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हाथों में मशालें लेकर देवताओं का किया अभिनंदन
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शिमला जिले के रोहड़ू के जागरा उत्सव में मशालें जलाकर देवता बनाड़ का अभिनंदन करते हुए लोग। संवाद
- फोटो : RAMPUR-HP
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रोहडू़। ऋषि पंचमी की रात शराचली क्षेत्र के पुजारली में जागरा महोत्सव का आयोजन किया गया। जागरे में शराचली क्षेत्र की पांच पंचायतों सहित जुब्बल तहसील के दर्जनों गांवों के लोगों ने भाग लिया। जागरे का आयोजन देवता बनाड़ और देवता देशमोलिया के आशीर्वाद से किया गया।
क्षेत्र में जागरा महोत्सव का आयोजन 29 अगस्त से शुरू हो गया था। ऋषि पंचमी की रात एक सितंबर को पुजारली में देवता महाराज बनाड़ व देवता देशमोलिया के जागरे के साथ ही महोत्सव संपन्न हो गया। जागरे में लकड़ी की बिंडाली (मशाल) जलाकर लोगों ने देवता का अभिनंदन किया। हाथों में मशाल लेकर देवता के अभिनंदन में तू बरमा न जाए विरसुए.. गाने की धुन पर लोग नृत्य करते रहे। देवता के अभिनंदन में गाए जाने वाला यह विशेष गीत हर वर्ष जागरा महोत्सव में गाया जाता है। सुख समृद्धि के लिए ग्रामीण रातभर पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों पर नाचते रहे। देवताओं के गुरों का नृत्य भी महोत्सव का मुख्य आकर्षण रहा। रात भर चले जागरा महोत्सव को देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग मौजूद रहे।
देशमोलिया देवता के बजीर सुरेंद्र पुनाटू ने बताया कि हर वर्ष जागरा महोत्सव पारंपरिक ढंग से मनाया जाता है। देवता महाराज बनाड़ व देवता देशमोलिया के जागरे में शराचली सहित जुब्बल के दर्जनों गांव के लोग अभिनंदन करने के लिए पहुंचते हैं।
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क्षेत्र में जागरा महोत्सव का आयोजन 29 अगस्त से शुरू हो गया था। ऋषि पंचमी की रात एक सितंबर को पुजारली में देवता महाराज बनाड़ व देवता देशमोलिया के जागरे के साथ ही महोत्सव संपन्न हो गया। जागरे में लकड़ी की बिंडाली (मशाल) जलाकर लोगों ने देवता का अभिनंदन किया। हाथों में मशाल लेकर देवता के अभिनंदन में तू बरमा न जाए विरसुए.. गाने की धुन पर लोग नृत्य करते रहे। देवता के अभिनंदन में गाए जाने वाला यह विशेष गीत हर वर्ष जागरा महोत्सव में गाया जाता है। सुख समृद्धि के लिए ग्रामीण रातभर पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों पर नाचते रहे। देवताओं के गुरों का नृत्य भी महोत्सव का मुख्य आकर्षण रहा। रात भर चले जागरा महोत्सव को देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग मौजूद रहे।
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देशमोलिया देवता के बजीर सुरेंद्र पुनाटू ने बताया कि हर वर्ष जागरा महोत्सव पारंपरिक ढंग से मनाया जाता है। देवता महाराज बनाड़ व देवता देशमोलिया के जागरे में शराचली सहित जुब्बल के दर्जनों गांव के लोग अभिनंदन करने के लिए पहुंचते हैं।
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