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सही समय पर करें पौधों की काट-छांट, विशेषज्ञों से ही करवाएं

Sun, 19 Dec 2021 11:06 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 19 Dec 2021 11:06 PM IST
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cutting and pruning started in apple belt shimla
सेब के बगीचों में प्रूनिंग के काम में जुटे बागवान - फोटो : RAMPUR-HP
रोहडू्। सर्दियों का मौसम शुरू होते ही बागवान सेब के बगीचों में प्रूनिंग के कार्य में जुट गए हैं। पुराने पौधे नष्ट होने के बाद अब बागवान उनकी जगह नए पौधे लगाने की भी तैयारी कर रहे हैं। विशेषज्ञों की सलाह है कि बागवान वैज्ञानिक तरीके से बगीचों की देखरेख का कार्य करें। फरवरी तक इन कार्यों को पूरा करने के लिए बागवानों के पास अभी काफी समय शेष है।
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बागवानी विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदेश के कई इलाकों में बागवानों ने दिसंबर में ही सेब के पेड़ों की काटछांट करने का काम शुरू कर दिया है। दिसंबर और जनवरी में पेड़ों की काटछांट पौधे की सुसुप्त अवस्था में ही करें। अगर पौधे में पत्तियां नहीं गिरी तो काटछांट से कई तरह की समस्याएं पैदा हो सकती हैं। प्रूनिंग के लिए उचित समय की इंतजार जरूरी है।
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कृषि विज्ञान केंद्र रोहडू़ के प्रभारी और बागवानी विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र कायथ का कहना है कि सेब के बगीचों में काटछांट का कार्य जानकार लोगों से करवाएं। फल की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए काटछांट का विशेष योगदान रहता है। उन्होंने कहना है कि पेड़ों की काटछांट को सही समय पर करने से कैंकर और वूली एफिड की समस्या कम हो जाती है। जहां पर नमी है, वहां बागवान बगीचों में तौलिए बना सकते हैं।
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नए पौधे लगाने के लिए अभी से चयनित वैरायटी के अनुसार गड्ढे तैयार कर सकते हैं। कि नए बगीचे को लगाने के लिए पौधों के बीच की दूरी, भूमि की ढलान सहित कई आवश्यक जानकारी होना जरूरी है। इसके लिए लोग कृषि विज्ञान केंद्र से भी संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने कहा सेब के काटछांट के बाद लोग घाव पर साथ साथ पेस्ट लगाएं। इससे पेड़ों के जख्म जल्दी भरेंगे, पेड़ों को कैंकर और वूली एफिड की बीमारी का असर भी नहीं होगा। उन्होंने कहा कि बागवान अभी बगीचों में उर्वरकों का प्रयोग सूखे में न करें। इससे पौधे को नुकसान का संभावना रहेगी।
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