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Rampur Bushahar News: महिलाओं ने शाख माता का किया विसर्जन
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रामपुर मनाया तीज हरतालिका पर्व
रामपुर बुशहर/ दलाश/निरमंड। ऊपरी हिमाचल में वीरवार को तीज हरतालिका पर्व धूमधाम से मनाया गया। तीज हरतालिका पर्व को ग्रामीण क्षेत्रों में शाख पर्व के नाम से जाना जाता है। उपमंडल के शिंगला, रचोली, लालसा, डंसा, शनेरी, रंदल, निरमंड, दलाश, रिवाड़ी, चपोहल, रौं और गोहाण सहित अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में धूमधाम से तीज हरितालिका पर्व मनाया गया। हर वर्ष भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी को शाख पर्व मनाया जाता है। शाख पर्व के नौवें दिन वीरवार को शिंगला की बावड़ी और दलाश में ऋषि पंचमी को प्राकृतिक जल स्रोत के पास महिलाओं ने शाख माता का विसर्जन किया। ग्रामीण हिमादित्य पंचांग के रचयिता उमाशंकर दीक्षित ने कहा कि भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी को महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करके एक तख्तीनुमा पट्टी पर मक्की, जौ की बिजाई करती हैं। नौ दिन तक इसकी पूजा की जाती है। उन्होंने कहा कि एक दंत कथा के अनुसार प्राचीन समय में पृथ्वी पर अकाल पड़ गया था। असुरों ने धरती पर उत्पात मचाना शुरू कर दिया। इस कारण ऋषियों ने भगवान विष्णु की स्तुति की और उन्होंने अपने अंश से माता शाकुंभरी देवी को प्रकट किया। भगवान के अंश अवतार ने राक्षसों का वध किया। उन्हें आशीर्वाद दिया कि पृथ्वी पर अब कभी भी अन्न धन की कमी नहीं होगी। महिलाएं संतान सुख और पुत्र कामना के लिए भी पर्व को मनाती हैं। ऋषि पंचमी के उपलक्ष्य पर दलाश में दो दिवसीय ऋषि मेला भी आयोजित किया जाता है। मेले में सैकड़ों लोग भाग लेते हैं।
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रामपुर बुशहर/ दलाश/निरमंड। ऊपरी हिमाचल में वीरवार को तीज हरतालिका पर्व धूमधाम से मनाया गया। तीज हरतालिका पर्व को ग्रामीण क्षेत्रों में शाख पर्व के नाम से जाना जाता है। उपमंडल के शिंगला, रचोली, लालसा, डंसा, शनेरी, रंदल, निरमंड, दलाश, रिवाड़ी, चपोहल, रौं और गोहाण सहित अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में धूमधाम से तीज हरितालिका पर्व मनाया गया। हर वर्ष भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी को शाख पर्व मनाया जाता है। शाख पर्व के नौवें दिन वीरवार को शिंगला की बावड़ी और दलाश में ऋषि पंचमी को प्राकृतिक जल स्रोत के पास महिलाओं ने शाख माता का विसर्जन किया। ग्रामीण हिमादित्य पंचांग के रचयिता उमाशंकर दीक्षित ने कहा कि भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी को महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करके एक तख्तीनुमा पट्टी पर मक्की, जौ की बिजाई करती हैं। नौ दिन तक इसकी पूजा की जाती है। उन्होंने कहा कि एक दंत कथा के अनुसार प्राचीन समय में पृथ्वी पर अकाल पड़ गया था। असुरों ने धरती पर उत्पात मचाना शुरू कर दिया। इस कारण ऋषियों ने भगवान विष्णु की स्तुति की और उन्होंने अपने अंश से माता शाकुंभरी देवी को प्रकट किया। भगवान के अंश अवतार ने राक्षसों का वध किया। उन्हें आशीर्वाद दिया कि पृथ्वी पर अब कभी भी अन्न धन की कमी नहीं होगी। महिलाएं संतान सुख और पुत्र कामना के लिए भी पर्व को मनाती हैं। ऋषि पंचमी के उपलक्ष्य पर दलाश में दो दिवसीय ऋषि मेला भी आयोजित किया जाता है। मेले में सैकड़ों लोग भाग लेते हैं।