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Rampur Bushahar News: 12 से 30 रुपये किलो के हिसाब से सेब बेचने को मजबूर बागवान
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दलाश (कुल्लू)। सेब के दामों में आई भारी गिरावट के कारण बागवानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। हालत यह है कि बागवानों को मंडियों में 12 से 30 रुपये किलो दाम मिल रहे हैं। इस तरह से आनी उपमंडल क्षेत्र में बागवानों को ओले से प्रभावित सेब के दाम 300 से 700 रुपये तक ही मिल रहे हैं।
वहीं कुछ सेब तो सेब मंडी में बिक ही नहीं रहा हैं। हालत यह है कि बागवानों के लिए सालभर सेब की फसल पर होने वाले खर्च की लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। अब मजबूरन बागवान सेब को एचपीएमसी को महज 11 रुपये किलो के हिसाब से बोरियों में बेच रहे हैं। गौर हो कि इस साल सेब की फसल पर मौसम की मार पड़ी है। पहले सर्दियों के मौसम में बारिश बर्फबारी नहीं हुई।
इस कारण सेब की फसल न के बराबर है। वहीं मई और जून माह में ओले ने फसल को भारी नुकसान पहुंचाया। अब सेब फसल मंडियों में बेचने के लिए तैयार हुई, तो सेब के दामों में गिरावट से बागवान खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। सेब की एक पेटी को मंडी तक पहुंचाने के लिए करीब 400 रुपये खर्च होते हैं, वहीं जब यही पेटी बाजार में 300 से 700 रुपये तक बिकती है, तो बागवान को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
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हालांकि सेब सीजन की शुरुआत में ओले वाला सेब 1,500 से 2,000 तक बिका और अब यही सेब 300 से 700 तक बड़ी मुश्किल से बिक रहा है। क्षेत्र के बागवान विनोद शर्मा, हुकम चंद, जीवत राम, पोपेंद्र, सोनू और दलीप ने बताया कि इस वर्ष पहले प्राकृतिक आपदा से सेब पर कहर बरपा और अब सेब के औने पौने दामों ने बागवानों की कमर तोड़कर रख दी है। ऐसे में बागवान मजबूरी में एचपीएमसी के कलेक्शन सेंटरों में ही 11 रुपये प्रतिकिलो के दाम पर सेब बेचने को मजबूर हैं। खेगसू फल मंडी के पूर्व अध्यक्ष राकेश वर्मा ने बताया कि अच्छा सेब 2,000 से 2्र,500 रुपये तक बिक रहा है, जबकि ओले वाले सेब के दामों में गिरावट आई है।
फसल कम होने के कारण बागवान हरा और ओलों के दागों वाले सेब को भी मंडियों में लेकर आ रहे हैं। इस बार सेब पेटियों की पैकिंग भी हल्की है। इस कारण बाहर से आए खरीदारों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। खरीदारों को हुए घाटे के कारण ओले वाले सेब के दामों में गिरावट आई है।
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वहीं कुछ सेब तो सेब मंडी में बिक ही नहीं रहा हैं। हालत यह है कि बागवानों के लिए सालभर सेब की फसल पर होने वाले खर्च की लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। अब मजबूरन बागवान सेब को एचपीएमसी को महज 11 रुपये किलो के हिसाब से बोरियों में बेच रहे हैं। गौर हो कि इस साल सेब की फसल पर मौसम की मार पड़ी है। पहले सर्दियों के मौसम में बारिश बर्फबारी नहीं हुई।
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इस कारण सेब की फसल न के बराबर है। वहीं मई और जून माह में ओले ने फसल को भारी नुकसान पहुंचाया। अब सेब फसल मंडियों में बेचने के लिए तैयार हुई, तो सेब के दामों में गिरावट से बागवान खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। सेब की एक पेटी को मंडी तक पहुंचाने के लिए करीब 400 रुपये खर्च होते हैं, वहीं जब यही पेटी बाजार में 300 से 700 रुपये तक बिकती है, तो बागवान को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
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हालांकि सेब सीजन की शुरुआत में ओले वाला सेब 1,500 से 2,000 तक बिका और अब यही सेब 300 से 700 तक बड़ी मुश्किल से बिक रहा है। क्षेत्र के बागवान विनोद शर्मा, हुकम चंद, जीवत राम, पोपेंद्र, सोनू और दलीप ने बताया कि इस वर्ष पहले प्राकृतिक आपदा से सेब पर कहर बरपा और अब सेब के औने पौने दामों ने बागवानों की कमर तोड़कर रख दी है। ऐसे में बागवान मजबूरी में एचपीएमसी के कलेक्शन सेंटरों में ही 11 रुपये प्रतिकिलो के दाम पर सेब बेचने को मजबूर हैं। खेगसू फल मंडी के पूर्व अध्यक्ष राकेश वर्मा ने बताया कि अच्छा सेब 2,000 से 2्र,500 रुपये तक बिक रहा है, जबकि ओले वाले सेब के दामों में गिरावट आई है।
फसल कम होने के कारण बागवान हरा और ओलों के दागों वाले सेब को भी मंडियों में लेकर आ रहे हैं। इस बार सेब पेटियों की पैकिंग भी हल्की है। इस कारण बाहर से आए खरीदारों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। खरीदारों को हुए घाटे के कारण ओले वाले सेब के दामों में गिरावट आई है।