फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Rampur Bushahar News ›   nternational Lavi Fair will be organized in Patbangla Ground, Rampur from today.

Rampur Bushahar News: पाटबंगला मैदान रामपुर में आज से सजेगा लवी मेला

Sun, 10 Nov 2024 11:27 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 10 Nov 2024 11:27 PM IST
विज्ञापन
nternational Lavi Fair will be organized in Patbangla Ground, Rampur from today.
पाट बंगला में अंतरराष्ट्रीय लवी मेला में लगनेन वाले प्रदर्शनी को लेकर वि​​भिन्न विभाग अपने अपन
राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल 11 बजे करेंगे मेले का शुभारंभ
विज्ञापन

संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। रामपुर के पाटबंगला कॉलेज मैदान में सोमवार को अंतरराष्ट्रीय लवी मेले का शुभारंभ होगा। चार दिवसीय व्यापारिक एवं सांस्कृतिक मेले का सुबह 11 बजे राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल शुभारंभ करेंगे। मेले को लेकर प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। मेले में सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। राज्यपाल शिमला नारकंडा से होते हुए रामपुर पहुंचेंगे। मेला कमेटी सचिव एवं एसडीएम निशांत तोमर ने बताया कि मेले की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। 12 नवंबर को उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, 13 नवंबर को लोक निर्माण विभाग मंत्री विक्रमादित्य सिंह शिरकत करेंगे। 14 नवंबर को समापन समारोह में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू पहुंचेंगे। मेले में सजने वाले प्लॉटों की आवंटन प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।
दुकानों से सजा काॅलेज मैदान

रामपुर पाटबंगला लवी मेला मैदान दुकानों से सज गया है। हिमाचल ही नहीं बल्कि बाहरी राज्यों से व्यापारी भी कारोबार करने पहुंच गए हैं। दूसरी ओर ड्राइफ्रूट के लिए विख्यात किन्नौरी मार्केट भी सज चुकी है।
विज्ञापन

1985 में मिला अंतरराष्ट्रीय मेले का दर्जा
1983 में जब वीरभद्र सिंह प्रदेश के पहली बार मुख्यमंत्री बने थे, तो उन्होंने 1985 में लवी को अंतरराष्ट्रीय मेला घोषित किया था। तबसे इस मेले को अंतरराष्ट्रीय मेले के रूप में मनाया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


लवी मेले का इतिहास

बुशहर रियासत के तिब्बत के साथ अच्छे व्यापारिक संबंध थे। यह संबंध इतने सुदृढ़ हो गए कि व्यापार के आदान-प्रदान के लिए लवी मेला शुरू हो गया। बुशहर के राजा केहर सिंह और तिब्बती सेनापति की संधि हुई। उसके बाद व्यापारिक लवी मेले का आयोजन होने लगा। इस मेले में दोनों तरफ के व्यापारियों को कारोबार की छूट दी गई। साल 1911 में तत्कालीन राजा केहर सिंह के काल में लवी मेले में तिब्बत और अफगानिस्तान के व्यापारी कारोबार करने आते थे। बाहरी व्यापारी ड्राइफ्रूट, ऊन, पशमीना और पशुओं सहित घोड़े लेकर रामपुर पहुंचते थे। इसके बदले में रामपुर से नमक, गुड़ सहित अन्य राशन लेकर जाते थे। नमक मंडी जिला के गुम्मा से लाया जाता था। उस वक्त करंसी का इस्तेमाल नहीं किया जाता था। यह केवल व्यापारिक मेला ही नहीं, बल्कि इस मेले में हिमाचल प्रदेश की पुरानी संस्कृति की विशेष झलक दिखाई देती है। 17वीं शताब्दी से शुरू हुए लवी मेले की आज भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान है। इस व्यापारिक मेले का प्रदेश की आर्थिक प्रगति में अहम योगदान माना जाता है। पुराने समय से लवी मेले में ऊन, पश्मीना, हथकरघा, ड्राइफ्रूट, चिलगोजा और स्थानीय उत्पाद की भारत ही नहीं विदेशों में भी मांग थी, जो आज भी है।

ग्रामीण दस्तकारों की आर्थिकी के लिए महत्वपूर्ण मेला

शिमला से करीब 130 किलामीटर दूर रामपुर बुशहर में हर वर्ष 11 नवंबर से अंतरराष्ट्रीय लवी मेले का आयोजन होता है। उत्तर भारत का यह प्रमुख व्यापारिक मेला ग्रामीण दस्तकारों के रोजगार और आर्थिक मजबूती का केंद्र है। मेले के दौरान हस्तनिर्मित वस्त्रों, शॉल, पट्टू, पट्टी, टोपी, मफलर, खारचे आदि की मांग रहती है। वाद्ययंत्रों में विशेष कर ढोल-नगाड़े, करनाले और अन्य वस्तुएं भी मेले में खूब बिकती हैं। अब तो लोग स्थानीय खाद्य उत्पादों को भी मेले में बेचकर अच्छी कमाई करते हैं। आज भी मेले में पारंपरिक वाद्ययंत्रों की खरीद-फरोख्त, ऊनी वस्त्रों, ड्राई फ्रूट और जड़ी-बूटियों की खरीद प्रमुख है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed