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जनजातीय जिले में फार्मासिस्टों के डेढ़ दर्जन पद खाली
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रिकांगपिओ(किन्नौर)। समूचा देश आज कोविड-19 कोरोना संक्रमण से जूझ रहा है। वहीं जनजातीय जिला किन्नौर के दूरदराज क्षेत्रों में सरकार की लापरवाही ग्रामीणों पर भारी पड़ रही है। जिले की 65 पंचायतों में आयुर्वेदिक स्वास्थ्य सुविधाएं चरमरा गई हैं।
गौर हो कि प्रदेश भर में हाल ही में सरकार ने 61 आयुर्वेदिक फार्मासिस्टों की नियुक्तियां की हैं, लेकिन किन्नौर जिले में 18 आयुर्वेदिक फार्मासिस्टों के पद बीते कई वर्षों से रिक्त पड़े हैं। बात भाजपा की हो या फिर कांग्रेस की दोनों ही सरकारों ने किन्नौर जिले के लोगों की अनदेखी की है। जिले के कई गांवों में तो आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्रों में ताले जड़ दिए गए हैं। जिले भर में 30 पद में से 18 फार्मासिस्ट के पद रिक्त पड़े हैं। आयुर्वेद निदेशालय के आदेशानुसार हाल ही कि कांगड़ा में 23, मंडी में 10, हमीरपुर में 7, बिलासपुर में 5, चंबा 4, शिमला, सिरमौर और ऊना में 3, कुल्लू 2 और सोलन जिले में एक आयुर्वेदिक फार्मासिस्ट की नियुक्तियां की गई हैं। सिर्फ किन्नौर और लाहौल-स्पीति जिले में एक भी पद नहीं भरा गया।
रारंग पंचायत प्रधान रेखा देवी ने कहा कि रारंग आयुर्वेद केंद्र में कोई कर्मचारी नहीं है। वहीं थेमगारंग पंचायत प्रधान भगत चंद और उपप्रधान चंद्र किशोर ने बताया कि उनकी पंचायत का स्वास्थ्य केंद्र चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के हवाले चल रहा है। वर्तमान में जिला आयुर्वेदिक अस्पताल रिकांगपिओ, स्वास्थ्य केंद्र आसरंग, बारंग, चारंग, चगांव, घरशू, जानी, कंधार, कटगांव, निगुलसरी, पांगी, पूर्वणी, रोघी, रामनी, रारंग, रिब्बा, शिगारचा और थंगरंग में फार्मासिस्ट के पद वर्षों से रिक्त पड़े हैं। जिले के सुमन नेगी, शंकर नेगी, आशुतोष नेगी, सूर्या नेगी, शकुंतला देवी, राम सिंह नेगी, बलदेव सिंह सहित अन्य लोगों ने प्रदेश सरकार और आयुर्वेदिक विभाग से शीघ्र से शीघ्र रिक्त पदों को भरने की मांग की है।
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विधायक जगत सिंह नेगी ने कहा कि भाजपा के सत्ता में आते ही जनजातीय क्षेत्रों से सौतेला व्यवहार किया जाता है। जनजातीय जिले में फार्मासिस्ट के 18 रिक्त पद सरकार की नाकामी को दर्शा रहे हैं।
उधर, किन्नौर जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. पवन कुमार ने कहा कि रिक्त पदों को लेकर सरकार को हर माह सूचित किया जाता है।
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गौर हो कि प्रदेश भर में हाल ही में सरकार ने 61 आयुर्वेदिक फार्मासिस्टों की नियुक्तियां की हैं, लेकिन किन्नौर जिले में 18 आयुर्वेदिक फार्मासिस्टों के पद बीते कई वर्षों से रिक्त पड़े हैं। बात भाजपा की हो या फिर कांग्रेस की दोनों ही सरकारों ने किन्नौर जिले के लोगों की अनदेखी की है। जिले के कई गांवों में तो आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्रों में ताले जड़ दिए गए हैं। जिले भर में 30 पद में से 18 फार्मासिस्ट के पद रिक्त पड़े हैं। आयुर्वेद निदेशालय के आदेशानुसार हाल ही कि कांगड़ा में 23, मंडी में 10, हमीरपुर में 7, बिलासपुर में 5, चंबा 4, शिमला, सिरमौर और ऊना में 3, कुल्लू 2 और सोलन जिले में एक आयुर्वेदिक फार्मासिस्ट की नियुक्तियां की गई हैं। सिर्फ किन्नौर और लाहौल-स्पीति जिले में एक भी पद नहीं भरा गया।
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रारंग पंचायत प्रधान रेखा देवी ने कहा कि रारंग आयुर्वेद केंद्र में कोई कर्मचारी नहीं है। वहीं थेमगारंग पंचायत प्रधान भगत चंद और उपप्रधान चंद्र किशोर ने बताया कि उनकी पंचायत का स्वास्थ्य केंद्र चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के हवाले चल रहा है। वर्तमान में जिला आयुर्वेदिक अस्पताल रिकांगपिओ, स्वास्थ्य केंद्र आसरंग, बारंग, चारंग, चगांव, घरशू, जानी, कंधार, कटगांव, निगुलसरी, पांगी, पूर्वणी, रोघी, रामनी, रारंग, रिब्बा, शिगारचा और थंगरंग में फार्मासिस्ट के पद वर्षों से रिक्त पड़े हैं। जिले के सुमन नेगी, शंकर नेगी, आशुतोष नेगी, सूर्या नेगी, शकुंतला देवी, राम सिंह नेगी, बलदेव सिंह सहित अन्य लोगों ने प्रदेश सरकार और आयुर्वेदिक विभाग से शीघ्र से शीघ्र रिक्त पदों को भरने की मांग की है।
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विधायक जगत सिंह नेगी ने कहा कि भाजपा के सत्ता में आते ही जनजातीय क्षेत्रों से सौतेला व्यवहार किया जाता है। जनजातीय जिले में फार्मासिस्ट के 18 रिक्त पद सरकार की नाकामी को दर्शा रहे हैं।
उधर, किन्नौर जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. पवन कुमार ने कहा कि रिक्त पदों को लेकर सरकार को हर माह सूचित किया जाता है।