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हिमाचल प्रदेश: उल्लेखनीय कार्य के लिए 5 को गौरव, 8 को प्रेरणा स्रोत और दो को सिविल सेवा पुरस्कार
Thu, 16 Apr 2026 10:20 AM IST
Ankesh Dogra
संवाद न्यूज एजेंसी, रिकांगपिओ (किन्नौर)।
संवाद न्यूज एजेंसी, रिकांगपिओ (किन्नौर)।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Thu, 16 Apr 2026 10:20 AM IST
सार
हिमाचल दिवस पर उल्लेखनीय कार्यों के लिए 15 विभूतियों को राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। पढ़ें पूरी खबर...
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डीसी अपूर्व देवगन, स्नेहलता, डाॅ. बृज शर्मा, चारू शर्मा
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
हिमाचल दिवस पर राज्य स्तरीय कार्यक्रम में अलग-अलग क्षेत्र में प्रदेश का नाम रोशन करने और उल्लेखनीय कार्यों के लिए 15 विभूतियों को राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इनमें पांच को हिमाचल गौरव पुरस्कार, दो सिविल सर्विसेज अवॉर्ड और आठ को प्रेरणा स्रोत सम्मान दिया गया। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने यह पुस्कार दिए।
समारोह में बिलासपुर के बरठीं के कंडयाणा गांव के पद्मश्री पुरस्कार से अलंकृत प्रेमलाल गौतम, हमीरपुर के डांगरी गांव के डॉ. ओपी शर्मा, अटल सुपर स्पेशलिटी आयुर्विज्ञान संस्थान चमियाना (शिमला) के प्राचार्य डॉ. बृज शर्मा, शिमला की हरलीन कौर और बिलासपुर की घुमारवीं तहसील के बछरीन गांव की हैंडबाल कोच स्नेहलता को व्यक्तिगत श्रेणी में हिमाचल गौरव पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन और उप मंडलाधिकारी (नागरिक) बल्ह स्मृतिका नेगी को व्यक्तिगत श्रेणी में सिविल सर्विसिस अवाॅर्ड दिया गया।
शिमला के भोंट की चारू शर्मा और किन्नौर के यंगथंग तहसील के चांगो गांव की छोनजिन ऐंग्मो को व्यक्गित श्रेणी में प्रेरणा स्रोत सम्मान दिया गया। इसके अलावा विश्व विजेता भारतीय महिला कबड्डी टीम की सदस्य सिरमौर की शिलाई तहसील के शरोग गांव की रितु नेगी, धकौली गांव की साक्षी शर्मा, मेलाह टेक गांव की पुष्पा राणा, मंडी जिले के बेला गांव की भावना देवी और चंबा के बघाईगढ़ गांव की चंपा ठाकुर को ग्रुप श्रेणी में प्रेरणा स्रोत सम्मान से पुरस्कृत किया गया। चमियाना अस्पताल के यूरोलॉजी विभाग को भी प्रेरणा स्रोत सम्मान दिया गया। सीएम ने भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड के 9 लाभार्थियों को पहली किश्त के रूप में एक-एक लाख के चेक भी प्रदान किए। यह राशि विधवाओं, एकल महिलाओं को घर बनाने के लिए प्रदान की है। 24 परिवारों को एफआरए के तहत भूमि के पट्टे भी प्रदान किए।
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समारोह में बिलासपुर के बरठीं के कंडयाणा गांव के पद्मश्री पुरस्कार से अलंकृत प्रेमलाल गौतम, हमीरपुर के डांगरी गांव के डॉ. ओपी शर्मा, अटल सुपर स्पेशलिटी आयुर्विज्ञान संस्थान चमियाना (शिमला) के प्राचार्य डॉ. बृज शर्मा, शिमला की हरलीन कौर और बिलासपुर की घुमारवीं तहसील के बछरीन गांव की हैंडबाल कोच स्नेहलता को व्यक्तिगत श्रेणी में हिमाचल गौरव पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन और उप मंडलाधिकारी (नागरिक) बल्ह स्मृतिका नेगी को व्यक्तिगत श्रेणी में सिविल सर्विसिस अवाॅर्ड दिया गया।
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शिमला के भोंट की चारू शर्मा और किन्नौर के यंगथंग तहसील के चांगो गांव की छोनजिन ऐंग्मो को व्यक्गित श्रेणी में प्रेरणा स्रोत सम्मान दिया गया। इसके अलावा विश्व विजेता भारतीय महिला कबड्डी टीम की सदस्य सिरमौर की शिलाई तहसील के शरोग गांव की रितु नेगी, धकौली गांव की साक्षी शर्मा, मेलाह टेक गांव की पुष्पा राणा, मंडी जिले के बेला गांव की भावना देवी और चंबा के बघाईगढ़ गांव की चंपा ठाकुर को ग्रुप श्रेणी में प्रेरणा स्रोत सम्मान से पुरस्कृत किया गया। चमियाना अस्पताल के यूरोलॉजी विभाग को भी प्रेरणा स्रोत सम्मान दिया गया। सीएम ने भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड के 9 लाभार्थियों को पहली किश्त के रूप में एक-एक लाख के चेक भी प्रदान किए। यह राशि विधवाओं, एकल महिलाओं को घर बनाने के लिए प्रदान की है। 24 परिवारों को एफआरए के तहत भूमि के पट्टे भी प्रदान किए।
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मेडिकल कॉलेजों में पीजी के 314 पद भरने की प्रक्रिया शुरू
