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रामपुर बुशहर: कामगारों और मजदूरों ने भागकर बचाई जान, सैकड़ाें का छिन गया रोजगार
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आग ने करोड़ों की संपत्ति को देखते देखते राख के ढेर में किया तबदील।
तिलक राज कायथ
रामपुर बुशहर। रामपुर से 25 किलोमीटर दूर बिथल में एक मेगा स्टोर में बुधवार सुबह जब आग लगी उस समय यहां 50 से 60 कामगार सो रहे थे। आग लगने की सूचना के बाद सभी ने भागकर किसी तरह से अपनी जान बचाई।अग्निकांड की इस घटना में सैकड़ों कामगारों का रोजगार छिन गया है। वहीं अब उनके सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
बताया जा रहा है कि सात मंजिला भवन के सबसे ऊपरी हिस्से में मेट्रेस फोम, लिलोलियम और थर्मोकोल रखा था। इसमें भड़की आग ने देखते ही देखते अन्य सामान वाली तीन फर्मों को भी अपने आगोश में ले लिया। आग से निकल रही लपटें इतनी भयानक थी कि फर्मों के ऊपर घंटों काला धुंआ निकलता रहा। दमकल कर्मियों, एनडीआरएफ की टीम को भी आग बुझाने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
जानकारी के मुताबिक बुधवार सुबह चार बजे चौहान हार्डवेयर की सबसे ऊपरी मंजिल में आग भड़की। इसके ठीक नीचे वाली मंजिल में कारीगर नसीम खान सो रहा था। ऊपरी मंजिल में रखे मेट्रेस फोम, लिलोलियम और थर्मोकोल जलने से निकला पदार्थ नसीम खान के ऊपर गिरा तो वह उठ गया। आग देखकर उसके होश फाख्ता हो गए। किसी तरह से उसने अन्य साथियों को इसकी सूचना दी। इसके बाद करीब 50-60 कारीगर और मजदूरों ने यहां से भागकर अपनी जान बचाई। बीते दो दशक से भी अधिक समय से चल रहे मेगा स्टोर में प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से करीब 600 लोगों का रोजगार जुड़ा था।
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इसमें कारीगर, मजदूर, वाहन चालक सहित अन्य कामगार शामिल हैं। यहां टिंबर, फर्नीचर, इलेक्ट्रोनिक्स, फोम की फैक्ट्री, लकड़ी की फैक्ट्री, कपड़े, पेंट, किराना, दूध और वस्तुओं का कारोबार होता था। तीनों फर्मों के आग की भेंट चढ़ने के बाद अब इन लोगों के सामने गुजर बसर करने का संकट खड़ा हो गया है। वहीं मेगा स्टोर के मालिक को इस अग्निकांड में करोड़ों का नुकसान हुआ है। खबर लिखे जाने तक राजस्व विभाग का दल आग से हुए नुकसान का आकलन करने में जुटा हुआ था।
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रामपुर बुशहर। रामपुर से 25 किलोमीटर दूर बिथल में एक मेगा स्टोर में बुधवार सुबह जब आग लगी उस समय यहां 50 से 60 कामगार सो रहे थे। आग लगने की सूचना के बाद सभी ने भागकर किसी तरह से अपनी जान बचाई।अग्निकांड की इस घटना में सैकड़ों कामगारों का रोजगार छिन गया है। वहीं अब उनके सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
बताया जा रहा है कि सात मंजिला भवन के सबसे ऊपरी हिस्से में मेट्रेस फोम, लिलोलियम और थर्मोकोल रखा था। इसमें भड़की आग ने देखते ही देखते अन्य सामान वाली तीन फर्मों को भी अपने आगोश में ले लिया। आग से निकल रही लपटें इतनी भयानक थी कि फर्मों के ऊपर घंटों काला धुंआ निकलता रहा। दमकल कर्मियों, एनडीआरएफ की टीम को भी आग बुझाने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
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जानकारी के मुताबिक बुधवार सुबह चार बजे चौहान हार्डवेयर की सबसे ऊपरी मंजिल में आग भड़की। इसके ठीक नीचे वाली मंजिल में कारीगर नसीम खान सो रहा था। ऊपरी मंजिल में रखे मेट्रेस फोम, लिलोलियम और थर्मोकोल जलने से निकला पदार्थ नसीम खान के ऊपर गिरा तो वह उठ गया। आग देखकर उसके होश फाख्ता हो गए। किसी तरह से उसने अन्य साथियों को इसकी सूचना दी। इसके बाद करीब 50-60 कारीगर और मजदूरों ने यहां से भागकर अपनी जान बचाई। बीते दो दशक से भी अधिक समय से चल रहे मेगा स्टोर में प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से करीब 600 लोगों का रोजगार जुड़ा था।
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इसमें कारीगर, मजदूर, वाहन चालक सहित अन्य कामगार शामिल हैं। यहां टिंबर, फर्नीचर, इलेक्ट्रोनिक्स, फोम की फैक्ट्री, लकड़ी की फैक्ट्री, कपड़े, पेंट, किराना, दूध और वस्तुओं का कारोबार होता था। तीनों फर्मों के आग की भेंट चढ़ने के बाद अब इन लोगों के सामने गुजर बसर करने का संकट खड़ा हो गया है। वहीं मेगा स्टोर के मालिक को इस अग्निकांड में करोड़ों का नुकसान हुआ है। खबर लिखे जाने तक राजस्व विभाग का दल आग से हुए नुकसान का आकलन करने में जुटा हुआ था।