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सड़कें बंद होने से बागवान हो रहे परेशान : नरेश चौहान
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प्रेसवार्ता करते भाजपा मंडल अध्यक्ष रामपुर नरेश चौहान। संवाद
बोले- सड़कों को बहाल नहीं कर पाया लोक निर्माण विभाग
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। उपमंडल में बरसात थम चुकी है, लेकिन अभी तक सरकार, प्रशासन और लोक निर्माण विभाग मुख्य सड़कों का यातायात के लिए बहाल नहीं कर पाया है। रामपुर के करीब 40 रूट बाधित हैं। यह बात भाजपा मंडल रामपुर के अध्यक्ष नरेश चौहान ने प्रेसवार्ता में कही। उन्होंने कहा कि दुर्गम 15/20 और 12/20 घाटी की सड़कें अभी भी यातायात के लिए ठप पड़ी हैं। हजारों बागवानों और ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जबकि सरकार और स्थानीय नेता दावा कर रहे हैं कि सभी सड़कों को बहाल कर दिया है। उन्होंने कहा कि काशापाट, मुनिश, थड़ा, कूट, क्याव और लबाना-सदाना में अभी भी सेब सीजन समाप्त नहीं हो पाया है। यह क्षेत्र सड़क सुविधा से पूरी तरह से कटे हुए हैं। बागवान अपनी पीठ पर ढोकर सेब को मंडियों तक पहुंचा रहे हैं। जहां मंडियों में सेब की पेटी 800 से 1,000 रुपये तक बिक रही है, वहीं सेब की पेटी को मंडियों तक पहुंचाने में 600 से 700 रुपये खर्च हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के नुमाइंदे केवल प्रभावित क्षेत्र में घूमकर महज औपचारिकता पूरी कर रहें हैं। नरैण पंचायत के तहत पेलन गांव में डेढ़ माह से सेब की बारियां सड़क पर सड़ रही हैं। ऐसे में ग्रामीणों ने अपने पैसे देकर जेसीबी से सड़क को बहाल करना पड़ा। चाशनी मंडोग सड़क में डंगा गिरने के कारण बाधित रही। उन्होंने कहा कि जहां पर डंगा ढहा है, वहां कांग्रेस समर्थित व्यक्ति का खेत है। इस कारण लोक निर्माण विभाग सड़क को बहाल करने के कार्य में आनाकानी बरत रही है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि बाधित सड़कों को जल्द बहाल किया जाए ताकि ग्रामीणों का जीवन फिर से पटरी पर आ सके। इस अवसर पर भाजपा मंडल के महामंत्री दिनेश खमराल और राहुल चौहान मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। उपमंडल में बरसात थम चुकी है, लेकिन अभी तक सरकार, प्रशासन और लोक निर्माण विभाग मुख्य सड़कों का यातायात के लिए बहाल नहीं कर पाया है। रामपुर के करीब 40 रूट बाधित हैं। यह बात भाजपा मंडल रामपुर के अध्यक्ष नरेश चौहान ने प्रेसवार्ता में कही। उन्होंने कहा कि दुर्गम 15/20 और 12/20 घाटी की सड़कें अभी भी यातायात के लिए ठप पड़ी हैं। हजारों बागवानों और ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जबकि सरकार और स्थानीय नेता दावा कर रहे हैं कि सभी सड़कों को बहाल कर दिया है। उन्होंने कहा कि काशापाट, मुनिश, थड़ा, कूट, क्याव और लबाना-सदाना में अभी भी सेब सीजन समाप्त नहीं हो पाया है। यह क्षेत्र सड़क सुविधा से पूरी तरह से कटे हुए हैं। बागवान अपनी पीठ पर ढोकर सेब को मंडियों तक पहुंचा रहे हैं। जहां मंडियों में सेब की पेटी 800 से 1,000 रुपये तक बिक रही है, वहीं सेब की पेटी को मंडियों तक पहुंचाने में 600 से 700 रुपये खर्च हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के नुमाइंदे केवल प्रभावित क्षेत्र में घूमकर महज औपचारिकता पूरी कर रहें हैं। नरैण पंचायत के तहत पेलन गांव में डेढ़ माह से सेब की बारियां सड़क पर सड़ रही हैं। ऐसे में ग्रामीणों ने अपने पैसे देकर जेसीबी से सड़क को बहाल करना पड़ा। चाशनी मंडोग सड़क में डंगा गिरने के कारण बाधित रही। उन्होंने कहा कि जहां पर डंगा ढहा है, वहां कांग्रेस समर्थित व्यक्ति का खेत है। इस कारण लोक निर्माण विभाग सड़क को बहाल करने के कार्य में आनाकानी बरत रही है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि बाधित सड़कों को जल्द बहाल किया जाए ताकि ग्रामीणों का जीवन फिर से पटरी पर आ सके। इस अवसर पर भाजपा मंडल के महामंत्री दिनेश खमराल और राहुल चौहान मौजूद रहे।