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Rampur Bushahar News: शोरंग परियोजना के खिलाफ पांच पंचायतों के प्रभावितों का अनिश्चतकालीन धरना शुरू
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भावानगर(किन्नौर)। जनजातीय जिले के निचार खंड में बनी 100 मेगावाट शोरंग जल विद्युत परियोजना के खिलाफ पांच पंचायतों के प्रभावितों ने अनिश्चितकालीन प्रदर्शन शुरू कर दिया है। परियोजना प्रबंधन के आश्वासनों के बाद भी भूमिहीनों और प्रभावितों को रोजगार और पेंशन न मिलने को लेकर ग्रामीणों का भारी रोष है। सोमवार से पांच पंचायतों के ग्रामीण परियोजना के पावर हाउस के बाहर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। ग्रामीणों ने चेताया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जाती, तब तक उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। 100 मेगावाट शोरंग जल विद्युत परियोजना के खिलाफ परियोजना प्रभावित पांच पंचायतों के प्रभावितों में भारी गुस्सा है।
रूपी पंचायत के प्रधान रामेश्वर नेगी, उपप्रधान मुकेश नेगी, बड़ा कंबा पंचायत प्रधान मोनिका नेगी, चौरा पंचायत प्रधान विजय नेगी, तरांडा पंचायत के प्रधान मोयान नेगी, छोटा कंबा पंचायत प्रधान हैप्पी, वीरेंद्र, सतीश, बहादुर सिंह, गुरीनंद और विजय सहित अन्यों ने कहा कि हिमाचल शोरंग परियोजना का निर्माण पूरा हुए कई वर्ष बीते चुके हैं और परियोजना में विद्युत उत्पादन भी शुरू हो गया है। इसके बावजूद परियोजना निर्माण के लिए अपनी जमीन देने वाले पांच पंचायतों के प्रभावितों को अपने अधिकारों से वंचित रहना पड़ रहा है। प्रबंधन ने दो वर्ष पूर्व परियोजना निर्माण के लिए भूमि देने वालों को परियोजना में 40 वर्ष का रोजगार देने, पेंशन की एकमुश्त किश्त देने और पुनर्वास अनुदान योजना के तहत प्रति बिस्वा और प्रति बीघा के हिसाब से राशि देने जैसी मांगें मानी थी।
बाकायदा प्रशासन की अध्यक्षता में प्रभावितों की मांगों को पूरा करने पर सहमति बनी थी। इसके तहत ग्राम पंचायत रूपी, बड़ा कंबा, तरांडा, छोटा कंबा और चौरा पंचायत के लोगों को रोजगार और पेंशन देने की परियोजना प्रबंधन ने हामी भरी थी, लेकिन दो वर्ष बाद भी ग्रामीण रोजगार की राहत ताक रहे हैं। परियोजना प्रबंधन के तानाशाही रवैये के कारण ग्रामीण अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं। अब उनके पास आंदोलन के सिवाय कोई रास्ता नहीं बचा है। उन्होंने प्रदेश सरकार, जिला प्रशासन और परियोजना प्रबंधन से प्रभावित पंचायतों के ग्रामीणों को रोजगार देने और उनकी मांगों को जल्द पूरा करने की मांग की है। उन्होंने चेताया कि जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता तब तक उनका विरोध प्रदर्शन चलता रहेगा।
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रूपी पंचायत के प्रधान रामेश्वर नेगी, उपप्रधान मुकेश नेगी, बड़ा कंबा पंचायत प्रधान मोनिका नेगी, चौरा पंचायत प्रधान विजय नेगी, तरांडा पंचायत के प्रधान मोयान नेगी, छोटा कंबा पंचायत प्रधान हैप्पी, वीरेंद्र, सतीश, बहादुर सिंह, गुरीनंद और विजय सहित अन्यों ने कहा कि हिमाचल शोरंग परियोजना का निर्माण पूरा हुए कई वर्ष बीते चुके हैं और परियोजना में विद्युत उत्पादन भी शुरू हो गया है। इसके बावजूद परियोजना निर्माण के लिए अपनी जमीन देने वाले पांच पंचायतों के प्रभावितों को अपने अधिकारों से वंचित रहना पड़ रहा है। प्रबंधन ने दो वर्ष पूर्व परियोजना निर्माण के लिए भूमि देने वालों को परियोजना में 40 वर्ष का रोजगार देने, पेंशन की एकमुश्त किश्त देने और पुनर्वास अनुदान योजना के तहत प्रति बिस्वा और प्रति बीघा के हिसाब से राशि देने जैसी मांगें मानी थी।
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बाकायदा प्रशासन की अध्यक्षता में प्रभावितों की मांगों को पूरा करने पर सहमति बनी थी। इसके तहत ग्राम पंचायत रूपी, बड़ा कंबा, तरांडा, छोटा कंबा और चौरा पंचायत के लोगों को रोजगार और पेंशन देने की परियोजना प्रबंधन ने हामी भरी थी, लेकिन दो वर्ष बाद भी ग्रामीण रोजगार की राहत ताक रहे हैं। परियोजना प्रबंधन के तानाशाही रवैये के कारण ग्रामीण अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं। अब उनके पास आंदोलन के सिवाय कोई रास्ता नहीं बचा है। उन्होंने प्रदेश सरकार, जिला प्रशासन और परियोजना प्रबंधन से प्रभावित पंचायतों के ग्रामीणों को रोजगार देने और उनकी मांगों को जल्द पूरा करने की मांग की है। उन्होंने चेताया कि जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता तब तक उनका विरोध प्रदर्शन चलता रहेगा।
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