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Rampur Bushahar News: पिछली बरसात के प्रभावितों को इस बार भी सरकार और प्रशासन से नहीं आस

Tue, 02 Jul 2024 11:51 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 02 Jul 2024 11:51 PM IST
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Disaster affected, Rampur Bushahr, disappointment with government and administration
उच्ची गांव में बना देवता साहिब लक्ष्मी नारायण का मंदिर खतरे की जद
बीती बरसात के जख्म अभी भरे नहीं, फिर डरा रही बरसात, जर्जर बना मंदिर दे रहा हादसे को न्योता, सात गांव के ग्रामीण खौफ में, सरकार और प्रशासन की अनदेखी को लेकर ग्रामीणों में रोष
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संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। बीते वर्ष बरसात से जहां हजारों लोग अब तक नहीं उभर पाए हैं, वहीं इस बार भी बरसात का मौसम लोगों में खौफ बढ़ा रहा है। रामपुर उपमंडल की दो पंचायतों के दो सौ से अधिक परिवार सरकार और प्रशासन राहत की गुहार लगाते लगाते थक गए हैं, लेकिन ग्रामीणों को अब तक राहत की कोई खबर नहीं मिल पाई है। दोफदा और फूंजा पंचायत के सैकड़ों परिवार भूमि धंसने की समस्या से जूझ रहे हैं। हाल ऐसा है कि उच्ची में जर्जर बने मंदिर से कई मकानों को खतरा पैदा हो गया है, जिसे देखते हुए ग्रामीणों ने अब देवता लक्ष्मी नारायण के मंदिर को गिराने का फैसला ले लिया है।
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रामपुर उपमंडल की दोफदा और फूंजा पंचायत के सात गांव के दो से अधिक परिवार बीते कई वर्षों से भूमि धंसने की समस्या से जूझ रहे हैं। हालांकि, यहां वर्षों से यह समस्या बनी हुई है, लेकिन बीते वर्ष हुई भारी बरसात से इन सात गांव पर खतरा काफी बढ़ गया है। प्रभावित ग्रामीण वर्षों से सरकार से सुरक्षित जगह बसाने की मांग करते आ रहे हैं। बीते माह भी दोफदा पंचायत का एक प्रतिनिधिमंडल प्रशासन से मिला था। प्रभावितों ने कहा कि दोफदा और फूंजा पंचायत के उच्ची, शाह, दशमाला, दोफदा, दारन, फूंजा और मघारा गांव में बरसात के कारण खतरा बना हुआ है। सैकड़ों मकान कभी भी भूमि धंसाव की जद में आकर ध्वस्त हो सकते हैं। सैकड़ों मकान और सेब के बगीचे भूमि धंसाव की चपेट में आने से लगातार क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। उच्ची गांव में बना देवता साहिब लक्ष्मी नारायण का मंदिर भी वर्षों से खतरे की जद में आया है। जर्जर बने इस मंदिर को बचाने के लिए कहीं से भी कोई राहत राशि नहीं मिल पाई है, जबकि इस मंदिर से साथ लगते मकानों को खतरा बना हुआ है। सरकार और प्रशासन से आस गंवाए ग्रामीणों ने अब इस मंदिर को गिराने का निर्णय ले लिया है, ताकि जान माल के नुकसान से बचा जा सके।
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दो पंचायतों के सात गांव प्रभावित हो गए

ग्रामीण प्यारे लाल किड्डा, तिलक राज, देवेंद्र, देवराज, महेंद्र सहित अन्य ने कहा कि भूमि धंसने के कारण दो पंचायतों के सात गांव प्रभावित हो गए हैं। वर्षों बाद भी न प्रशासन और न ही सरकार की ओर से कोई मदद मिल पाई है। उन्होंने जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार से ग्रामीणों की हर संभव मदद की गुहार लगाई है।
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