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Rampur Bushahar News: सराहन में घरेलू गौरैया और रसेट गौरैया की हुई पहचान
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सराहन स्थित एसएसबी केंद्र में जवानों को पक्षी गणना को लेकर किया जा रहा जागरूक। स्रोत : एसएसबी
सराहन में पक्षियों की खूबियां, प्रजातियां और संरक्षण पर किया मंथन
. चार दिवसीय प्रशिक्षण शिविर शुरू
सराहन में पक्षियों की खूबियां, प्रजातियां और संरक्षण पर किया मंथन
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर।
अतिरिक्त प्रशिक्षण केंद्र सशस्त्र सीमा बल सराहन ने पक्षी वैज्ञानिक डॉ. रजत भार्गव की अध्यक्षता में पक्षी गणना कार्यक्रम के तहत चार दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ किया। पहले दिन 2 अधिकारियों समेत 90 जवानों ने भाग लिया। डॉ. रजत भार्गव ने पक्षियों को कैसे पहचाना जाए, उनमें क्या-क्या खूबियां और विभिन्नताएं हैं, कैसे पता लगाया जाए और कौन सी प्रजाति के हैं, इसके बारे में जानकारी दी। अतिरिक्त प्रशिक्षण केंद्र सराहन के कमान अधिकारी प्रवीण कुमार ने कहा कि हमारे कैंपस एरिया में कालिज तीतर अक्सर देखा जाता है और बहुत ही आजादी से घूमता है। पक्षियों के संरक्षण और प्राकृतिक वास का हमारे कैंपस में विशेष ध्यान रखा जाता है। अतिरिक्त प्रशिक्षण केंद्र सराहन के सहायक कमांडेंट शेर सिंह ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें पहली बार पता लगा कि 2 तरह की गौरैया, घरेलू गौरैया और रसेट गौरैया उनके कैंपस में पाई जाती हैं। डॉ. रजत भार्गव ने सभी जवानों से इस मुहिम से जुड़ने को कहा, ताकि पक्षियों का बेहतर संरक्षण हो सके। कमान अधिकारी और जवानों ने भरोसा दिलाया कि वे पक्षियों के संरक्षण और इस मुहिम में बेहतर योगदान देंगे। हर साल फरवरी में चार दिनों के लिए दुनियाभर के पक्षी प्रेमी, पक्षियों के प्यार के लिए और उनकी गणना के लिए एकजुट होते हैं। इससे वैज्ञानिकों को पक्षियों के सालाना माइग्रेशन से पहले दुनियाभर में पक्षियों की आबादी की गणना और उन्हें बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलती है। इसी कड़ी में इस साल भारत में पक्षी गणना कार्यक्रम 13 से 16 फरवरी तक रखा गया है।
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. चार दिवसीय प्रशिक्षण शिविर शुरू
सराहन में पक्षियों की खूबियां, प्रजातियां और संरक्षण पर किया मंथन
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर।
अतिरिक्त प्रशिक्षण केंद्र सशस्त्र सीमा बल सराहन ने पक्षी वैज्ञानिक डॉ. रजत भार्गव की अध्यक्षता में पक्षी गणना कार्यक्रम के तहत चार दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ किया। पहले दिन 2 अधिकारियों समेत 90 जवानों ने भाग लिया। डॉ. रजत भार्गव ने पक्षियों को कैसे पहचाना जाए, उनमें क्या-क्या खूबियां और विभिन्नताएं हैं, कैसे पता लगाया जाए और कौन सी प्रजाति के हैं, इसके बारे में जानकारी दी। अतिरिक्त प्रशिक्षण केंद्र सराहन के कमान अधिकारी प्रवीण कुमार ने कहा कि हमारे कैंपस एरिया में कालिज तीतर अक्सर देखा जाता है और बहुत ही आजादी से घूमता है। पक्षियों के संरक्षण और प्राकृतिक वास का हमारे कैंपस में विशेष ध्यान रखा जाता है। अतिरिक्त प्रशिक्षण केंद्र सराहन के सहायक कमांडेंट शेर सिंह ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें पहली बार पता लगा कि 2 तरह की गौरैया, घरेलू गौरैया और रसेट गौरैया उनके कैंपस में पाई जाती हैं। डॉ. रजत भार्गव ने सभी जवानों से इस मुहिम से जुड़ने को कहा, ताकि पक्षियों का बेहतर संरक्षण हो सके। कमान अधिकारी और जवानों ने भरोसा दिलाया कि वे पक्षियों के संरक्षण और इस मुहिम में बेहतर योगदान देंगे। हर साल फरवरी में चार दिनों के लिए दुनियाभर के पक्षी प्रेमी, पक्षियों के प्यार के लिए और उनकी गणना के लिए एकजुट होते हैं। इससे वैज्ञानिकों को पक्षियों के सालाना माइग्रेशन से पहले दुनियाभर में पक्षियों की आबादी की गणना और उन्हें बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलती है। इसी कड़ी में इस साल भारत में पक्षी गणना कार्यक्रम 13 से 16 फरवरी तक रखा गया है।