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Rampur Bushahar News: मुखैटा पहन गालियां देकर बुरी शक्तियों को किया प्रसन्न

Mon, 10 Mar 2025 11:12 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 10 Mar 2025 11:12 PM IST
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Fagli festival was formally concluded with Shikha Pujan
आनी के लढागी बुच्छेर की फागली में भडैला मुखैटा पहनकर सैंकड़ों साल पुरानी परंपरा को निभाते लोग। 
देवता काली नाग के सानिध्य में गांव का दौरा कर निभाई प्राचीन परंपरा
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शिखा पूजन के साथ फागली उत्सव का हुआ विधिवत समापन
संवाद न्यूज एजेंसी
आनी ( कुल्लू)। आनी की दुर्गम पंचायत बुच्छेर में फागली उत्सव में सैकड़ों वर्षों से हर्षाेल्लास के साथ मनाया जाता है। लढ़ांगी-बुच्छेर के लोगों ने सोमवार को देवता काली नाग के सानिध्य में क्षेत्र के कई गांव का दौरा कर भडैला यानी विशेष तरह का मुखौटा पहनकर प्राचीन परंपरा निभाई। देवता के कारदार रमेश कुमार, गुलाब सिंह, रोशनलाल, रामसिंह, पदम प्रभाकर ने बताया कि मुखौटे के अंदर से पारंपरिक अश्लील गालियां देकर बुरी शक्तियों को प्रसन्न किया जाता है। यह परंपरा है कि इस तरह की गालियां देने से बुरी शक्तियां एक निश्चित अवधी तक प्रसन्न रहती हैं और क्षेत्र को अपना बुरा प्रभाव नहीं देती। इस दौरान मुखौटा पहने लोग पारंपरिक नृत्य भी करते हैं। उन्होंने कहा कि यह फेरा मंदिर से निकलकर लढ़ांगी से बनास, रूमाली, निचली रूमाली, लफाली और बुच्छेर गांव का पूरा फेरा किया जाता है। ढाई फेरा देने के बाद मंदिर में शिख पूजा की रस्म निभाई गई। जहां पूजा हवन पाठ आदि कार्यक्रम के बाद फागली उत्सव का समापन हुआ।

लढ़ांगी की फागली उत्सव का निरमंड से है संबंध

कारदार ने कहा कि लढ़ांगी-बुच्छेर में मनाए जाने वाली फागली उत्सव का संबंध निरमंड से है। पूर्वकाल में निरमंड का भूंडा यज्ञ लढ़ांगी में होता था, जबकि फागली उत्सव निरमंड में होता था। एक बार जब देवता काली नाग ने भूंडा यज्ञ में अपनी शक्तियों से पूजा में इस्तेमाल होने वाली विभिन्न दुर्लभ जड़ी-बूटियों और अन्य सामान को निरमंड में हवा मार्ग से पहुंचाया, तो देवताओं की शक्तियों से निरमंड में देव कार्य पूर्ण हुए। इसका जिक्र भूंडा यज्ञ के दौरान आता है। उन्होंने कहा कि देवता कालीनाग का निरमंड के भूंडायज्ञ में विशेष स्थान है ।
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