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Rampur Bushahar News: प्रदेश के पहले पशु शवदाह गृह के लिए 25 कंपनियों से सीएसआर फंड का प्रस्ताव किया तैयार

Wed, 02 Sep 2026 11:23 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 02 Sep 2026 11:23 PM IST
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छात्रा अनन्या बसोतिया ने शिमला में पशु शवदाह गृह स्थापित करने का मूल प्रस्ताव प्रस्तुत किया
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संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर।
प्रदेश में पहले पशु शवदाह गृह की स्थापना के लिए कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) कोष से वित्तपोषण का प्रस्ताव दिया गया है। यह प्रस्ताव छात्रा अनन्या बसोतिया ने प्रस्तुत किया। इस महत्वपूर्ण पहल के लिए 25 कंपनियों और फाउंडेशन की एक विस्तृत सूची तैयार की गई है। यह कदम राज्य की मौजूदा वित्तीय बाधाओं को देखते हुए वैकल्पिक फंडिंग स्रोतों की तलाश में उठाया गया है। अनन्या बसोतिया ने शिमला में पशु शवदाह गृह स्थापित करने का मूल प्रस्ताव प्रस्तुत किया था। राज्य सरकार ने इस प्रस्ताव को स्वीकार किया था। हालांकि, राज्य की वित्तीय स्थिति के कारण सीएसआर चैनलों के माध्यम से धन जुटाने पर ध्यान केंद्रित किया गया। बसोतिया ने बताया कि प्रस्तावित मॉडल कम लागत वाला और आसानी से विस्तार योग्य है। उन्होंने पशु कल्याण, पर्यावरण स्वास्थ्य और सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का समर्थन करने वाली कंपनियों की पहचान की है। इनमें से कई कंपनियों का हिमाचल प्रदेश या अन्य पहाड़ी क्षेत्रों में पहले से काम करने का अनुभव है। प्रस्तावित सूची में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, बड़े निजी फाउंडेशन और प्रमुख निगमों की सीएसआर शाखाएं शामिल हैं। टाटा ट्रस्ट्स, रिलायंस फाउंडेशन और जेएसडब्ल्यू फाउंडेशन जैसी प्रमुख कंपनियां इस सूची का हिस्सा हैं। जेएसडब्ल्यू फाउंडेशन के पास हिमाचल में अपनी गोशालाएं और पशु चिकित्सालय हैं। महिंद्रा एंड महिंद्रा ने भी हिमाचल की पंचायतों में आवारा पशु आश्रयों को सह-वित्तपोषित किया है। अडानी फाउंडेशन भी दो गोशाला-सह-पशु चिकित्सा केंद्र संचालित करता है। यह परियोजना पशुओं के लिए मानवीय और उच्च प्रभाव वाली मानी जा रही है। एचसीएल ग्रांट ने 2022 में उत्तराखंड में आवारा पशुओं के बंध्याकरण और शव निपटान के लिए एक पायलट परियोजना को वित्तपोषित किया था। विप्रो केयर्स ने कर्नाटक में मृत पशुओं के लिए इको-शवदाह गृहों को वित्तपोषित किया है। एनएचपीसी का मुख्यालय शिमला में है और उसने पशु शिविरों, गौशालाओं और शवदाह गृहों पर 79 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने हिमाचल के डेयरी क्लस्टरों में मृत पशुओं के लिए भस्मक इकाइयों को पहले ही वित्तपोषित किया है। यह अनुभव हिमाचल में परियोजना के सफल क्रियान्वयन में सहायक होगा।
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