फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Rampur Bushahar News ›   rampur news, chlorotic, virus, detected in apple crop

Rampur Bushahar News: क्लोरोटिक वायरस की चपेट में आए सेब के बगीचे

Thu, 23 May 2024 07:56 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 23 May 2024 07:56 PM IST
विज्ञापन
विशेषज्ञों की सलाह, किसी भी तरह के फंफूदनाशक का छिड़काव न करें बागवान
विज्ञापन

एक से डेढ़ माह में खुद खत्म हो जाएगा वायरस का प्रभाव



संवाद न्यूज एजेंसी



रोहड़ू। सेब के बगीचे इन दिनों क्लोरोटिक वायरस की चपेट में आ गए हैं। वायरस से सेब की पत्तियां मुरझा रही हैं। चिंता की बात यह है कि बागवान पत्तियों को मुरझाता देख बिना विशेषज्ञों की सलाह के धड़ल्ले से दवाइयों का छिड़काव कर रहे हैं। बागवानी विशेषज्ञों ने बागवानों को वायरस से चिंतित न होने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि क्लोरोटिक वायरस अपना कार्यकाल पूरा होने के बाद इसका असर खुद ही खत्म हो जाएगा। विशेषज्ञों के मुताबिक वायरस के फैलने से सेब के पौधों की पत्तियां मुरझा रही है। साथ ही पत्तियों पर काले रंग के धब्बे पड़ रहे हैं। पत्तियों को देखने से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि जैसे पत्तियां जल गईं हो। बागवान इस बीमारी को अल्टर्नेरिया और मार्सोनिना रोग के शुरूआती लक्षण मान रहे हैं। यह रोग अधिक वर्षा के कारण पनपता है, जिससे समय से पूर्व पतझड़ होता है। इस दौरान बागवान बिना विशेषज्ञ सलाह के धड़ल्ले से विभिन्न कंपनियों के फफूंदीनाशकों का छिडक़ाव कर रहे हैं जबकि सेब के बगीचों में क्लोरोटिक वायरस फैला हुआ है। यह वायरस किसी भी फफूंदीनाशक और कीटनाशक के छिडक़ाव से समाप्त नहीं होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि वायरस एक से डेढ़ माह तक बगीचे में रहेगा और इसके बाद स्वत: ही खत्म हो जाएगा। इस वायरस के प्रभाव से पौधे पर निकली पहले की पत्तियों पर प्रभाव रहता है जबकि दूसरे चरण में निकली पत्तियों पर वायरस का प्रभाव खुद ही समाप्त हो जाएगा। ऐसे में बागवानों को वायरस से घबराने की जरूरत नहीं है। साथ ही किसी प्रकार का छिड़काव भी नहीं करना है।

कोट्स

कई बगीचे क्लोरोटिक वायरस के चपेट मे हैं, लेकिन बागवान बिना किसी सलाह के स्प्रे कर रहे हैं। यह वायरस किसी भी छिड़काव से समाप्त नहीं होगा। वायरस अपना पूरा समय लेगा। बागवानों को इससे घबराने की जरूरत नहीं है। एक से डेढ़ माह के बाद पौधे से वायरस का प्रभाव खत्म हो जाएगा।
विज्ञापन

डाॅ. आगर दास, पूर्व उद्यान विकास अधिकारी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed