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फुल्याच के रंग में डूबी सांगला घाटी
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ज्येष्ठ बेरिंग नाग जी सांगला अपने 9/20 प्रजा के साथ उख्यंग पर्व मनाते हुए
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सांगला (किन्नौर)। जनजातीय जिला किन्नौर की सांगला वैली फुल्याच उत्सव के उल्लास में डूब गई है। सांगला वैली में सोमवार से फुल्याच मेला शुरू हो गया। इसके तहत बटसेरी, सापनी, सांगला, कामरू, किल्बा, रामनी, पूनंग, रक्षम, ब्रुआ और शौंग पंचायत में हजारों लोगों की मौजूदगी में पारंपरिक तरीके से ऐतिहासिक पर्व का आगाज हुआ। अब अगले तीन दिनों तक पर्व की धूम रहेगी। इसमें किन्नौर की नाटी आकर्षण का मुख्य केंद्र रहेगी।
सांगला वैली सहित जिले के कई ग्रामीण इलाकों में हर साल फुल्याच पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। पूनंग गांव में मनाए जाने वाले इस पर्व में किन्नौर की समृद्ध लोक संस्कृति की झलक भी देखने को मिलती है। यहां मनाए जाने वाले फुल्याच मेले की अलग ही पहचान होती है। वर्ष में एक बार मनाए जाने वाले इस विशेष पर्व में पुरुष, महिलाएं, युवक और युवतियां देवी देवताओं के सभी कायदे कानूनों को तोड़कर देवता के साथ खींचतान की परंपरा निभाई जाती है। इसके बाद देवताओं का गंगाजल और गोमूत्र से शुद्धिकर मंदिर के भीतर प्रवेश करवाया जाता है।
देवरथ खींचने में महिलाएं बनीं विजेता
फुल्याच मेले में पूनंग गांव के ईष्ट देवता श्रीकुल्डयो नारायण जी और नाग देवता जी को गांव की सभी महिलाएं और पुरुष तिगारिंग नामक स्थान पर खींचने की परंपरा का निर्वहन करते हैं। परंपरा के मुताबिक अगर प्रतियोगिता में महिलाएं जीतती हैं, तो गांव में उस वर्ष कन्याएं अधिक जन्म लेती हैं जबकि पुरुषों के जीतने पर बालक अधिक जन्म लेते हैं। सोमवार को मंदिर परिसर से 200 मीटर की निभाई गई इस परंपरा में महिलाओं ने जीत दर्ज की है। सांगला वैली की बटसेरी, सापनी, सांगला, कामरू, ब्रुआ और शौंग पंचायत में अगले तीन दिन तक ग्रामीण एकजुट होकर वर्षों से संजोई प्रथा का निर्वहन करते हैं। इस दौरान ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषाओं में सजधज मेले में पहुंचते हैं। इस दौरान मेहमान नवाजी का भी खूब दौर चलता है।
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बद्रीनारायण मंदिर कमेटी के मोतमीन मनोज लोक्ट्स, पुजारी प्रदीप नेगी, माथास अजेंद्र नेगी, माली महावीर बिलेंटू, ग्राम पंचायत उपप्रधान पूनंग विरेंद्र नेगी सहित अन्यों ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी फूलों का त्योहार फुल्याच पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। उत्सव के आयोजन को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस पर्व का ग्रामीणों को खासा इंतजार रहता है। उन्होेंन बताया कि अपनी पारंपरिक जीवन शैली और रीति रिवाजों को कायम रखने में यह पर्व अहम भूमिका निभा रहा है।
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सांगला वैली सहित जिले के कई ग्रामीण इलाकों में हर साल फुल्याच पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। पूनंग गांव में मनाए जाने वाले इस पर्व में किन्नौर की समृद्ध लोक संस्कृति की झलक भी देखने को मिलती है। यहां मनाए जाने वाले फुल्याच मेले की अलग ही पहचान होती है। वर्ष में एक बार मनाए जाने वाले इस विशेष पर्व में पुरुष, महिलाएं, युवक और युवतियां देवी देवताओं के सभी कायदे कानूनों को तोड़कर देवता के साथ खींचतान की परंपरा निभाई जाती है। इसके बाद देवताओं का गंगाजल और गोमूत्र से शुद्धिकर मंदिर के भीतर प्रवेश करवाया जाता है।
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देवरथ खींचने में महिलाएं बनीं विजेता
फुल्याच मेले में पूनंग गांव के ईष्ट देवता श्रीकुल्डयो नारायण जी और नाग देवता जी को गांव की सभी महिलाएं और पुरुष तिगारिंग नामक स्थान पर खींचने की परंपरा का निर्वहन करते हैं। परंपरा के मुताबिक अगर प्रतियोगिता में महिलाएं जीतती हैं, तो गांव में उस वर्ष कन्याएं अधिक जन्म लेती हैं जबकि पुरुषों के जीतने पर बालक अधिक जन्म लेते हैं। सोमवार को मंदिर परिसर से 200 मीटर की निभाई गई इस परंपरा में महिलाओं ने जीत दर्ज की है। सांगला वैली की बटसेरी, सापनी, सांगला, कामरू, ब्रुआ और शौंग पंचायत में अगले तीन दिन तक ग्रामीण एकजुट होकर वर्षों से संजोई प्रथा का निर्वहन करते हैं। इस दौरान ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषाओं में सजधज मेले में पहुंचते हैं। इस दौरान मेहमान नवाजी का भी खूब दौर चलता है।
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बद्रीनारायण मंदिर कमेटी के मोतमीन मनोज लोक्ट्स, पुजारी प्रदीप नेगी, माथास अजेंद्र नेगी, माली महावीर बिलेंटू, ग्राम पंचायत उपप्रधान पूनंग विरेंद्र नेगी सहित अन्यों ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी फूलों का त्योहार फुल्याच पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। उत्सव के आयोजन को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस पर्व का ग्रामीणों को खासा इंतजार रहता है। उन्होेंन बताया कि अपनी पारंपरिक जीवन शैली और रीति रिवाजों को कायम रखने में यह पर्व अहम भूमिका निभा रहा है।