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुल्लू, ऊना, नाहन, बिलासपुर धर्मशाला के जिला अस्पतालों में एमआईआर मशीनें लगेंगी। चंबा, नाहन और बिलासपुर अस्पताल में मेमो ग्राफी मशीन लगाई जाएगी। सभी मेडिकल कॉलेजों में पीजी के 314 पद भरने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। टांडा में पैट स्कैन और हमीरपुर मेडिकल कॉलेज में रोबोटिक सर्जरी की सुविधा जल्द शुरू होगी। प्रदेश में एडवांस ऑटो लैब शुरू करेंगे, जिसमें एक ही ब्लड सैंपल से कई टेस्ट होंगे। प्रत्येक विधानसभा में डे बोर्डिंग स्कूल खोले जा रहे हैं। पहला डे बोर्डिंग स्कूल रिकांगपिओ में छह माह बाद शुरू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि 12 लाख की सालाना आय वाले परिवार बच्चों की पढ़ाई के लिए विद्यार्थी ऋण योजना के तहत एक प्रतिशत ब्याज पर 20 लाख लोन ले सकते हैं। हिमाचल में देश की पहली बागवानी नीति लागू की जा रही है, जिससे लगभग 82,200 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुल्लू, ऊना, नाहन, बिलासपुर धर्मशाला के जिला अस्पतालों में एमआईआर मशीनें लगेंगी। चंबा, नाहन और बिलासपुर अस्पताल में मेमो ग्राफी मशीन लगाई जाएगी। सभी मेडिकल कॉलेजों में पीजी के 314 पद भरने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। टांडा में पैट स्कैन और हमीरपुर मेडिकल कॉलेज में रोबोटिक सर्जरी की सुविधा जल्द शुरू होगी। प्रदेश में एडवांस ऑटो लैब शुरू करेंगे, जिसमें एक ही ब्लड सैंपल से कई टेस्ट होंगे। प्रत्येक विधानसभा में डे बोर्डिंग स्कूल खोले जा रहे हैं। पहला डे बोर्डिंग स्कूल रिकांगपिओ में छह माह बाद शुरू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि 12 लाख की सालाना आय वाले परिवार बच्चों की पढ़ाई के लिए विद्यार्थी ऋण योजना के तहत एक प्रतिशत ब्याज पर 20 लाख लोन ले सकते हैं। हिमाचल में देश की पहली बागवानी नीति लागू की जा रही है, जिससे लगभग 82,200 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है।
केंद्र सरकार ने बदला मनरेगा का स्वरूप, गांवों का विकास होगा प्रभावित : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि केंद्र सरकार ने मनरेगा के मूल स्वरूप को बदल दिया है। इससे प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों का विकास प्रभावित होगा। पहले योजना मांग आधारित थी। अब केंद्र सरकार निश्चित बजट ही जारी करेगी। उन्होंने कहा कि केंद्र की ओर से राजस्व घाटा अनुदान बंद कर दिए जाने से प्रदेश को प्रति वर्ष 8 हजार से 10 हजार करोड़ रुपये का घाटा हो रहा है। अनुदान बंद होने के परिणामस्वरूप सरकार को वित्तीय अनुशासन अपनाना पड़ा है।
रिकांगपिओ में हिमाचल दिवस पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने दोहराया कि व्यवस्था परिवर्तन के माध्यम से हिमाचल वर्ष 2027 तक आत्मनिर्भर और 2032 तक देश का सबसे समृद्ध प्रदेश बनने की ओर कदम बढ़ा रहा है। राज्य सरकार ने अपनी सभी 10 गारंटियां पूरी की हैं। प्रदेश अभी गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। पिछली सरकार ने विरासत में 76, 657 करोड़ का कर्ज और कर्मचारियों की देनदारी के रूप में 10 हजार का भुगतान छोड़ा था। इस चुनौती को पार किया जा रहा है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है। मछली पालन करने वाले किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य देने का निर्णय लिया है।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि केंद्र सरकार ने मनरेगा के मूल स्वरूप को बदल दिया है। इससे प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों का विकास प्रभावित होगा। पहले योजना मांग आधारित थी। अब केंद्र सरकार निश्चित बजट ही जारी करेगी। उन्होंने कहा कि केंद्र की ओर से राजस्व घाटा अनुदान बंद कर दिए जाने से प्रदेश को प्रति वर्ष 8 हजार से 10 हजार करोड़ रुपये का घाटा हो रहा है। अनुदान बंद होने के परिणामस्वरूप सरकार को वित्तीय अनुशासन अपनाना पड़ा है।
रिकांगपिओ में हिमाचल दिवस पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने दोहराया कि व्यवस्था परिवर्तन के माध्यम से हिमाचल वर्ष 2027 तक आत्मनिर्भर और 2032 तक देश का सबसे समृद्ध प्रदेश बनने की ओर कदम बढ़ा रहा है। राज्य सरकार ने अपनी सभी 10 गारंटियां पूरी की हैं। प्रदेश अभी गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। पिछली सरकार ने विरासत में 76, 657 करोड़ का कर्ज और कर्मचारियों की देनदारी के रूप में 10 हजार का भुगतान छोड़ा था। इस चुनौती को पार किया जा रहा है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है। मछली पालन करने वाले किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य देने का निर्णय लिया है।