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मकर संक्रांति के लिए देवालयों में तैयारियां पूरीं
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रामपुर बाजार में लोहड़ी को लेकर मूंगफली और सामान लेते लोग।
- फोटो : RAMPUR-HP
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आनी (कुल्लू)। जिले के बाह्य सराज में मकर संक्रांति बड़े त्योहार के रूप में मनाई जाती है। बाह्य सराज में इस दिन हर घर से लोग अपने आराध्य देव के मंदिर शीश नवाने दूर-दूर से आते हैं। कहते हैं जो पूरी साल भर अपने ईष्ट देव के दरबार में नहीं गया, वो इस दिन जरूर देवालय जाकर देवता से आशीष प्राप्त करता है।
मकर संक्रांति के दिन बाह्य सराज में घी के साथ खिचड़ी खाने का पुराना प्रचलन आज भी कायम है। खिचड़ी को लोग इस दिन भोग समझकर ग्रहण करते हैं और कहते हैं कि घी-खिचड़ी खाने से उनका पूरा साल सुख और आनंदमय व्यतीत होता है और भोले की अपार कृपा बरसती रहती है। इस दिन सभी लोग एक-दूसरे को पुष्प और द्रुबा भेंटकर गले मिलते हैं। मकर संक्रांति के लिए क्षेत्र के तमाम देवालय पूरी तरह से सज चुके हैं। देवता के कारकून अपने-अपने मंदिरों में पहुंच चुके हैं।
क्षेत्र के शमशरी महादेव, खुड्डीजल देवता, जोगेश्वर महादेव, बैहनी महादेव, बूढ़ा महादेव, कोट बझारी, नारायण, पनेउई नाग, कुंगशी महादेव, लोमश ऋषि, व्यास ऋषि, देउरी दर्गा मंदिर, जल देवता, टकरासी नाग, बाड़ी मां समेत निरमंड के तमाम मंदिरों में आराध्य के दर लोग शीश नवाएंगे। आनी के शमशरी महादेव मंदिर में हजारों साल पुराने इतिहास देखने को यहां के लोगों को मौका मिलता है। इस दिन यहां मंदिर में हजारों साल पुराने शिवलिंग के रहस्य से जनता रूबरू होती है और इस दिन लिंग की उत्पत्ति का रहस्य भी लोग जानते हैं।
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मंदिर कमेटी के कारदार संतोष ठाकुर ने बताया कि शमशरी महादेव मंदिर में साजे माघ को लेकर पूरी तैयारियां कर दी गई हैं। यहां देवता का विशाल झाड़ा होगा। इसमें देवता के गूर के माध्यम से भक्तों को आशीर्वाद देंगे। इसके बाद देवता निश्चतकाल तक स्वर्ग प्रवास के लिए निकलेंगे।
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मकर संक्रांति के दिन बाह्य सराज में घी के साथ खिचड़ी खाने का पुराना प्रचलन आज भी कायम है। खिचड़ी को लोग इस दिन भोग समझकर ग्रहण करते हैं और कहते हैं कि घी-खिचड़ी खाने से उनका पूरा साल सुख और आनंदमय व्यतीत होता है और भोले की अपार कृपा बरसती रहती है। इस दिन सभी लोग एक-दूसरे को पुष्प और द्रुबा भेंटकर गले मिलते हैं। मकर संक्रांति के लिए क्षेत्र के तमाम देवालय पूरी तरह से सज चुके हैं। देवता के कारकून अपने-अपने मंदिरों में पहुंच चुके हैं।
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क्षेत्र के शमशरी महादेव, खुड्डीजल देवता, जोगेश्वर महादेव, बैहनी महादेव, बूढ़ा महादेव, कोट बझारी, नारायण, पनेउई नाग, कुंगशी महादेव, लोमश ऋषि, व्यास ऋषि, देउरी दर्गा मंदिर, जल देवता, टकरासी नाग, बाड़ी मां समेत निरमंड के तमाम मंदिरों में आराध्य के दर लोग शीश नवाएंगे। आनी के शमशरी महादेव मंदिर में हजारों साल पुराने इतिहास देखने को यहां के लोगों को मौका मिलता है। इस दिन यहां मंदिर में हजारों साल पुराने शिवलिंग के रहस्य से जनता रूबरू होती है और इस दिन लिंग की उत्पत्ति का रहस्य भी लोग जानते हैं।
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मंदिर कमेटी के कारदार संतोष ठाकुर ने बताया कि शमशरी महादेव मंदिर में साजे माघ को लेकर पूरी तैयारियां कर दी गई हैं। यहां देवता का विशाल झाड़ा होगा। इसमें देवता के गूर के माध्यम से भक्तों को आशीर्वाद देंगे। इसके बाद देवता निश्चतकाल तक स्वर्ग प्रवास के लिए निकलेंगे।