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Rampur Bushahar News: लोकसभा चुनाव में चौपाल से बलबीर वर्मा, किमटा व मंगलेट की प्रतिष्ठा दांव पर
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नेरवा (रोहड़ू)। सुभाष मंगलेट का भाजपा का दामन थामने से चौपाल विधानसभा क्षेत्र में लोकसभा चुनावों का मुकाबला एकाएक दिलचस्प हो गया है। चौपाल विधानसभा क्षेत्र से अपने-अपने प्रत्याशी को बढ़त दिलाने के लिए दोनों दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने रात-दिन एक कर दिया है। भाजपा की ओर से जहां पर वर्तमान विधायक बलबीर सिंह वर्मा और पूर्व विधायक सुभाष मंगलेट ने मोर्चा संभाला हैं, वहीं कांग्रेस की कमान प्रदेश कांग्रेस के महासचिव व बीते विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी से प्रत्याशी रहे रजनीश किमटा ने संभाली है। चौपाल विधानसभा क्षेत्र भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार बलसन और चौपाल दो क्षेत्रों में बंटा है।
बलसन क्षेत्र का तहसील मुख्यालय ठियोग व चौपाल के शेष हिस्से का ठियोग में है। बीते विधानसभा चुनाव में भाजपा के बलबीर सिंह वर्मा को 25,873,कांग्रेस के रजनीश किमटा को 20,480 और कांग्रेस छोड़कर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में खड़े हुए पूर्व विधायक को 13,706 वोट पड़े थे। दिलचस्प यह है कि पिछले विधानसभा चुनाव में आमने-सामने चुनाव लड़ रहे बलबीर वर्मा और भाजपा में शामिल हुए सुभाष मंगलेट एक साथ चुनाव प्रचार कर रहे हैं। बलसन से बलबीर सिंह वर्मा, नेरवा के नेवल क्षेत्र सुभाष मंगलेट और चौपाल उपमंडल की चौपाल तहसील को रजनीश किमटा का गढ़ माना जाता है।
भाजपा प्रत्याशी दो बार के सांसद सुरेश कश्यप की हर गांव में अपनी पहचान है। कांग्रेस प्रत्याशी विनोद सुल्तानपुरी इस क्षेत्र के लिए नए हैं। हालांकि उनके पिता पूर्व सांसद कृष्ण दत्त सुल्तानपुरी की बुजुर्ग मतदाताओं में आज भी पकड़ मानी जाती है। निवर्तमान सांसद सुरेश कश्यप जीत के बाद पांच साल के कार्यकाल में लोगों से दूर रहना परेशानी बन रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस क्षतिपूर्ति के लिए ही सुभाष मंगलेट को पार्टी में शामिल किया गया है। बरहाल सुभाष मंगलेट के अधिकांश समर्थक कांग्रेस विचारधारा के हैं। इनमें से कितने भाजपा का समर्थन करते हैं, उससे कांग्रेस भाजपा की बढ़त पर निर्भर करेगी। फिलहाल चौपाल विधानसभा क्षेत्र में लोकसभा के चुनावों में प्रत्याशियों के बजाए बलबीर सिंह वर्मा ,सुभाष मंगलेट और रजनीश किमटा की व्यक्तिगत प्रतिष्ठा दांव पर लगी है।
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बलसन क्षेत्र का तहसील मुख्यालय ठियोग व चौपाल के शेष हिस्से का ठियोग में है। बीते विधानसभा चुनाव में भाजपा के बलबीर सिंह वर्मा को 25,873,कांग्रेस के रजनीश किमटा को 20,480 और कांग्रेस छोड़कर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में खड़े हुए पूर्व विधायक को 13,706 वोट पड़े थे। दिलचस्प यह है कि पिछले विधानसभा चुनाव में आमने-सामने चुनाव लड़ रहे बलबीर वर्मा और भाजपा में शामिल हुए सुभाष मंगलेट एक साथ चुनाव प्रचार कर रहे हैं। बलसन से बलबीर सिंह वर्मा, नेरवा के नेवल क्षेत्र सुभाष मंगलेट और चौपाल उपमंडल की चौपाल तहसील को रजनीश किमटा का गढ़ माना जाता है।
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भाजपा प्रत्याशी दो बार के सांसद सुरेश कश्यप की हर गांव में अपनी पहचान है। कांग्रेस प्रत्याशी विनोद सुल्तानपुरी इस क्षेत्र के लिए नए हैं। हालांकि उनके पिता पूर्व सांसद कृष्ण दत्त सुल्तानपुरी की बुजुर्ग मतदाताओं में आज भी पकड़ मानी जाती है। निवर्तमान सांसद सुरेश कश्यप जीत के बाद पांच साल के कार्यकाल में लोगों से दूर रहना परेशानी बन रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस क्षतिपूर्ति के लिए ही सुभाष मंगलेट को पार्टी में शामिल किया गया है। बरहाल सुभाष मंगलेट के अधिकांश समर्थक कांग्रेस विचारधारा के हैं। इनमें से कितने भाजपा का समर्थन करते हैं, उससे कांग्रेस भाजपा की बढ़त पर निर्भर करेगी। फिलहाल चौपाल विधानसभा क्षेत्र में लोकसभा के चुनावों में प्रत्याशियों के बजाए बलबीर सिंह वर्मा ,सुभाष मंगलेट और रजनीश किमटा की व्यक्तिगत प्रतिष्ठा दांव पर लगी है।
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