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Rampur Bushahar News: सेब बगीचों में ग्राफ्टिंग कार्य में जुटे बागवान
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बेहतर उत्पादन के लिए परागण प्रक्रिया का अच्छा विकल्प
संवाद न्यूज एजेंसी
निरमंड (कुल्लू)। उपमंडल निरमंड के बागवान सेब बगीचों को संवारने में जुट गए हैं। सेब के बगीचों में बागवान ग्राफ्टिंग का कार्य कर रहे हैं। सेब के बेहतर उत्पादन के लिए परागण प्रक्रिया का यह अच्छा विकल्प है। इन दिनों बागवान फ्लॉवरिंग के समय मधुमक्खी के परागण प्रक्रिया के लिए पोलिनाइजर वैरायटी का ग्राफ्ट करने में जुट गए हैं। इससे बागवानों को पॉलिथीन में पोलिनाइजर गुच्छा लगाने की आवश्यकता नहीं होती है इसलिए आजकल बागवान अपने सेब बगीचे में ग्राफ्टिंग कार्य कर रहे हैं। इससे फ्लॉवरिंग के समय मधुमक्खी और अन्य मित्र मक्खियों को सेब सेटिंग करने में मदद मिलती है। मादा प्रजाति की वैरायटी को पोलिनेटर कहा जाता है। मादा वैरायटी से मधुमक्खी, तितलियां, अन्य मित्र मक्खियाें के परागण करने से सेब सेटिंग अच्छी होती है। प्रगतिशील बागवान चेत राम कौशल का कहना है कि फरवरी या मार्च की शुरुआत में या अक्तूबर माह में बंच ग्राफ्टिंग की जा सकती है, जिससे मादा वैरायटी से बीमे वाली टहनी काटकर सीधे कलम की जा सकती है और जब फ्लॉवरिंग का समय आता है, तो उस समय इन कलमों में फूल खिलते हैं और सेब सेटिंग में मदद करता है। उनका कहना है कि इस तकनीक को सेम ईयर सेटिंग के लिए अपनाना है, तो बिना प्रशिक्षण के दूसरी साल में भी सेटिंग के चांस रहते हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
निरमंड (कुल्लू)। उपमंडल निरमंड के बागवान सेब बगीचों को संवारने में जुट गए हैं। सेब के बगीचों में बागवान ग्राफ्टिंग का कार्य कर रहे हैं। सेब के बेहतर उत्पादन के लिए परागण प्रक्रिया का यह अच्छा विकल्प है। इन दिनों बागवान फ्लॉवरिंग के समय मधुमक्खी के परागण प्रक्रिया के लिए पोलिनाइजर वैरायटी का ग्राफ्ट करने में जुट गए हैं। इससे बागवानों को पॉलिथीन में पोलिनाइजर गुच्छा लगाने की आवश्यकता नहीं होती है इसलिए आजकल बागवान अपने सेब बगीचे में ग्राफ्टिंग कार्य कर रहे हैं। इससे फ्लॉवरिंग के समय मधुमक्खी और अन्य मित्र मक्खियों को सेब सेटिंग करने में मदद मिलती है। मादा प्रजाति की वैरायटी को पोलिनेटर कहा जाता है। मादा वैरायटी से मधुमक्खी, तितलियां, अन्य मित्र मक्खियाें के परागण करने से सेब सेटिंग अच्छी होती है। प्रगतिशील बागवान चेत राम कौशल का कहना है कि फरवरी या मार्च की शुरुआत में या अक्तूबर माह में बंच ग्राफ्टिंग की जा सकती है, जिससे मादा वैरायटी से बीमे वाली टहनी काटकर सीधे कलम की जा सकती है और जब फ्लॉवरिंग का समय आता है, तो उस समय इन कलमों में फूल खिलते हैं और सेब सेटिंग में मदद करता है। उनका कहना है कि इस तकनीक को सेम ईयर सेटिंग के लिए अपनाना है, तो बिना प्रशिक्षण के दूसरी साल में भी सेटिंग के चांस रहते हैं।