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Rampur Bushahar News: इस साल का सत्र भी समाप्ति की ओर, पौड़िया स्कूल को शिक्षकों का इंतजार
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सात साल से चल रहे कई पद रिक्त, कई बच्चे कर चुके पलायन
चौपाल (रोहड़ू)। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला पौड़िया में इस साल का शिक्षा सत्र भी समाप्ति की ओर है, लेकिन बिन अध्यापकों के शिक्षा व्यवस्था रामभरोसे चल रही है। इस स्कूल में सात वर्षों से शिक्षकों के पद रिक्त हैं। अंग्रेजी विषय के प्रवक्ता के रिक्त पद को पूरे सात वर्ष हो गए हैं। इस बीच चार वर्ष पूर्व एक प्रवक्ता दिसंबर में आया, तो फरवरी में स्थानांतरित हो गया। स्कूल में डीपी और इतिहास के प्रवक्ता ही हैं। वहीं, दसवीं से छठी कक्षा के लिए न तो विज्ञान और न ही गणित अध्यापक है। स्कूल में प्रिंसिपल, चार प्रवक्ता, दो टीजीटी और क्लर्क का पद खाली है। लंबी अवधि से पद खाली रहने के कारण अब अभिभावक बच्चों को दूसरे स्कूलों में भेज रहे हैं, लेकिन यहां गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर बच्चे शेष रह गए हैं। कई बार शिक्षा मंत्री ने चौपाल प्रवास के दौरान आश्वासन दिया, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं हुआ। अब इस साल का भी शैक्षणिक सत्र समाप्त हो रहा है और करीब 70 बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ हो रहा है। स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष सीताराम और पंचायत प्रधान तपेंद्र मोहन शर्मा ने बताया कि अध्यापकों की कमी के कारण कई बच्चे दूसरे स्कूलों के लिए पलायन कर चुके हैं। सरकार व विभाग से आग्रह किया है कि ज्यादा नहीं तो गणित, विज्ञान व अंग्रेजी के पद तो प्राथमिकता से भरे जाएं ताकि सुचारु रूप से पढ़ाई चलती रहे। कार्यवाहक प्रिंसिपल मनोज चौहान ने कहा कि खाली पदों की सूचना समय-समय पर विभाग को भेजी गई है। अध्यापकों की कमी से कार्य का दबाव बढ़ गया है।
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चौपाल (रोहड़ू)। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला पौड़िया में इस साल का शिक्षा सत्र भी समाप्ति की ओर है, लेकिन बिन अध्यापकों के शिक्षा व्यवस्था रामभरोसे चल रही है। इस स्कूल में सात वर्षों से शिक्षकों के पद रिक्त हैं। अंग्रेजी विषय के प्रवक्ता के रिक्त पद को पूरे सात वर्ष हो गए हैं। इस बीच चार वर्ष पूर्व एक प्रवक्ता दिसंबर में आया, तो फरवरी में स्थानांतरित हो गया। स्कूल में डीपी और इतिहास के प्रवक्ता ही हैं। वहीं, दसवीं से छठी कक्षा के लिए न तो विज्ञान और न ही गणित अध्यापक है। स्कूल में प्रिंसिपल, चार प्रवक्ता, दो टीजीटी और क्लर्क का पद खाली है। लंबी अवधि से पद खाली रहने के कारण अब अभिभावक बच्चों को दूसरे स्कूलों में भेज रहे हैं, लेकिन यहां गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर बच्चे शेष रह गए हैं। कई बार शिक्षा मंत्री ने चौपाल प्रवास के दौरान आश्वासन दिया, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं हुआ। अब इस साल का भी शैक्षणिक सत्र समाप्त हो रहा है और करीब 70 बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ हो रहा है। स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष सीताराम और पंचायत प्रधान तपेंद्र मोहन शर्मा ने बताया कि अध्यापकों की कमी के कारण कई बच्चे दूसरे स्कूलों के लिए पलायन कर चुके हैं। सरकार व विभाग से आग्रह किया है कि ज्यादा नहीं तो गणित, विज्ञान व अंग्रेजी के पद तो प्राथमिकता से भरे जाएं ताकि सुचारु रूप से पढ़ाई चलती रहे। कार्यवाहक प्रिंसिपल मनोज चौहान ने कहा कि खाली पदों की सूचना समय-समय पर विभाग को भेजी गई है। अध्यापकों की कमी से कार्य का दबाव बढ़ गया है।