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Rampur Bushahar News: कमीशन के लिए शिक्षा का कारोबार, निजी स्कूल अभिभावकों पर डाल रहे भार

Fri, 07 Feb 2025 11:27 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 07 Feb 2025 11:27 PM IST
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प्राइवेट पब्लिकेशन की किताबें, वर्दी, किताबों के लिए पहले से दुकानें तय
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शिक्षा विभाग की तय राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद की पुस्तकें नहीं पढ़ाई जा रहीं
रतन चौहान
रोहड़ू।
मार्च महीने से स्कूलों में शिक्षा का नया सत्र शुरू हो रहा है, वहीं निजी स्कूलों की मनमानी भी शुरू हो गई है। निजी स्कूलों में दाखिले लेने से पहले अभिभावकों के लिए बच्चों के लिए किताबें, वर्दी व अन्य सामान की खरीदारी की शर्तें तय कर दी गई हैं। हर साल कस्बे, शहर या गांव की विशेष दुकान से किताबें, कॉपी, स्टेशनरी, वर्दी खरीदने के लिए अभिभावकों को विवश किया जाता है। ऐसे स्कूल संचालकों पर प्रशासन और शिक्षा विभाग सख्ती से कार्रवाई भी नहीं कर रहा है। महंगाई के दौर में आम अभिभावकों के लिए निजी स्कूलों के यह फरमान हर साल भारी पड़ते हैं। शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों में पढ़ाई जाने वाली किताबों के नियम तय हैं। स्कूलों में बच्चों के लिए कम दाम वाली राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की पुस्तकें ही पढ़ाई जा सकती हैं, लेकिन निजी स्कूलों में इन नियमों को दरकिनार कर प्राइवेट पब्लिकेशन की पुस्तकों पढ़ाया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों से कस्बों व शहरों के निजी स्कूलों में महंगे प्राइवेट पब्लिकेशन की पुस्तकों की जगह कम दाम वाली राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की पुस्तकें नहीं मंगवाई जा रहीं। ऐसे में शिक्षा को कारोबार में बदल रहे निजी स्कूलों की मनमानी पर शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। सरकारी स्कूल के एक शिक्षक ने बताया कि प्राइवेट पब्लिकेशन की किताब में दुकानदार को अधिक लाभ मिलता है। इसमें स्कूल का भी हिस्सा रहता है। इसी प्रकार वर्दी के लिए भी दुकानदार के साथ पहले से छात्रों की संख्या के आधार पर कमीशन तय रहती है।
अभिभावकों ने जताई मजबूरी
नोटबुक पर स्कूल के नाम की शर्त
अभिभावक रविंद्र सिंह ने बताया कि स्कूल की वर्दी घटिया किस्म की महंगे दाम पर मिल रही है। दो तीन बार वर्दी धोने के बाद रंग उतर जाता है। साल में शर्ट दो से तीन बार व ट्रेक सूट दो बार खरीदना पड़ते हैं। एक अन्य अभिभावक ने बताया कि नोटबुक पर स्कूल का नाम छपने के बाद उसकी कीमत दोगुनी हो जाती है। स्कूलों की शर्त रहती है कि जिस नोटबुक पर उनके स्कूल का नाम छपा होगा। उसको ही उनके स्कूल में मान्यता रहती है।
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स्पोर्ट्स, साइंस और कंप्यूटर लैब के नाम पर चार्ज
अभिभावक सुरेंद्र शर्मा ने बताया कि फीस के साथ कई स्कूल स्पोर्ट्स , साइंस लैब, कंप्यूटर लैब, सहित अन्य चार्ज वसूल रहे हैं। कई स्कूलों के पास न तो पर्याप्त खेल के मैदान है और न ही साइंस व कंप्यूटर की लैब बनाई गई, फिर किस बात की वसूली हो रही है। अभिभावकों ने सरकार से मांग की है कि इस प्रकार की वसूली पर जांच की जाए। --- संवाद
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