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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Rampur Bushahar News ›   District Shimla's Chaupal and Dodra Quar also demanding tribal status

जिला शिमला के चौपाल और डोडरा क्वार को भी मिले जनजातीय दर्जा

Sat, 30 Apr 2022 10:33 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 30 Apr 2022 10:33 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
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नेरवा (रोहडू)। सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र को जनजातीय दर्जा मिलने के संकेत से दुर्गम क्षेत्र चौपाल और डोडरा क्वार में यह मुद्दा गरमा गया है। मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहे इन सीमांत क्षेत्रों को भी जनजातीय क्षेत्र का दर्जा देने की मांग जोर पकड़ने लगी है।
क्षेत्र के समाजसेवी विशाल चौहान, दौलत राम पेजटा, शार्प संस्था के अध्यक्ष सुदर्शन धिरट और महासचिव लोकेंद्र चौहान सहित दर्जनों लोगों ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि केंद्र सरकार के समक्ष इस मामले को उठाकर चौपाल और डोडरा क्वार को भी गिरिपार के साथ-साथ जनजातीय क्षेत्र का दर्जा दिलवाएं। चौपाल की भौगोलिक परिस्थितियां उत्तराखंड के जनजातीय क्षेत्र जौंसार बाबर और हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र के बराबर हैं। रीति-रिवाज, त्यौहार, खान-पान, भाषा शैली और पहनावा सब इन क्षेत्रों के के जैसे हैं। किरण और कुपवी क्षेत्र की सीमाएं जौंसार बाबर से लगती हैं। दूसरी तरफ पुलबाहल क्षेत्र की सीमाएं जिला सिरमौर के राजगढ़ विकास खंड के साथ लगती हैं।
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कुपवी क्षेत्र की सीमाएं सिरमौर के संगड़ाह और शिलाई के साथ जुड़ी हैं। उन्होंने कहा कि चौपाल के राजनीतिक नेतृत्व की इच्छा शक्ति का न होना और जनप्रतिनिधियों द्वारा पिछले पच्चास सालों से इस विषय को न उठाने से इसे तवज्जो नहीं मिल पाई। गिरिपार के लोग तथा उनके जनप्रतिनिधि बीते साढ़े तीन दशक से जनता की इस लड़ाई में शामिल रहे हैं। उत्तराखंड के जौंसार बाबर को 55 साल पहले 1967 में जनजातीय क्षेत्र का दर्जा मिल गया था। सिरमौर के लोग आज तक अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं।
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भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने नाहन में आश्वाशन दिया था कि गिरिपार क्षेत्र को जनजातीय क्षेत्र का दर्जा दिया जाएगा, लेकिन यह आश्वासन सिरे नहीं चढ़ पाया। गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली में गिरिपार क्षेत्र के लोगों को इस बार आश्वासन दिया कि भारत के रजिस्ट्रार जनरल (आरजीआई) से इस संबंध में सकारात्मक रिपोर्ट आई है।

वहीं, जिला शिमला के अत्यंत दुर्गम क्षेत्रों में से एक चौपाल और डोडरा क्वार की अनदेखी की जाती रही है। उन्होंने चेतावनी दी है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में इसके दूरगामी परिणाम भी सरकार को भुगतने पड़ सकते हैं।
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