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सतलुज घाटी के इतिहास को संरक्षित रखने की होगी पहल
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सर्वपल्ली बीएड कॉलेज नोगली में आयोजित संगोष्ठी में मौजूद लोग।
- फोटो : RAMPUR-HP
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नोगली (रामपुर बुशहर)। सतलुज घाटी की विलुप्त हो रही संस्कृति और प्राचीन इतिहास को जल्द ही संरक्षित किया जाएगा, जिससे भावी पीढ़ी को अपने क्षेत्र के प्राचीन इतिहास और संस्कृति का बोध हो सके। इतिहास संकलन समिति जिला रामपुर की ओर से सर्वपल्ली राधाकृष्णन बीएड कॉलेज नोगली में आयोजित बैठक में यह फैसला लिया गया। समिति के जिलाध्यक्ष दीपक शर्मा ने बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में रामपुर, निरमंड, कुमारसैन और आनी क्षेत्र के लोगों ने भाग लिया। बैठक में दिवाकर दत्त ने संकल्प पर प्रकाश डाला।
वहीं समिति के सलाहकार डॉ. विनोद आचार्य ने इतिहास संकलन योजना पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए इसकी रूपरेखा, कार्यशैली और उद्देेश्य के अलावा भारतीय इतिहास पर विचार साझा किए। समिति उपाध्यक्ष डॉ. मुकेश शर्मा ने संगठन के विस्तार पर चर्चा की। वहीं इस दौरान विभिन्न वक्ताओं ने सतलुज घाटी के इतिहास सहित प्राचीन लोक गीतों को संरक्षित करने पर अपने विचार रखे। इसके अलावा इतिहास संकलन योजना के सभी बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की। जनजातीय जिला किन्नौर की संस्कृति और इतिहास को खंगालने के लिए भी योजना बनाने का फैसला लिया गया। इस मौके पर डॉ. आश्मी भास्कर, छविंद्र शर्मा, शिवराज शर्मा, मोहर सिंह ठाकुर, दिनेश कुमार और श्यामानंद सहित कई अन्य लोग उपस्थित रहे।
डॉ. कपिल और एके गोस्वामी बने रामपुर खंड संयोजक
बैठक में प्राचीन संस्कृति और इतिहास के लेखन कार्य को शुरू करने के लिए खंड संयोजक भी बनाए गए। जिसमें डॉ. कपिल शर्मा और एके गोस्वामी को रामपुर खंड का संयोजक, डॉ. हिमेंद्र बाली और पंडित शशिपाल डोगरा को कुमारसैन का, श्यामानंद और शिवराज शर्मा को आनी का और रंजना को निरमंड खंड का संयोजक चुना गया।
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वहीं समिति के सलाहकार डॉ. विनोद आचार्य ने इतिहास संकलन योजना पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए इसकी रूपरेखा, कार्यशैली और उद्देेश्य के अलावा भारतीय इतिहास पर विचार साझा किए। समिति उपाध्यक्ष डॉ. मुकेश शर्मा ने संगठन के विस्तार पर चर्चा की। वहीं इस दौरान विभिन्न वक्ताओं ने सतलुज घाटी के इतिहास सहित प्राचीन लोक गीतों को संरक्षित करने पर अपने विचार रखे। इसके अलावा इतिहास संकलन योजना के सभी बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की। जनजातीय जिला किन्नौर की संस्कृति और इतिहास को खंगालने के लिए भी योजना बनाने का फैसला लिया गया। इस मौके पर डॉ. आश्मी भास्कर, छविंद्र शर्मा, शिवराज शर्मा, मोहर सिंह ठाकुर, दिनेश कुमार और श्यामानंद सहित कई अन्य लोग उपस्थित रहे।
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डॉ. कपिल और एके गोस्वामी बने रामपुर खंड संयोजक
बैठक में प्राचीन संस्कृति और इतिहास के लेखन कार्य को शुरू करने के लिए खंड संयोजक भी बनाए गए। जिसमें डॉ. कपिल शर्मा और एके गोस्वामी को रामपुर खंड का संयोजक, डॉ. हिमेंद्र बाली और पंडित शशिपाल डोगरा को कुमारसैन का, श्यामानंद और शिवराज शर्मा को आनी का और रंजना को निरमंड खंड का संयोजक चुना गया।
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