{"_id":"6ad35c0568b9951b270ac5bb","slug":"monkey-menace-forces-farmers-to-abandon-farming-rampur-hp-news-c-178-1-ssml1034-172661-2026-10-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rampur Bushahar News: बंदरों के आतंक से किसान खेती छोड़ने को मजबूर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rampur Bushahar News: बंदरों के आतंक से किसान खेती छोड़ने को मजबूर
विज्ञापन
दलाश क्षेत्र में सैकड़ों बीघा उपजाऊ जमीन हो रही बंजर
सेब की फसल और पेड़ों को भी पहुंच रहा नुकसान
संवाद न्यूज एजेंसी
दलाश (कुल्लू)। क्षेत्र में बंदरों के बढ़ते आतंक से किसान-बागवान परेशान हैं। करीब एक दशक से बंदर खेतों में खड़ी फसलों और सेब के बगीचों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि किसानों ने सैकड़ों बीघा उपजाऊ भूमि पर खेती करना लगभग छोड़ दिया है। लगातार हो रहे नुकसान से ग्रामीणों की आजीविका पर भी असर पड़ रहा है।
क्षेत्र के रिवाड़ी, रौं, चपोहल, गोहाण और दलाश सहित आसपास के गांवों में बंदरों का आतंक है। किसान हर वर्ष खेतों में फसलों की बिजाई पर हजारों रुपये खर्च करते हैं, लेकिन फसल तैयार होने से पहले ही बंदर उसे नष्ट कर देते हैं। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और वे खेती से पीछे हटने को मजबूर हैं।
बंदर सेब की फसल को भी भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। सेब क्षेत्र के बागवानों की प्रमुख नकदी फसल है, लेकिन बंदर सेब बर्बाद करने के साथ पेड़ों को भी तोड़ रहे हैं। इससे बागवानों की आमदनी प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों के अनुसार, अब बंदरों ने घरों में भी घुसना शुरू कर दिया है, जिससे लोगों की परेशानी बढ़ गई है। संजीव शर्मा, महेंद्र, सुभाष, ओंकार चंद, नागेंद्र और हरीश ने बताया कि बंदरों के बढ़ते आतंक के कारण उन्हें बच्चों को स्कूल तक छोड़ने जाना पड़ रहा है। लोगों ने वन विभाग से समस्या के स्थायी समाधान की मांग की है। दलाश पंचायत की प्रधान आशा देवी ने वन विभाग से गांव में पिंजरे लगाकर बंदरों को पकड़ने की मांग की है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सेब की फसल और पेड़ों को भी पहुंच रहा नुकसान
संवाद न्यूज एजेंसी
दलाश (कुल्लू)। क्षेत्र में बंदरों के बढ़ते आतंक से किसान-बागवान परेशान हैं। करीब एक दशक से बंदर खेतों में खड़ी फसलों और सेब के बगीचों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि किसानों ने सैकड़ों बीघा उपजाऊ भूमि पर खेती करना लगभग छोड़ दिया है। लगातार हो रहे नुकसान से ग्रामीणों की आजीविका पर भी असर पड़ रहा है।
क्षेत्र के रिवाड़ी, रौं, चपोहल, गोहाण और दलाश सहित आसपास के गांवों में बंदरों का आतंक है। किसान हर वर्ष खेतों में फसलों की बिजाई पर हजारों रुपये खर्च करते हैं, लेकिन फसल तैयार होने से पहले ही बंदर उसे नष्ट कर देते हैं। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और वे खेती से पीछे हटने को मजबूर हैं।
विज्ञापन
बंदर सेब की फसल को भी भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। सेब क्षेत्र के बागवानों की प्रमुख नकदी फसल है, लेकिन बंदर सेब बर्बाद करने के साथ पेड़ों को भी तोड़ रहे हैं। इससे बागवानों की आमदनी प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों के अनुसार, अब बंदरों ने घरों में भी घुसना शुरू कर दिया है, जिससे लोगों की परेशानी बढ़ गई है। संजीव शर्मा, महेंद्र, सुभाष, ओंकार चंद, नागेंद्र और हरीश ने बताया कि बंदरों के बढ़ते आतंक के कारण उन्हें बच्चों को स्कूल तक छोड़ने जाना पड़ रहा है। लोगों ने वन विभाग से समस्या के स्थायी समाधान की मांग की है। दलाश पंचायत की प्रधान आशा देवी ने वन विभाग से गांव में पिंजरे लगाकर बंदरों को पकड़ने की मांग की है।
विज्ञापन