उपस्थिति अनिवार्य रही है। भले ही लोग कुलदेवता के बराबर सम्मान उनको अंतिम समय तक देते रहे, मगर अपने राजनीतिक कार्यकाल में क्षेत्र के मंदिरों के लिए उन्होंने सरकार से करोड़ों रूपए की राशि उपलब्ध करवाई।
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इससे खस्ताहाल हो चुके सैकड़ों मंदिरों को दोबारा उसी पुरानी शैली में तैयार किया गया। वीरभद्र सिंह की मौत की सूचना के बाद उनका हर तीसरा चाहने वाला रोहडू़ क्षेत्र से वीरभद्र सिंह को श्रद्धांजलि देने के लिए तैयार है। ऐसे लोगों में खास कर अधिकांश वह गरीब परिवार है, जिनको उनकी सरकार के कार्यकाल में सरकारी नौकरी में रोजगार मिला।
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रोहडू विधानसभा क्षेत्र के गांव में जब भी बड़े स्तर पर सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रम होते तो देवताओं की पालकी वीरभद्र सिंह के सामने जरूर निकलती थी। ऐसे अनुष्ठानों में उनका या परिवार के किसी सदस्य की मौजूदगी को अनिवार्य माना जाता रहा। इसको लोग पुरानी बुशहर रियासत के साथ भी जोड़ कर देखते थे।
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रोहडू विधानसभा क्षेत्र के हर अनुष्ठान में अभी तक वीरभद्र सिंह या उनके परिवार कर उपस्थिति अनिवार्य रही है। भले ही लोग कुलदेवता के बराबर सम्मान उनको अंतिम समय तक देते रहे, मगर अपने राजनीतिक कार्यकाल में क्षेत्र के मंदिरों के लिए उन्होंने सरकार से करोड़ों रूपए की राशि उपलब्ध करवाई।
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इससे खस्ताहाल हो चुके सैकड़ों मंदिरों को दोबारा उसी पुरानी शैली में तैयार किया गया। वीरभद्र सिंह की मौत की सूचना के बाद उनका हर तीसरा चाहने वाला रोहडू़ क्षेत्र से वीरभद्र सिंह को श्रद्धांजलि देने के लिए तैयार है। ऐसे लोगों में खास कर अधिकांश वह गरीब परिवार है, जिनको उनकी सरकार के कार्यकाल में सरकारी नौकरी में रोजगार मिला।