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इंसेंटिव न मिलने पर बिफरीं आशा वर्कर
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रामपुर में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर बैठक करते आशा वर्कर्स।
- फोटो : RAMPUR-HP
रामपुर बुशहर। सूबे में लगातार कोरोना संक्रमण के मामलों में इजाफा हो रहा है। इन मरीजों की देखभाल का जिम्मा आशा वर्करों के कंधों पर है। आशा वर्कर अपनी जान की परवाह किए बगैर अपना फर्ज निभा रही हैं। बावजूद इसके आशा कार्यकर्ता प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी का शिकार हो रही हैं। यह बात सोमवार को रामपुर के सर्किट हाउस में आयोजित आशा वर्करों की बैठक में अध्यक्ष आशा किरण ने कही। बैठक में इंसेंटिव न मिलने का मुद्दा खूब गरमाया और वर्करों ने अपना रोष प्रकट किया।
बैठक में उन्होंने कहा कि अगस्त माह से उन्हें अभी तक इंसेंटिव नहीं मिला है। जबकि, रामपुर उपमंडल में लगातार कोविड-19 के मामले बढ़ रहे हैं, जिन्हें देखने की सबसे अधिक जिम्मेदारी आशा वर्करों के कंधों पर है लेकिन प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग आशा कार्यकर्ताओं की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। हालांकि, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सभी आशा कार्यकर्ताओं को कोविड के क्षेत्र में काम करने के लिए पहले इंसेंटिव दिया था, जिसके लिए उन्होंने उनका आभार भी जताया था। बीते अगस्त माह से आशा वर्करों को कोई इंसेंटिव नहीं मिला है। ऐसे में आशा कार्यकर्ताओं में सरकार और विभाग के प्रति भारी रोष है।
आशा किरण को सौंपी यूनियन की कमान
बैठक में नई कार्यकारिणी का गठन किया गया। इसमें सर्वसम्मति से आशा किरण को यूनियन की जिम्मेदारी सौंपी गई। रीना को उपाध्यक्ष, मीरा को सचिव और कांता को कोषाध्यक्ष चुना गया।
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सुविधाएं नहीं दीं तो कोविड मामलों से करेंगी किनारा
बैठक में नवनियुक्त अध्यक्ष आशा किरण ने कहा कि बैठक में सभी कार्यकर्ताओं ने अब कोविड के क्षेत्र में काम नहीं करने का फैसला लिया। अब रोजाना कोविड के दर्जनों मामले सामने आ रहे हैं। इसके लिए आशा वर्कर अपनी जान जोखिम में डालकर रात-दिन सेवाएं दे रही हैं। बावजूद इसके उन्हें कुछ नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि कोविड मरीजों की देखभाल के लिए उन्हें कई किलोमीटर का पैदल सफर भी करना पड़ता है, लेकिन उन्हें सुविधाएं मुहैया नहीं करवाई जा रहीं। उन्होंने चेताते हुए कहा कि कोविड के क्षेत्र में कार्य करने से अब किनारा करेंगी।
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बैठक में उन्होंने कहा कि अगस्त माह से उन्हें अभी तक इंसेंटिव नहीं मिला है। जबकि, रामपुर उपमंडल में लगातार कोविड-19 के मामले बढ़ रहे हैं, जिन्हें देखने की सबसे अधिक जिम्मेदारी आशा वर्करों के कंधों पर है लेकिन प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग आशा कार्यकर्ताओं की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। हालांकि, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सभी आशा कार्यकर्ताओं को कोविड के क्षेत्र में काम करने के लिए पहले इंसेंटिव दिया था, जिसके लिए उन्होंने उनका आभार भी जताया था। बीते अगस्त माह से आशा वर्करों को कोई इंसेंटिव नहीं मिला है। ऐसे में आशा कार्यकर्ताओं में सरकार और विभाग के प्रति भारी रोष है।
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आशा किरण को सौंपी यूनियन की कमान
बैठक में नई कार्यकारिणी का गठन किया गया। इसमें सर्वसम्मति से आशा किरण को यूनियन की जिम्मेदारी सौंपी गई। रीना को उपाध्यक्ष, मीरा को सचिव और कांता को कोषाध्यक्ष चुना गया।
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सुविधाएं नहीं दीं तो कोविड मामलों से करेंगी किनारा
बैठक में नवनियुक्त अध्यक्ष आशा किरण ने कहा कि बैठक में सभी कार्यकर्ताओं ने अब कोविड के क्षेत्र में काम नहीं करने का फैसला लिया। अब रोजाना कोविड के दर्जनों मामले सामने आ रहे हैं। इसके लिए आशा वर्कर अपनी जान जोखिम में डालकर रात-दिन सेवाएं दे रही हैं। बावजूद इसके उन्हें कुछ नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि कोविड मरीजों की देखभाल के लिए उन्हें कई किलोमीटर का पैदल सफर भी करना पड़ता है, लेकिन उन्हें सुविधाएं मुहैया नहीं करवाई जा रहीं। उन्होंने चेताते हुए कहा कि कोविड के क्षेत्र में कार्य करने से अब किनारा करेंगी।