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Rampur Bushahar News: 450 मेगावाट कड़छम-शौंगठोंग परियोजना का निर्माण कार्य तीन महीने से बंद
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वर्ष में 2012 में शुरू हुआ था निर्माण कार्य, पहले 2017 में पूरा करने का था लक्ष्य, अब 2026 में भी पूरा होना मुश्किल
राशि का भुगतान नहीं होने से ठेकेदार हड़ताल पर, सरकार को लग रही करोड़ों की चपत
संवाद न्यूज एजेंसी
रिकांगपिओ (किन्नौर)। 450 मेगावाट की कड़छम-शौंगठोंग जलविद्युत परियोजना का निर्माण कार्य पिछले तीन महीने से बंद पड़ा है। इस वजह से प्रदेश सरकार को करोड़ों की चपत लग रही है तो वहीं परियोजना का निर्माण कार्य पूरा होने का समय भी आगे खिसकता जा रहा है। परियोजना का निर्माण कार्य कर रही पटेल कंपनी की ओर से ठेकेदारों को समय पर राशि का भुगतान नहीं होने पर ठेकेदार तीन महीनों से हड़ताल पर हैं। सरकार ने कड़छम-शौंगठोंग जलविद्युत परियोजना को 2026 में पूरा करने का निर्देश दिए हैं। पटेल कंपनी के ढुलमुल रवैये से तय समय सीमा में यह प्रोजेक्ट पूरा नहीं होगा और सरकार को करोड़ों का चूना लगता रहेगा। एचपीपीसीएल ने वर्ष 2012 में परियोजना का निर्माण कार्य पटेल कंपनी को आवंटित किया था, लेकिन कंपनी की ओर से ठेकेदारों ने जनवरी 2023 में राशि का भुगतान न करने पर ठेकेदार हड़ताल पर चले गए हैं। इससे निर्माण कार्य पूरी तरह से बंद हो गया है। चिंता बात यह है कि वर्ष 2012 में जब परियोजना का निर्माण कार्य शुरू किया गया था, तब इसका कार्य पूरा करने का लक्ष्य वर्ष 2017 रखा गया था। अब एचपीपीसीएल ने परियोजना को वर्ष 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य तय किया है, लेकिन अब एचपीपीसीएल और पटेल कंपनी की लापरवाही के कारण वर्ष 2026 तक भी परियोजना का कार्य पूरा होता नहीं दिख रहा है। ठेकेदार यूनियन के प्रधान हितेश नेगी ने बताया कि जनवरी, 2023 में मांग की गई थी कि 90 प्रतिशत राशि का भुगतान तुरंत किया जाए, लेकिन आज तक भुगतान नहीं हुआ है। पटेल कंपनी ने , 2023 में 16 ठेकेदारों का छह महीने का 35 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं किया है। कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन की ओर से निर्माणाधीन 450 मेगावाट पावर प्लांट के लिए पर्याप्त धन राशि नहीं दी जा रही है। इस कारण ठेकेदारों को भुगतान नहीं हो पा रहा है। एचपीसीसीएल के प्रबंध निदेशक खेम सिंह ठाकुर ने बताया कि पटेल कंपनी को पावर प्रोजेक्ट बनाने के लिए पिछले साल तक 160 करोड़ रुपये दिए गए हैं। अभी तक 50 प्रतिशत काम हो चुका है, सिर्फ वेराज का काम नहीं हुआ है। पावर प्लांट और सुरंग का 50 प्रतिशत से ज्यादा काम हो गया है। 7,712 मीटर लंबी सुरंग बन चुकी है। सिर्फ 171 मीटर लंबी खुदाई का काम शेष है। पावर प्लांट में मशीन लगाने का काम शुरू हो गया था, लेकिन 11 मार्च से किसी कारण काम बंद पड़ा है। पटेल कंपनी के जनरल मैनेजर बीरेंद्र शर्मा ने कहा कि इसी सिलसिले में पटेल कंपनी के उच्च अधिकारी मुंबई से शिमला आ चुके हैं और हिमाचल प्रदेश पावर कारपोरेशन के अधिकारियों से बैठकें भी हो रही है। कुछ दिनों में अच्छे नतीजे आने की उमीद है। जल्द काम शुरू किया जाएगा।
