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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Rampur Bushahar News ›   Damage assessment not conducted even a month after hailstorm; orchardists worried.

Rampur Bushahar News: ओलावृष्टि के एक माह बाद भी नहीं हुआ नुकसान का आकलन, बागवान परेशान

Sat, 04 Jul 2026 11:28 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 04 Jul 2026 11:28 PM IST
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नोगवैली, 12/20 और मुनिश क्षेत्र में सेब व गुठलीदार फसलों को भारी नुकसान
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एक माह बाद भी प्रशासन और बागवानी विभाग ने नहीं किया क्षति का आकलन
बढ़ती लागत और बैंक ऋण के बीच फसल नुकसान से बागवानों की बढ़ी चिंता
छोटे और मंझोले बागवान आर्थिक तंगी के कारण नहीं लगा पा रहे एंटी हेलनेट
प्रभावित बागवानों ने जल्द सर्वे कर उचित आर्थिक राहत देने की सरकार से मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
डंसा (रामपुर बुशहर)। उपमंडल रामपुर के सेब बहुल क्षेत्रों में करीब एक माह पहले हुई ओलावृष्टि ने बागवानों को भारी नुकसान पहुंचाया था। ओलावृष्टि से सेब की फसल बुरी तरह प्रभावित हुई, लेकिन एक माह बीत जाने के बाद भी नुकसान का आकलन करने के लिए प्रशासन या बागवानी विभाग का कोई अधिकारी नहीं पहुंचा है। इससे प्रभावित बागवानों में मायूसी है और वे नुकसान के आकलन का इंतजार कर रहे हैं।
भारी ओलावृष्टि से अधिकांश सेब बहुल क्षेत्रों में सेब के साथ अन्य गुठलीदार फसलों को भी व्यापक नुकसान हुआ है। बागवानों का कहना है कि क्षति का आकलन किए बिना उन्हें राहत मिलना संभव नहीं है, लेकिन अब तक कोई सर्वे नहीं होने से वे विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।
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मई और जून में नोगवैली, 12/20 और मुनिश सहित अधिकांश सेब बहुल क्षेत्रों में 75 से 80 प्रतिशत तक सेब की फसल ओलावृष्टि की चपेट में आ गई। इससे बागवानों की सालभर की मेहनत पर पानी फिर गया। उनका कहना है कि कीटनाशकों, फफूंदनाशकों तथा कृषि-बागवानी उपकरणों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे उत्पादन लागत में भारी इजाफा हुआ है। ऐसे में फसल खराब होने से उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
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सैकड़ों बागवानों ने किसान क्रेडिट कार्ड से बैंक से ऋण ले रखा है। प्राकृतिक आपदा से फसल को हुए नुकसान के बाद उनके लिए ऋण चुकाना भी मुश्किल हो गया है। बागवानों का कहना है कि प्रशासन और बागवानी विभाग हर वर्ष प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान का आकलन तो करते हैं, लेकिन राहत समय पर नहीं मिल पाती। उनका आरोप है कि पूरी प्रक्रिया अक्सर कागजी कार्रवाई तक ही सीमित रह जाती है।
बागवानों का कहना है कि बागवानी विभाग एंटी हेलनेट लगाने की सलाह तो देता है, लेकिन अधिकांश छोटे और मंझोले बागवान आर्थिक तंगी के कारण इस सुविधा का लाभ नहीं उठा पाते। ऐसे में उन्हें हर वर्ष ओलावृष्टि से होने वाले नुकसान का सामना करना पड़ता है।

जल्द नुकसान का करें आकलन
क्षेत्र के प्रगतिशील बागवान प्रेम चौहान, गोविंद सिंह, श्याम मुरारी, यशपाल, पवन, सुंदर सिंह, छतर सिंह, गोवर्धन दास, सुरजीत सिंह, दिनेश कुमार, सूरज नेगी, भूषण कुमार, दौलत राम, रूप दास, कुलदीप, काम राज, लायक राम और अनिल नेगी सहित सैकड़ों बागवानों ने प्रशासन और बागवानी विभाग की कार्यप्रणाली पर चिंता जताई है। उन्होंने प्रदेश सरकार से ओलावृष्टि से हुए नुकसान का शीघ्र आकलन कर प्रभावित बागवानों को उचित आर्थिक राहत प्रदान करने की मांग की है।
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