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Rampur Bushahar News: सेब का बगीचा बनाने से पहले करवाएं मिट्टी की जांच
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बागवानी विकास अधिकारी ने बागवानों के लिए जानकारी की साझा
संवाद न्यूज एजेंसी
चौपाल (रोहड़ू)। बगीचे में नए पौधे लगाने के लिए मार्च तक का समय अनुकूल है। बागवानी विकास अधिकारी चौपाल श्याम शर्मा ने बताया कि सेब का नया बगीचा तैयार करने के लिए सबसे पहले उपयुक्त भूमि और स्थान का चयन करना बहुत जरूरी है। सफल बगीचा तैयार करने के लिए सबसे पहले ऐसे स्थान का चयन करना चाहिए, जहां पाला कम पड़ता हो । साथ ही पौधों की बढ़ोतरी एवं गुणकारी उत्पादन के लिए मिट्टी का पीएच 05.8-6.2 तक और मिट्टी रेतीली दोमट से ब्लुई दोमट और उपजाऊ होनी चाहिए। बगीचे की रूपरेखा बनाने से पहले क्षेत्र की मिट्टी की जांच करवाना अनिवार्य है। बगीचा ऐसे लगाया जाना चाहिए, जिससे पौधे का पूर्ण विकास हो और उत्पादन क्षमता बढ़ सके। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि आयु के साथ पेड़ों के फैलने के लिए उचित स्थान, प्रकाश और वायु मिले। पौधों की शाखाएं आपस में न उलझें। पौधरोपण के पश्चात इसके आसपास की मिट्टी पैर से दबा दें, ताकि पौधा की मिट्टी जड़ों के साथ ठीक से बैठ जाए। कीट और रोग से बचाव के लिए गड्ढे में मिट्टी भरते समय क्लोरपाइरीफोस 20 ईसी या तेल का घोल दस लीटर का घोल प्रति गड्ढा मिट्टी में मिलाएं। गली-सड़ी गोबर की खाद 30 किलोग्राम और 500 ग्राम सुपर फास्फेट मिट्टी के साथ मिक्स करें। नए पौधरोपण के बाद भी समय-समय पर विशेषज्ञों की राय जरूर लेते रहें।
एक महीना पहले तैयार करें गड्ढा
श्याम शर्मा ने कहा कि सफल बगीचे के लिए पौधों का चयन भी बहुत जरूरी है । पौधे स्वस्थ और रोगरहित होने चाहिए। इसके लिए पंजीकृत पौधशालाओं, बागवानी विभाग और बागवानी विश्वविद्यालय से ही पौधों की खरीदारी करनी चाहिए। इसके अलावा पौधों में की जाने वाली कलम का जोड़ भूमि से लगभग 25 -30 सेमी ऊंचा होना चाहिए। नए पौधे लगाने के लिए गड्ढा एक महीने पहले तैयार कर लेना चाहिए। गड्ढे की मिट्टी को 10-12 दिन तक खुला रहने दें, ताकि धूप लगने से जीवाणु तथा कीड़े नष्ट हो जाएं। सामान्य तौर पर एक घन मीटर आकार का गड्ढा तैयार कर पौधे को गड्ढे के ठीक मध्य में तथा उतनी ही ऊंचाई पर लगाएं, जितना वह पौधशाला में लगा था। श्याम शर्मा ने बागवानों से आग्रह किया है कि बिना पंजीकृत नर्सरी से पौधे न खरीदें एवं बिना पंजीकृत नर्सरी, पौधों को सड़क के किनारे या बाजार में बेचने वाले लोगों की सूचना नजदीकी उद्यान अधिकारी को दें ।
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संवाद न्यूज एजेंसी
चौपाल (रोहड़ू)। बगीचे में नए पौधे लगाने के लिए मार्च तक का समय अनुकूल है। बागवानी विकास अधिकारी चौपाल श्याम शर्मा ने बताया कि सेब का नया बगीचा तैयार करने के लिए सबसे पहले उपयुक्त भूमि और स्थान का चयन करना बहुत जरूरी है। सफल बगीचा तैयार करने के लिए सबसे पहले ऐसे स्थान का चयन करना चाहिए, जहां पाला कम पड़ता हो । साथ ही पौधों की बढ़ोतरी एवं गुणकारी उत्पादन के लिए मिट्टी का पीएच 05.8-6.2 तक और मिट्टी रेतीली दोमट से ब्लुई दोमट और उपजाऊ होनी चाहिए। बगीचे की रूपरेखा बनाने से पहले क्षेत्र की मिट्टी की जांच करवाना अनिवार्य है। बगीचा ऐसे लगाया जाना चाहिए, जिससे पौधे का पूर्ण विकास हो और उत्पादन क्षमता बढ़ सके। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि आयु के साथ पेड़ों के फैलने के लिए उचित स्थान, प्रकाश और वायु मिले। पौधों की शाखाएं आपस में न उलझें। पौधरोपण के पश्चात इसके आसपास की मिट्टी पैर से दबा दें, ताकि पौधा की मिट्टी जड़ों के साथ ठीक से बैठ जाए। कीट और रोग से बचाव के लिए गड्ढे में मिट्टी भरते समय क्लोरपाइरीफोस 20 ईसी या तेल का घोल दस लीटर का घोल प्रति गड्ढा मिट्टी में मिलाएं। गली-सड़ी गोबर की खाद 30 किलोग्राम और 500 ग्राम सुपर फास्फेट मिट्टी के साथ मिक्स करें। नए पौधरोपण के बाद भी समय-समय पर विशेषज्ञों की राय जरूर लेते रहें।
एक महीना पहले तैयार करें गड्ढा
श्याम शर्मा ने कहा कि सफल बगीचे के लिए पौधों का चयन भी बहुत जरूरी है । पौधे स्वस्थ और रोगरहित होने चाहिए। इसके लिए पंजीकृत पौधशालाओं, बागवानी विभाग और बागवानी विश्वविद्यालय से ही पौधों की खरीदारी करनी चाहिए। इसके अलावा पौधों में की जाने वाली कलम का जोड़ भूमि से लगभग 25 -30 सेमी ऊंचा होना चाहिए। नए पौधे लगाने के लिए गड्ढा एक महीने पहले तैयार कर लेना चाहिए। गड्ढे की मिट्टी को 10-12 दिन तक खुला रहने दें, ताकि धूप लगने से जीवाणु तथा कीड़े नष्ट हो जाएं। सामान्य तौर पर एक घन मीटर आकार का गड्ढा तैयार कर पौधे को गड्ढे के ठीक मध्य में तथा उतनी ही ऊंचाई पर लगाएं, जितना वह पौधशाला में लगा था। श्याम शर्मा ने बागवानों से आग्रह किया है कि बिना पंजीकृत नर्सरी से पौधे न खरीदें एवं बिना पंजीकृत नर्सरी, पौधों को सड़क के किनारे या बाजार में बेचने वाले लोगों की सूचना नजदीकी उद्यान अधिकारी को दें ।
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