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राशि का भुगतान नहीं होने से ठेकेदार हड़ताल पर, सरकार को लग रही करोड़ों की चपत
संवाद न्यूज एजेंसी
रिकांगपिओ (किन्नौर)। 450 मेगावाट की कड़छम-शौंगठोंग जलविद्युत परियोजना का निर्माण कार्य पिछले तीन महीने से बंद पड़ा है। इस वजह से प्रदेश सरकार को करोड़ों की चपत लग रही है तो वहीं परियोजना का निर्माण कार्य पूरा होने का समय भी आगे खिसकता जा रहा है। परियोजना का निर्माण कार्य कर रही पटेल कंपनी की ओर से ठेकेदारों को समय पर राशि का भुगतान नहीं होने पर ठेकेदार तीन महीनों से हड़ताल पर हैं। सरकार ने कड़छम-शौंगठोंग जलविद्युत परियोजना को 2026 में पूरा करने का निर्देश दिए हैं। पटेल कंपनी के ढुलमुल रवैये से तय समय सीमा में यह प्रोजेक्ट पूरा नहीं होगा और सरकार को करोड़ों का चूना लगता रहेगा। एचपीपीसीएल ने वर्ष 2012 में परियोजना का निर्माण कार्य पटेल कंपनी को आवंटित किया था, लेकिन कंपनी की ओर से ठेकेदारों ने जनवरी 2023 में राशि का भुगतान न करने पर ठेकेदार हड़ताल पर चले गए हैं। इससे निर्माण कार्य पूरी तरह से बंद हो गया है। चिंता बात यह है कि वर्ष 2012 में जब परियोजना का निर्माण कार्य शुरू किया गया था, तब इसका कार्य पूरा करने का लक्ष्य वर्ष 2017 रखा गया था। अब एचपीपीसीएल ने परियोजना को वर्ष 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य तय किया है, लेकिन अब एचपीपीसीएल और पटेल कंपनी की लापरवाही के कारण वर्ष 2026 तक भी परियोजना का कार्य पूरा होता नहीं दिख रहा है। ठेकेदार यूनियन के प्रधान हितेश नेगी ने बताया कि जनवरी, 2023 में मांग की गई थी कि 90 प्रतिशत राशि का भुगतान तुरंत किया जाए, लेकिन आज तक भुगतान नहीं हुआ है। पटेल कंपनी ने , 2023 में 16 ठेकेदारों का छह महीने का 35 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं किया है। कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन की ओर से निर्माणाधीन 450 मेगावाट पावर प्लांट के लिए पर्याप्त धन राशि नहीं दी जा रही है। इस कारण ठेकेदारों को भुगतान नहीं हो पा रहा है। एचपीसीसीएल के प्रबंध निदेशक खेम सिंह ठाकुर ने बताया कि पटेल कंपनी को पावर प्रोजेक्ट बनाने के लिए पिछले साल तक 160 करोड़ रुपये दिए गए हैं। अभी तक 50 प्रतिशत काम हो चुका है, सिर्फ वेराज का काम नहीं हुआ है। पावर प्लांट और सुरंग का 50 प्रतिशत से ज्यादा काम हो गया है। 7,712 मीटर लंबी सुरंग बन चुकी है। सिर्फ 171 मीटर लंबी खुदाई का काम शेष है। पावर प्लांट में मशीन लगाने का काम शुरू हो गया था, लेकिन 11 मार्च से किसी कारण काम बंद पड़ा है। पटेल कंपनी के जनरल मैनेजर बीरेंद्र शर्मा ने कहा कि इसी सिलसिले में पटेल कंपनी के उच्च अधिकारी मुंबई से शिमला आ चुके हैं और हिमाचल प्रदेश पावर कारपोरेशन के अधिकारियों से बैठकें भी हो रही है। कुछ दिनों में अच्छे नतीजे आने की उमीद है। जल्द काम शुरू किया जाएगा।