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50 प्रतिशत पाठ्यक्रम के आधार पर हों परीक्षाएं : एसएफआई
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एसएफआई के कार्यकर्ता रामपुर कॉलेज में धरना प्रदर्शन करते हुए
- फोटो : RAMPUR-HP
रामपुर बुशहर। कोरोना महामारी के कारण प्रदेश के हजारों छात्र भौगोलिक परिस्थितियों के चलते ऑनलाइन शिक्षा से वंचित रहे हैं। ऐसे में एसएफआई रामपुर ने 50 प्रतिशत पाठ्यक्रम के आधार पर परीक्षाएं करवाने की मांग की है। इस संबंध में इकाई ने प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति को एक ज्ञापन भी भेजा है।
पीजी कॉलेज में एसएफआई इकाई के कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को विरोध-प्रदर्शन किया। इकाई ने प्राचार्य के माध्यम से कुलपति को ज्ञापन भेजा। इकाई सचिव साहिल राणा ने कहा महामारी के कारण 2020 में सभी शिक्षण संस्थान बंद थे, इस कारण ऑनलाइन कक्षाएं महज औपचारिकता के रूप में हुईं।
प्रदेश के कई क्षेत्रों में नेटवर्क की कमी के कारण बहुत से छात्र ऑनलाइन कक्षाएं नहीं लगा पाए। एसएफआई मांग ने मांग की है कि 50 प्रतिशत पाठ्यक्रम के आधार पर परीक्षाएं करवाई जाएं। जहां प्रदेश सरकार को शिक्षा पर तीस प्रतिशत बजट खर्च करना चाहिए था, उसके विपरीत शिक्षा को आम जनता से दूर करने की कोशिश रही है।
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सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था के हालात दिन प्रतिदिन बिगड़ते जा रहे हैं, जिसे दुरुस्त करने के लिए बजट बढ़ाने की आवश्यकता है, परंतु सरकार के केंद्रीय बजट में पिछले वर्ष के मुताबिक इस वर्ष शिक्षा क्षेत्र में छह प्रतिशत की कटौती दर्ज की गई है। निजी शिक्षण संस्थानों को लाभ देने के लिए ग्रेड के आधार पर शिक्षा संस्थानों को ऑटोनॉमिस संस्थान घोषित किया जा रहा है। शिक्षा के बजट को दिन प्रतिदिन खत्म किया जा रहा है। इस मौके पर भागे राम, राहुल, अमन, साहिल राणा, प्रियंका, विक्की, रंभा, चिंटू, शोभा, बलवीर, साहिल नेगी, प्रिय, मनीषा के अलावा अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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पीजी कॉलेज में एसएफआई इकाई के कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को विरोध-प्रदर्शन किया। इकाई ने प्राचार्य के माध्यम से कुलपति को ज्ञापन भेजा। इकाई सचिव साहिल राणा ने कहा महामारी के कारण 2020 में सभी शिक्षण संस्थान बंद थे, इस कारण ऑनलाइन कक्षाएं महज औपचारिकता के रूप में हुईं।
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प्रदेश के कई क्षेत्रों में नेटवर्क की कमी के कारण बहुत से छात्र ऑनलाइन कक्षाएं नहीं लगा पाए। एसएफआई मांग ने मांग की है कि 50 प्रतिशत पाठ्यक्रम के आधार पर परीक्षाएं करवाई जाएं। जहां प्रदेश सरकार को शिक्षा पर तीस प्रतिशत बजट खर्च करना चाहिए था, उसके विपरीत शिक्षा को आम जनता से दूर करने की कोशिश रही है।
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सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था के हालात दिन प्रतिदिन बिगड़ते जा रहे हैं, जिसे दुरुस्त करने के लिए बजट बढ़ाने की आवश्यकता है, परंतु सरकार के केंद्रीय बजट में पिछले वर्ष के मुताबिक इस वर्ष शिक्षा क्षेत्र में छह प्रतिशत की कटौती दर्ज की गई है। निजी शिक्षण संस्थानों को लाभ देने के लिए ग्रेड के आधार पर शिक्षा संस्थानों को ऑटोनॉमिस संस्थान घोषित किया जा रहा है। शिक्षा के बजट को दिन प्रतिदिन खत्म किया जा रहा है। इस मौके पर भागे राम, राहुल, अमन, साहिल राणा, प्रियंका, विक्की, रंभा, चिंटू, शोभा, बलवीर, साहिल नेगी, प्रिय, मनीषा के अलावा अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।