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Rampur Bushahar News: अल्ट्रासाउंड मशीन हुई पुरानी, निजी लैब में टेस्ट करवा रहीं गर्भवती महिलाएं
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चार जिलों की गर्भवती महिलाएं निशुल्क उपचार की सुविधा से वंचित, टेस्ट के 8,00 से दो हजार रुपये चुकाने को मजबूर
बेहतर इमेज नहीं आने से पेश आ रही परेशानी, आधुनिक मशीन स्थापित करने की मांग
सुभाष सेन
रामपुर बुशहर। प्रदेश के अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व सभी तरह की स्वास्थ्य सेवाएं निशुल्क दी जा रही हैं, लेकिन चार जिलों से रामपुर के खनेरी अस्पताल पहुंच रही गर्भवती महिलाओं को इस सुविधा से वंचित रहना पड़ रहा है। मजबूरी में गर्भवती महिलाएं निजी संस्थानों में भारी भरकम शुल्क चुकाकर टेस्ट करवाने को मजबूर है। जानकारी के मुताबिक खनेरी अस्पताल की पुरानी अल्ट्रासाउंड मशीन से बेहतर इमेज नहीं मिलने के कारण मरीजों को निजी संस्थानों में टेस्ट करवाने के लिए जाना पड़ रहा है। सबसे अधिक प्रभावित गरीब तबके के मरीज हो रहे हैं, जो बेहतर उपचार के लिए सैकड़ों किलोमीटर का सफर तयकर यहां पहुंचते हैं। यहां पहुंचने के बाद ऐसे मरीज टेस्ट करवाने के लिए निजी संस्थानों में लुटने को मजबूर हैं। गौर हो कि महात्मा गांधी खनेरी अस्पताल शिमला, किन्नौर, कुल्लू और मंडी जिले के हजारों लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवा रहा है। यहां महिला रोग से जुड़े करीब तीन सौ मामले रोजाना आते हैं, जबकि अस्पताल की कुल ओपीडी 12,00 से अधिक रहती है। अस्पताल में वर्ष 2013-14 में अल्ट्रासाउंड मशीन स्थापित की गई है, लेकिन अब यह मशीन हांफ चुकीी है। मशीन से अल्ट्रासाउंड इमेज के बेहतर परिणाम नहीं मिल रहे हैं। इस कारण गर्भवती महिलाओं को निजी संस्थानों में 800 से 2,000 हजार रुपये देकर टेस्ट करवाने पड़ रहे हैं। अधिकतर महिलाएं दुर्गम और ग्रामीण इलाकों से कई किलोमीटर का सफर कर अस्पताल में बेहतर उपचार की उम्मीद के साथ पहुंचती हैं लेकिन यहां आकर उन्हें निराश होना पड़ रहा है। बीते माह रोगी कल्याण समिति की बैठक में भी सदस्यों ने अस्पताल में स्थापित अल्ट्रासाउंड मशीन का मामला उठाया था और नई आधुनिक मशीन स्थापित करने की मांग उठाई थी।
कोट्स
अस्पताल की अल्ट्रासाउंड मशीन काफी पुरानी है। नई मशीन लगाने के बारे में प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग से पत्राचार किया गया है।
डॉ. प्रकाश डरोच, एमएस, खनेरी अस्पताल
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बेहतर इमेज नहीं आने से पेश आ रही परेशानी, आधुनिक मशीन स्थापित करने की मांग
सुभाष सेन
रामपुर बुशहर। प्रदेश के अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व सभी तरह की स्वास्थ्य सेवाएं निशुल्क दी जा रही हैं, लेकिन चार जिलों से रामपुर के खनेरी अस्पताल पहुंच रही गर्भवती महिलाओं को इस सुविधा से वंचित रहना पड़ रहा है। मजबूरी में गर्भवती महिलाएं निजी संस्थानों में भारी भरकम शुल्क चुकाकर टेस्ट करवाने को मजबूर है। जानकारी के मुताबिक खनेरी अस्पताल की पुरानी अल्ट्रासाउंड मशीन से बेहतर इमेज नहीं मिलने के कारण मरीजों को निजी संस्थानों में टेस्ट करवाने के लिए जाना पड़ रहा है। सबसे अधिक प्रभावित गरीब तबके के मरीज हो रहे हैं, जो बेहतर उपचार के लिए सैकड़ों किलोमीटर का सफर तयकर यहां पहुंचते हैं। यहां पहुंचने के बाद ऐसे मरीज टेस्ट करवाने के लिए निजी संस्थानों में लुटने को मजबूर हैं। गौर हो कि महात्मा गांधी खनेरी अस्पताल शिमला, किन्नौर, कुल्लू और मंडी जिले के हजारों लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवा रहा है। यहां महिला रोग से जुड़े करीब तीन सौ मामले रोजाना आते हैं, जबकि अस्पताल की कुल ओपीडी 12,00 से अधिक रहती है। अस्पताल में वर्ष 2013-14 में अल्ट्रासाउंड मशीन स्थापित की गई है, लेकिन अब यह मशीन हांफ चुकीी है। मशीन से अल्ट्रासाउंड इमेज के बेहतर परिणाम नहीं मिल रहे हैं। इस कारण गर्भवती महिलाओं को निजी संस्थानों में 800 से 2,000 हजार रुपये देकर टेस्ट करवाने पड़ रहे हैं। अधिकतर महिलाएं दुर्गम और ग्रामीण इलाकों से कई किलोमीटर का सफर कर अस्पताल में बेहतर उपचार की उम्मीद के साथ पहुंचती हैं लेकिन यहां आकर उन्हें निराश होना पड़ रहा है। बीते माह रोगी कल्याण समिति की बैठक में भी सदस्यों ने अस्पताल में स्थापित अल्ट्रासाउंड मशीन का मामला उठाया था और नई आधुनिक मशीन स्थापित करने की मांग उठाई थी।
कोट्स
अस्पताल की अल्ट्रासाउंड मशीन काफी पुरानी है। नई मशीन लगाने के बारे में प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग से पत्राचार किया गया है।
डॉ. प्रकाश डरोच, एमएस, खनेरी अस्पताल