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सेवानिवृत्ति के बाद भी सताती रही देश सीमा की सुरक्षा
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सांगला (किन्नौर)। भारत-चीन के बीच बढ़ते विवाद की चिंता बीएसएफ से सेवानिवृत्त डीआईजी एससी नेगी को सता रही थी। इसी का कारण था कि नेगी भारत-तिब्बत सीमा से सटे दुर्गम इलाके में सड़क की संभावना तलाशने निकल पड़े। उन्हें क्या मालूम था कि देश सेवा करते-करते उनके प्राण न्योछावर हो जाएंगे। इस पूर्व अधिकारी के बलिदान को किन्नौर और प्रदेश के लोग हमेशा याद रखेंगे।
पूह खंड के 70 वर्षीय पूर्व बीएसएफ अधिकारी एससी नेगी ने अपना पूरा जीवन देश सेवा में लगाया था। भारत-तिब्बत सीमा पर विवाद का संकट उन्हें दिन-रात सता रहा था। सीमावर्ती क्षेत्र में सड़क का निर्माण हो, इसके लिए नेगी सेवानिवृत्ति के बाद भी सेवा में तत्पर दिखे। पूरे जोश के साथ 25 सितंबर को नेगी नेसंग से भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल के दो दर्जन से अधिक जवानों, पोटरों, लोनिवि के अधिकारियों और युवाओं के साथ कदम से कदम मिलाकर चल पड़े। आईटीबीपी के नेसंग कैंप से तिब्बत सीमा के जौंगचिन ला के लिए जब एससी नेगी निकले तो उन्हें अपने लक्ष्य के लिए मात्र सात किलोमीटर की दूरी तय करनी थी, लेकिन इससे पहले गंगटंग ला नाले में मौत उनका इंतजार कर रही थी। 29 सितंबर को आईटीबीपी के जवानों, पोटरों और युवाओं के साथ बातचीत करते हुए वह अपनी थकान दूर करने के बाद जब गंगटंग ला नाले के करीब पहुंचे तो अचानक उनका पैर फिसला और वह रास्ते से करीब 400 फीट नीचे गहरी खाई में जा गिरे और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। नेगी का लांग रेंज पेट्रोलिंग और सड़क सर्वे का सपना अधूरा ही रह गया। घटना के तीन दिन बाद भी उनका शव पूह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तक नहीं पहुंच पाया है। एससी नेगी एक महान पर्वतारोही थे और उन्होंने अपनी अंतिम सांस भी पर्वतों पर ही ली। इस जांबाज पूर्व अधिकारी ने विश्व के सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर 56 वर्ष की उम्र में चढ़ाई की थी। नेगी की मौत से किन्नौर जिले में शोक की लहर दौड़ गई है।
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पूह खंड के 70 वर्षीय पूर्व बीएसएफ अधिकारी एससी नेगी ने अपना पूरा जीवन देश सेवा में लगाया था। भारत-तिब्बत सीमा पर विवाद का संकट उन्हें दिन-रात सता रहा था। सीमावर्ती क्षेत्र में सड़क का निर्माण हो, इसके लिए नेगी सेवानिवृत्ति के बाद भी सेवा में तत्पर दिखे। पूरे जोश के साथ 25 सितंबर को नेगी नेसंग से भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल के दो दर्जन से अधिक जवानों, पोटरों, लोनिवि के अधिकारियों और युवाओं के साथ कदम से कदम मिलाकर चल पड़े। आईटीबीपी के नेसंग कैंप से तिब्बत सीमा के जौंगचिन ला के लिए जब एससी नेगी निकले तो उन्हें अपने लक्ष्य के लिए मात्र सात किलोमीटर की दूरी तय करनी थी, लेकिन इससे पहले गंगटंग ला नाले में मौत उनका इंतजार कर रही थी। 29 सितंबर को आईटीबीपी के जवानों, पोटरों और युवाओं के साथ बातचीत करते हुए वह अपनी थकान दूर करने के बाद जब गंगटंग ला नाले के करीब पहुंचे तो अचानक उनका पैर फिसला और वह रास्ते से करीब 400 फीट नीचे गहरी खाई में जा गिरे और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। नेगी का लांग रेंज पेट्रोलिंग और सड़क सर्वे का सपना अधूरा ही रह गया। घटना के तीन दिन बाद भी उनका शव पूह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तक नहीं पहुंच पाया है। एससी नेगी एक महान पर्वतारोही थे और उन्होंने अपनी अंतिम सांस भी पर्वतों पर ही ली। इस जांबाज पूर्व अधिकारी ने विश्व के सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर 56 वर्ष की उम्र में चढ़ाई की थी। नेगी की मौत से किन्नौर जिले में शोक की लहर दौड़ गई है।
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