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Rampur Bushahar News: कुर्सी पर बांधकर 12 किलोमीटर उठाकर सड़क तक पहुंचाया मरीज

Sun, 28 Apr 2024 07:00 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 28 Apr 2024 07:00 PM IST
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सात दशक बाद भी सड़क सुविधा के लिए तरसी कुश्वा पंचायत की 70 प्रतिशत आबादी
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चुनाव के समय सड़क निर्माण के लिए सिर्फ मिले आश्वासन, धरातल पर नहीं उतरे

संवाद न्यूज एजेंसी

ब्रौ (रामपुर बुशहर)। भले ही देश की आजादी को सात दशक से अधिक का समय बीत गया है, लेकिन हिमाचल प्रदेश के दुर्गम क्षेत्रों के लोग आज भी दुश्वारियां झेल रहे हैं। बिना सड़क आज भी ग्रामीण आपात समय में खासे जूझते हैं। मरीजों को कुर्सी पर पर बांधकर मशक्कत के बाद अस्पताल पहुंचाया जाता है। कुछ ऐसी ही मामला निरमंड विकास खंड की कुश्वा पंचायत में भी रविवार को सामने आया, जब एक युवक बीमार हो गया। ऐसे में स्थानीय लोगों ने कुर्सी पर बांधकर मरीज को करीब 12 किलोमीटर उठाकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया। इसके बाद मरीज को अस्पताल पहुंचाया गया। कुश्वा पंचायत की 70 फीसदी आबादी आज भी सड़क सुविधा से वंचित हैं। ग्रामीणों ने कहा कि समय पर उपचार नहीं मिलने से कई मरीज अपनी जान भी गंवा चुके हैं। चुनाव के दौर में नेता ग्रामीणों से वोट बटोरने के लिए सड़क निर्माण के आश्वासन तो देते आए हैं, लेकिन अब तक चुनावी वादे धरातल पर नहीं उतरे हैं। गौर हो निरमंड विकास खंड की कुश्वा पंचायत की आधे से ज्यादा की आबादी आज भी सड़क सुविधा की राह ताक रही है। पंचायत के 70 प्रतिशत ग्रामीण आज भी सड़क सुविधा से वंचित हैं। ऐसे में अगर कोई ग्रामीण बीमार पड़ जाए तो उसे अस्पताल पहुंचाना ग्रामीणों और परिजनों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होता। ऐसे में बीमार होना मानों ग्रामीणों के लिए अभिशाप हो गया है। मजबूरी में ग्रामीण समय पर एकत्रित न हों तो बीमारी से पीडि़त व्यक्ति की जान बचाना मुश्किल हो जाता है। हालांकि ग्रामीण हर विधानसभा और लोकसभा चुनाव में अपनी भागीदारी निभा रहे हैं, लेकिन बावजूद इसके सरकार, लोक निर्माण विभाग और क्षेत्रीय नेता ग्रामीणों की ज्वलंत समस्याओं की अनदेखी करते आ रहे हैं। सरकार की अनदेखी से कुश्वा पंचायत के रोपड़ी, बाहन, शुडवार, शाह, दोगरी, नारूकू, किंचा, शाईच, शिनारूकू गांव पूरी तरह से सड़क सुविधा से वंचित हैं। यहां के ग्रामीण 12 किमी पैदल चलकर मुख्य सड़क तक पहुंचते हैं। क्षेत्र के किलम राम, बंधुराम, देवीराम, प्रीतम और गोविंद का कहना है कि चुनाव में तो प्रत्याशी ग्रामीणों को लुभाने के लिए बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन चुनाव के बाद सभी बातें हवा हो जाती हैं। कुश्वा पंचायत प्रधान कैलाश ब्रामटा ने कहा कि वर्ष 2017 में ग्रामीणों को सड़क सुविधा से जोड़ने की कवायद शुरू हुई थी। विभागीय लापरवाही के चलते सड़क निर्माण के लिए ग्रामीणों द्वारा दी गई गिफ्ट डीड से संबंधित कागज गुम हो गए थे। अब फिर से सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं।
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