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Rampur Bushahar News: सेब की 60 प्रतिशत घटी पैदावार, पुराने बगीचों को पड़ी मौसम की मार
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बागवान भूपेंद्र डोगरा।
मौसम की मार से पुराने बागान प्रभावित, हाई डेंसिटी बागानों में उत्पादन बेहतर
मौसम की मार से पुराने बगीचे प्रभावित, हाई डेंसिटी में उत्पादन बेहतर
चौपाल में 26 लाख के मुकाबले पहुंचीं 10 लाख पेटियां
. बागवान पारंपरिक बागानों के साथ हाई डेंसिटी प्लांटेशन की ओर भी तेजी से बढ़ रहे
संवाद न्यूज एजेंसी
चौपाल (रोहड़ू)। मौसम की बेरुखी ने चौपाल में सेब उत्पादन को बड़ा झटका दिया है। बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और बर्फबारी का सीधा असर सेब की फसल पर पड़ा है। इसका सबसे अधिक असर कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों और पुराने बगीचों में देखने को मिला। वहीं, ऊंचाई वाले क्षेत्रों (हाई डेंसिटी ) के बगीचों में कई बागवानों को अपेक्षाकृत बेहतर उत्पादन मिला है। चौपाल उपमंडल में इस वर्ष सेब उत्पादन में करीब 60 फीसदी तक गिरावट का अनुमान है। पिछले वर्ष उपमंडल से सेब की करीब 26 लाख पेटियां बाजार भेजी गईं थीं, जबकि इस वर्ष अब तक करीब 10 लाख पेटियां ही मंडियों तक पहुंच पाई हैं। बागवानी विभाग के अनुसार इस बार उत्पादन पिछले 10 से 12 वर्षों के न्यूनतम स्तर पर रहने की आशंका है। चौपाल के पुंदर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सेब उत्पादन होता है। गोरली-मड़ावग, मकड़ोग और माटल पंचायतों में करीब 90 फीसदी भूमि पर सेब के बगीचे हैं। मड़ावग क्षेत्र के कई बागवान सामान्य तौर पर 10 से 15 हजार पेटियों तक सेब का उत्पादन करते हैं। अब क्षेत्र के बागवान पारंपरिक बागानों के साथ हाई डेंसिटी प्लांटेशन की ओर भी तेजी से बढ़ रहे हैं। किंग रॉट, डार्क बैरन गाला, शनिको रेड, जीरोमाइन, स्कारलेट स्पर, रेड ब्लॉक्स और सुपर चीफ जैसी किस्में बगीचों में लगाई जा रही हैं।
कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पड़ा असर
बागवान भूपेंद्र डोगरा और दीपक ब्रागटा ने बताया कि मौसम में आए बदलाव का असर कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अधिक देखने को मिला है। पुराने बगीचों में उत्पादन में बड़ी गिरावट आई है, जबकि हाई डेंसिटी पौधों वाले बगीचों में अपेक्षाकृत बेहतर पैदावार हुई है। उन्होंने कहा कि बदलते मौसम के बीच आधुनिक तकनीक से तैयार बागान उत्पादन को बनाए रखने में मददगार साबित हो रहे हैं।
जलवायु परिवर्तन के कारण बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और बर्फबारी जैसी घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है। इस वर्ष भी मौसम की इन परिस्थितियों का सीधा असर सेब उत्पादन पर पड़ा है। बागवानी विभाग की ओर से पुराने बागानों को बदलकर सघन बागवानी यानी हाई डेंसिटी प्लांटेशन को बढ़ावा दिया जा रहा है। बदलती मौसमी परिस्थितियों के बीच आधुनिक बागवानी तकनीक को सेब उत्पादन बनाए रखने के महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
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- डॉ. सुरेंद्र जस्टा, विशेषज्ञ, उद्यान विषयवाद
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मौसम की मार से पुराने बगीचे प्रभावित, हाई डेंसिटी में उत्पादन बेहतर
चौपाल में 26 लाख के मुकाबले पहुंचीं 10 लाख पेटियां
. बागवान पारंपरिक बागानों के साथ हाई डेंसिटी प्लांटेशन की ओर भी तेजी से बढ़ रहे
संवाद न्यूज एजेंसी
चौपाल (रोहड़ू)। मौसम की बेरुखी ने चौपाल में सेब उत्पादन को बड़ा झटका दिया है। बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और बर्फबारी का सीधा असर सेब की फसल पर पड़ा है। इसका सबसे अधिक असर कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों और पुराने बगीचों में देखने को मिला। वहीं, ऊंचाई वाले क्षेत्रों (हाई डेंसिटी ) के बगीचों में कई बागवानों को अपेक्षाकृत बेहतर उत्पादन मिला है। चौपाल उपमंडल में इस वर्ष सेब उत्पादन में करीब 60 फीसदी तक गिरावट का अनुमान है। पिछले वर्ष उपमंडल से सेब की करीब 26 लाख पेटियां बाजार भेजी गईं थीं, जबकि इस वर्ष अब तक करीब 10 लाख पेटियां ही मंडियों तक पहुंच पाई हैं। बागवानी विभाग के अनुसार इस बार उत्पादन पिछले 10 से 12 वर्षों के न्यूनतम स्तर पर रहने की आशंका है। चौपाल के पुंदर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सेब उत्पादन होता है। गोरली-मड़ावग, मकड़ोग और माटल पंचायतों में करीब 90 फीसदी भूमि पर सेब के बगीचे हैं। मड़ावग क्षेत्र के कई बागवान सामान्य तौर पर 10 से 15 हजार पेटियों तक सेब का उत्पादन करते हैं। अब क्षेत्र के बागवान पारंपरिक बागानों के साथ हाई डेंसिटी प्लांटेशन की ओर भी तेजी से बढ़ रहे हैं। किंग रॉट, डार्क बैरन गाला, शनिको रेड, जीरोमाइन, स्कारलेट स्पर, रेड ब्लॉक्स और सुपर चीफ जैसी किस्में बगीचों में लगाई जा रही हैं।
कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पड़ा असर
बागवान भूपेंद्र डोगरा और दीपक ब्रागटा ने बताया कि मौसम में आए बदलाव का असर कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अधिक देखने को मिला है। पुराने बगीचों में उत्पादन में बड़ी गिरावट आई है, जबकि हाई डेंसिटी पौधों वाले बगीचों में अपेक्षाकृत बेहतर पैदावार हुई है। उन्होंने कहा कि बदलते मौसम के बीच आधुनिक तकनीक से तैयार बागान उत्पादन को बनाए रखने में मददगार साबित हो रहे हैं।
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जलवायु परिवर्तन के कारण बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और बर्फबारी जैसी घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है। इस वर्ष भी मौसम की इन परिस्थितियों का सीधा असर सेब उत्पादन पर पड़ा है। बागवानी विभाग की ओर से पुराने बागानों को बदलकर सघन बागवानी यानी हाई डेंसिटी प्लांटेशन को बढ़ावा दिया जा रहा है। बदलती मौसमी परिस्थितियों के बीच आधुनिक बागवानी तकनीक को सेब उत्पादन बनाए रखने के महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
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- डॉ. सुरेंद्र जस्टा, विशेषज्ञ, उद्यान विषयवाद

बागवान भूपेंद्र डोगरा।

बागवान भूपेंद्र डोगरा।