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Rampur Bushahar News: पाटबंगला मैदान में अश्व प्रदर्शनी 1 से 3 नवंबर तक
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गुब्बारा फोड़ प्रतियोगिता और 400, 800 मीटर रोमांचक घुड़दौड़ रहेगी आकर्षण
लवी मेले से पहले पशुपालन विभाग करेगा आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। अंतरराष्ट्रीय लवी मेले के उपलक्ष्य पर रामपुर के पाटबंगला मैदान में अश्व प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। यह प्रदर्शनी 1 से 3 नवंबर तक चलेगी। इसमें कुल्लू, मंडी, उत्तराखंड सहित विभिन्न क्षेत्रों से खरीदार और अश्वपालक भाग लेंगे।
पशु चिकित्सा अधिकारी रामपुर डॉ. अनिल शर्मा ने बताया कि प्राचीन काल से अंतरराष्ट्रीय लवी मेला व्यापारिक दृष्टि से ऐतिहासिक रहा है। इसमें रोजमर्रा के सामानों के साथ-साथ पशुओं का भी व्यापार किया जाता है। उन्होंने बताया कि स्पीति नस्ल के घोड़े अपनी ठोस बनावट, मजबूत कद-काठी, भारी बर्फ में चलने की क्षमता और ऊंचाई वाले इलाकों में कार्य करने के गुणों के कारण विशेष पहचान रखते हैं। इस नस्ल की उत्पत्ति तिब्बत के पठारों में बताई जाती है, जिसे बाद में व्यापारी लाहौल-स्पीति और किन्नौर के दुर्गम क्षेत्रों में लेकर आए। वर्तमान में ये घोड़े मुख्य रूप से स्पीति घाटी की पिन वैली और किन्नौर की भावा वैली में पाए जाते हैं।
पशुपालन विभाग की ओर से प्रदर्शनी में उत्तम अश्वों का चयन किया जाएगा, ताकि अश्वपालकों को प्रोत्साहित किया जा सके। 1 नवंबर को अश्वों का पंजीकरण किया जाएगा, 2 नवंबर को अश्वपालकों की गोष्ठी आयोजित होगी, जबकि 3 नवंबर को उत्तम अश्व चयन, गुब्बारा फोड़ प्रतियोगिता और 400 व 800 मीटर की रोमांचक घुड़दौड़ का आयोजन होगा। विजेताओं को मुख्य अतिथि की ओर से सम्मानित किया जाएगा।
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इस प्रदर्शनी में भाग लेने वाले सभी अश्वों के लिए पशुपालन विभाग की ओर से निशुल्क चारा और दाना भी उपलब्ध कराया जाएगा।
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लवी मेले से पहले पशुपालन विभाग करेगा आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। अंतरराष्ट्रीय लवी मेले के उपलक्ष्य पर रामपुर के पाटबंगला मैदान में अश्व प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। यह प्रदर्शनी 1 से 3 नवंबर तक चलेगी। इसमें कुल्लू, मंडी, उत्तराखंड सहित विभिन्न क्षेत्रों से खरीदार और अश्वपालक भाग लेंगे।
पशु चिकित्सा अधिकारी रामपुर डॉ. अनिल शर्मा ने बताया कि प्राचीन काल से अंतरराष्ट्रीय लवी मेला व्यापारिक दृष्टि से ऐतिहासिक रहा है। इसमें रोजमर्रा के सामानों के साथ-साथ पशुओं का भी व्यापार किया जाता है। उन्होंने बताया कि स्पीति नस्ल के घोड़े अपनी ठोस बनावट, मजबूत कद-काठी, भारी बर्फ में चलने की क्षमता और ऊंचाई वाले इलाकों में कार्य करने के गुणों के कारण विशेष पहचान रखते हैं। इस नस्ल की उत्पत्ति तिब्बत के पठारों में बताई जाती है, जिसे बाद में व्यापारी लाहौल-स्पीति और किन्नौर के दुर्गम क्षेत्रों में लेकर आए। वर्तमान में ये घोड़े मुख्य रूप से स्पीति घाटी की पिन वैली और किन्नौर की भावा वैली में पाए जाते हैं।
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पशुपालन विभाग की ओर से प्रदर्शनी में उत्तम अश्वों का चयन किया जाएगा, ताकि अश्वपालकों को प्रोत्साहित किया जा सके। 1 नवंबर को अश्वों का पंजीकरण किया जाएगा, 2 नवंबर को अश्वपालकों की गोष्ठी आयोजित होगी, जबकि 3 नवंबर को उत्तम अश्व चयन, गुब्बारा फोड़ प्रतियोगिता और 400 व 800 मीटर की रोमांचक घुड़दौड़ का आयोजन होगा। विजेताओं को मुख्य अतिथि की ओर से सम्मानित किया जाएगा।
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इस प्रदर्शनी में भाग लेने वाले सभी अश्वों के लिए पशुपालन विभाग की ओर से निशुल्क चारा और दाना भी उपलब्ध कराया जाएगा।