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Rampur Bushahar News: मकर संक्रांति को स्वर्ग प्रवास पर जाएंगे देवता, एक माह बाद लौटकर करेंगे सालभर की भविष्यवाणी

Sun, 12 Jan 2025 11:11 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 12 Jan 2025 11:11 PM IST
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पूजा-अर्चना और खिचड़ी बांटकर दी जाएगी विदाई, मंदिरों के कपाट होंगे बंद, धार्मिक अनुष्ठानों पर लगेगी ब्रेक
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देवालय लौटने पर गुर के माध्यम से सुनाएंगे अच्छा-बुरा वर्ष फल

संवाद न्यूज एजेंसी

रामपुर बुशहर। प्राचीन काल से चली आ रही धार्मिक परंपरा का निर्वहन करते हुए मकर संक्रांति के दिन देवी-देवता एक माह के स्वर्ग प्रवास के लिए रवाना हो जाएंगे। ग्रामीण तड़के देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना कर और खिचड़ी बांट कर विदा करेंगे। एक माह तक मंदिर सुने पड़ जाएंगे और धार्मिक अनुष्ठानों पर रोक रहेगी। गौर हो कि हर साल मकर संक्रांति के दिन जिला शिमला और कुल्लू जिले के देवी-देवता एक माह के लिए इंद्रदेव की सभा में शरीक होने के लिए अपने-अपने देवालयों से प्रस्थान करते हैं, जहां देवी और देवता सालभर के होने वाले अच्छे-बुरे फलादेश को लेकर मंत्रणा करते हैं। एक माह तक मंदिरों में अन्य दिनों की तरह श्रद्धालुओं की चहल-पहल बंद हो जाएगी और मंदिर सुने पड़ जाएंगे। मान्यता के अनुसार कुल्लू जिले के कुछ देवी-देवता सतरेजा पर्व पर एक सप्ताह के भीतर ही देवालयों में प्रवेश करते हैं। वहीं, शिमला जिले के कुछ देवी-देवता भी एक पखवाड़े में ही मंदिरों में लौटते हैं, जिनमें 12/20 वैली के नाग देवता करेरी भी शामिल हैं। अधिकांश देवी-देवता एक माह बाद फाल्गुन संक्रांति को ही अपने अपने देवालयों में प्रवेश करते हैं। एक माह तक मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे। नरेशर लक्ष्मी नारायण मंदिर न्यास कमेटी कुमसू के अध्यक्ष जीवन सिंह चौहान, परशुराम मंदिर समिति के अध्यक्ष खेलचंद नेगी और महासचिव जीएल डमालू ने कहा कि मकर संक्रांति को देवता के गुर की ओर से विधि विधान देव परंपरा का निर्वहन करते हुए पूजा-अर्चना और खिचड़ी बांट कर देवता साहिब को स्वर्ग प्रवास के लिए विदा किया जाता है। प्राचीन समय से चली आ रही देव परंपरा का आधुनिक युग में भी बखूबी निर्वहन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि देवी-देवताओं के स्वर्ग प्रवास पर चले जाने से मंदिरों में कोई भी धार्मिक अनुष्ठान नहीं होंगे। एक माह तक मंदिरों के कपाट बंद हो जाएंगे। एक माह बाद ही देवी देवताओं के लौटने पर मंदिर के कपाट खुलेंगे और मंदिरों में पूजा-अर्चना शुरू होगी।
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