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Rampur Bushahar News: बारिश से सेब के बगीचों में असमय पत्तझड़ रोग का खतरा बढ़ा

Mon, 29 Apr 2024 06:04 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 29 Apr 2024 06:04 PM IST
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बीमारी के प्रारंभिक लक्षण दिखने पर फफूंदनाशक दवाओं का करें छिड़काव
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। जिले में लगातार हो रही बारिश सेब के बगीचों में असमय पत्तझड़ यानि मोर्सोनिना बीमारी के संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। इसको देखते हुए विशेषज्ञों ने बागवानों को बगीचों का उचित प्रबंधन करने की सलाह दी है। मार्सोनिना धब्बा रोग, डिप्लोकार्पोन माली नामक फफूंद के कारण होता है। इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए बागवानों को समय पर पहल करने की जरूरत है। कृषि विज्ञान केंद्र रोहड़ू की प्रभारी एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डाॅ. उषा शर्मा ने बताया कि रोग के लक्षण पत्तों की ऊपरी सतह पर गहरे हरे रंग के गोलाकार धब्बों के रूप में दिखाई देते हैं, जो आगे चलकर आपस में मिलकर 5-10 मिलीमीटर बड़े गहरे भूरे रंग के धब्बों में बदल जाते हैं। इससे पत्ते असमय गिर जाते हैं। साल 2023 के अनुकूल मौसम की वजह से इस बीमारी की गंभीरता काफी ज्यादा बढ़ गई थी। इस साल खासकर उन बागीचों में जहां पिछले साल इस बीमारी का प्रकोप ज्यादा था और सर्दियों में संक्रमित पत्तियों का सही प्रबंधन नहीं किया गया, वहां बीमारी के फैलने का खतरा ज्यादा रहेगा। इसलिए बागवानों को सलाह दी जाती है कि समय रहते इस समस्या से प्रभावी ढंग से लड़ने के लिए, एकीकृत दृष्टिकोण को अपनाया जाए। उन्होंने कहा कि बगीचों से झाड़ियों और घास को साफकर उचित वायु संचार और धूप को बढ़ावा देने से फफूंद के पनपने के लिए प्रतिकूल वातावरण बनाया जा सकता है। बागवानी विश्वविद्यालय नौणी की ओर से अनुमोदित फफूंदनाशक दवाओं का छिड़काव, फल के अखरोट के आकार की अवस्था से शुरू करना संवेदनशील पत्तियों को संक्रमण से बचाने के लिए एक निवारक उपाय के रूप में कार्य करता है। बीमारी के ज्यादा फैलने वाले समय पर जब वातावरण अधिक अनुकूल हो नियमित निगरानी और फफूंदनाशक दवाओं का छिड़काव करने से रोग नियंत्रण प्रभावी हो सकता है। उन्होंने बागवानों को सलाह दी कि एकीकृत प्रबंधन दृष्टिकोण अपनाते हुए, फफूंदनाशक दवाओं के उपयोग के साथ सही कल्चरल मिलाकर रोग नियंत्रण किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इसे अमल में लाने से, बागवान मार्सोनिना यानी असमय पतझड़ रोग की प्रभावी ढंग से रोकथाम कर सकते हैं। उन्होंने कहा आजकल इस बीमारी से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए शुरुआती रोकथाम उपाय महत्वपूर्ण हैं।
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