फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Rampur Bushahar News ›   kinnaur disaster due to project

भारी विस्फोटों से हिले पहाड़, खतरे की जद में किन्नौर

Thu, 12 Aug 2021 11:03 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 12 Aug 2021 11:03 PM IST
विज्ञापन
kinnaur disaster due to project
निगुलसरी में नहीं थम रहा भूस्खलन का सिलसिला। - फोटो : RAMPUR-HP
बीरबल नेगी
विज्ञापन

सांगला (किन्नौर)। जिले में भारी विस्फोटों और अंधाधुंध परियोजनाओं के निर्माण से जिला किन्नौर के पहाड़ पूरी तरह से हिल गए हैं। इससे जिले के अस्तित्व पर ही खतरा मंडरा रहा है। वहीं भूकंप की दृष्टि से भी जनजातीय जिला अति संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में जिले की 80 हजार की आबादी खतरे के मुहाने पर खड़ी है। देश सीमा को जोड़ने वाले नेशनल हाईवे-पांच को चौड़ा और परियोजनाओं के निर्माण के लिए इस्तेमाल किए गए भारी विस्फोटों से भी दर्जनों स्थानों पर पहाड़ हिल गए हैं। इस कारण कहां, कब भूस्खलन हो जाए, यह कहना मुश्किल है।
निगुलसरी में बुधवार को हुए दर्दनाक हादसे के बाद जिले के लोगों में खौफ का माहौल बना हुआ है। जिले के लोग पहाड़ों के दरकने के लिए सबसे अधिक दोष विद्युत परियोजना के निर्माण को दे रहे हैं। जिले में अभी तक 32 विद्युत परियोजनाओं के निर्माण को मंजूरी मिली है। इसमें 14 परियोजनाएं विद्युत उत्पादन, जबकि शेष 18 परियोजनाएं निर्माणाधीन और प्रस्तावित हैं।
विज्ञापन

परियोजना निर्माण के लिए हुई बेतरतीब खुदाई और वनों का कटाव भी भूस्खलन की बड़ी वजह बताई जा रही है। बुधवार को निगुलसरी में एनएच पांच पर चील जंगल के पास पहाड़ी दरक गई। इसकी चपेट में दर्जनों लोग आ गए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

इससे पूर्व भी निगुलसरी के 26 सेक्टर में करीब 100 मीटर सड़क धंस गई थी और दो दिन तक जिले का संपर्क कट गया था। एनएच पांच पर केवल यही जगह खतरों से भरी नहीं है, अपितु चौरा से लेकर समदू तक करीब 195 किलोमीटर एनएच पर कई स्थानों में पहाड़ दरक रहे हैं। जिले के निगुलसरी के नजदीक चील जंगल, सोल्डिंग, नाथपा, उरनी ढांक, लाल ढांक, पांगी नाला, पूर्वनी झूला, श्रीमति ढांक, मलिंग, भगत नाला और टिंकू नाला सहित अन्य कई स्थानों पर आए दिन भूस्खलन होता रहता है। हाल ही में इस मार्ग को चौड़ा करने का कार्य किया गया है।

जिले के लोगों का आरोप है कि एनएच को चौड़ा करते समय नियम कायदों को दरकिनार कर भारी ब्लास्टिंग की गई। इसके कारण पहाड़ जगह-जगह से हिल गए और कच्चे हो गए। जिले के लोगों ने प्रदेश सरकार से गुहार लगाई है कि जिले में पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए ही परियोजनाओं का निर्माण किया जाएगा और प्रस्तावित प्रोजेक्टों पर रोक लगाई जाए। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed