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आसमान से बरसी चांदी, सोना उगलेगी बागवानी
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शिमला जिला के 12/20 वैली के चिकसा मझाली में बर्फ से लकदक सेब के पेड़। संवाद
- फोटो : RAMPUR-HP
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रामपुर बुशहर। जनवरी महीने में आसमान से बरसी चांदी बागवानी के लिए संजीवनी से कम नहीं है। इससे सेब की बंपर फसल होने की संभावनाएं बढ़ गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक बर्फबारी से सेब के लिए जरूरी चिलिंग आवर्स लगभग पूरे हो गए हैं। इससे इस साल चार से पांच हजार करोड़ रुपये के उत्पादन हो सकता है। ऊंचाई और मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में लगातार बर्फबारी और निचले क्षेत्रों में झमाझम बारिश होने से सूबे के बागवान गदगद हैं।
शिमला, आउटर सराज और किन्नौर जिले के ऊंचे और मध्यम ऊंचाई क्षेत्रों में ताजा बर्फबारी के बाद सफेदी बिखर गई है। पहाड़ और सेब के बगीचे बर्फबारी से सराबोर होने से बागवानों के चेहरे खिल उठे हैं। शुक्रवार रात से ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी और निचले क्षेत्रों में बारिश होने से सेब के लिए आवश्यक करीब 1400 घंटे चिलिंग आवर्स लगभग पूरे हो गए हैं।
पहाड़ों और बगीचों में सफेद चंादी बिखरने से आगामी सेब सीजन में सेब की बंपर फसल उत्पादन होने की बागवानों को आस जग गई है। वहीं निचले क्षेत्रों में बारिश से पलम, चेरी, किवी, आड़ू और खुमानी सहित अन्य फसलों का उत्पादन भी अच्छा होगा। बर्फबारी और बारिश होने से जहां सेब के पेड़ों पर कीटों के हमलों और बीमारियों से काफी हद तक निजात मिलेगी, वहीं सेब फसल की गुणवत्ता भी बढ़ेगी।
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प्रगतिशील बागवान सुनील चौहान, रोहित कायथ, ललित कायथ, रोहित मेहता, इंद्रजीत कायथ, प्रेमराज, राधा कृष्ण, सनम, अनिल नेगी, दयाल सिंह, देवेंद्र सिंह, विजय राज चौहान, रोनी चौहान, और हरि सिंहह नेगी सहित अन्य बागवानों ने कहा कि ताजा बर्फबारी और बारिश से आगामी सेब सीजन में बंपर सेब फसल पैदावार होने की उम्मीद है। पहाड़ बर्फ से लकदक होने और निचले क्षेत्रों में झमाझम बारिश के बाद किसान-बागवानों ने राहत की सांस ली है। इससे लंबे समय तक जमीन में पर्याप्त नमी रहेगी और अच्छी फसल होने का अनुमान है।
बागवानी विशेषज्ञ रंजीत ठाकुर ने कहा कि सेब की बंपर फसल के लिए 1200 से 1400 चिलिंग आवर्स की जरूरत रहती है। ताजा बर्फबारी और बारिश सेब सहित अन्य फसलों के लिए काफी लाभदायक है। आगामी सीजन में सेब की बंपर फसल होने का उम्मीद है। सेब के लिए आवश्यक चिलिंग आवर्स लगभग पूरे होने वाले हैं।
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शिमला, आउटर सराज और किन्नौर जिले के ऊंचे और मध्यम ऊंचाई क्षेत्रों में ताजा बर्फबारी के बाद सफेदी बिखर गई है। पहाड़ और सेब के बगीचे बर्फबारी से सराबोर होने से बागवानों के चेहरे खिल उठे हैं। शुक्रवार रात से ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी और निचले क्षेत्रों में बारिश होने से सेब के लिए आवश्यक करीब 1400 घंटे चिलिंग आवर्स लगभग पूरे हो गए हैं।
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पहाड़ों और बगीचों में सफेद चंादी बिखरने से आगामी सेब सीजन में सेब की बंपर फसल उत्पादन होने की बागवानों को आस जग गई है। वहीं निचले क्षेत्रों में बारिश से पलम, चेरी, किवी, आड़ू और खुमानी सहित अन्य फसलों का उत्पादन भी अच्छा होगा। बर्फबारी और बारिश होने से जहां सेब के पेड़ों पर कीटों के हमलों और बीमारियों से काफी हद तक निजात मिलेगी, वहीं सेब फसल की गुणवत्ता भी बढ़ेगी।
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प्रगतिशील बागवान सुनील चौहान, रोहित कायथ, ललित कायथ, रोहित मेहता, इंद्रजीत कायथ, प्रेमराज, राधा कृष्ण, सनम, अनिल नेगी, दयाल सिंह, देवेंद्र सिंह, विजय राज चौहान, रोनी चौहान, और हरि सिंहह नेगी सहित अन्य बागवानों ने कहा कि ताजा बर्फबारी और बारिश से आगामी सेब सीजन में बंपर सेब फसल पैदावार होने की उम्मीद है। पहाड़ बर्फ से लकदक होने और निचले क्षेत्रों में झमाझम बारिश के बाद किसान-बागवानों ने राहत की सांस ली है। इससे लंबे समय तक जमीन में पर्याप्त नमी रहेगी और अच्छी फसल होने का अनुमान है।
बागवानी विशेषज्ञ रंजीत ठाकुर ने कहा कि सेब की बंपर फसल के लिए 1200 से 1400 चिलिंग आवर्स की जरूरत रहती है। ताजा बर्फबारी और बारिश सेब सहित अन्य फसलों के लिए काफी लाभदायक है। आगामी सीजन में सेब की बंपर फसल होने का उम्मीद है। सेब के लिए आवश्यक चिलिंग आवर्स लगभग पूरे होने वाले हैं।