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फल फूल रहा नाग छतरी का कारोबार
Updated Sat, 09 Jun 2018 07:28 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
रोहड़ू। वन रेंज खशधार व डोडरा क्वार के जंगलों में नाग छतरी के तस्कर तंबू लगा कर बैठे हैं। नाग छतरी की खुदाई के लिए नेपाल से मजदूरों को रखा गया है। मजदूरों के ठहरने व खान पान की पूरी व्यवस्था जंगलों में की गई है। वन विभाग अवैध कारोबार को रोकने के लिए कार्रवाई करने को तैयार नहीं है। जड़ी-बूटी के अवैध दोहन से बहुमूल्य वन संपदा को खतरा पैदा हो रहा है।
सब कुछ होने के बावजूद कार्रवाई करने में कहां दिक्कत है, इस पर सवाल उठ रहे। खशधार वन रेंज के जंगलों में नाग छतरी के दोहन पर अभी तक प्रतिबंध है। गैर प्रतिबंधित क्षेत्र में भी सितंबर से पहले नाग छतरी की खुदाई कानून जुर्म है। प्रतिबंध के बाद खशधार रेंज में करीब एक महीने से इस बहुमूल्य जड़ी नाग छतरी का बेखौफ दोहन हो रहा है। खुदाई के बाद जंगलों में मौके पर ठेकेदार खुले मैदानों में इसको सूखा कर बाजार में पहुंचा रहे है। सरू झील से लेकर चंबी , गरजू, शगाली के जाखी, ढाक गांव, गवास, दली के बीच कई जगह पर जंगलों में नाग छतरी तस्करों के डेरे चल रहे हैं। वन विभाग से बचाने में ठेकेदार अहम भूमिका निभा रहे है। सूखने के बाद नाग छतरी को ठेकेदार के घर या जंगल से बाहर अपने ठिकाने में जमा कर रहे हैं। स्थानीय बाजार में ही एक किलो नाग छतरी के दाम तीन से चार हजार रुपये प्रति किलो मिल रहे हैं। प्रतिबंध हटने के बाद भी जड़ी, बूटी के दोहन के नियम बने हैं। इसकी खुदाई वैज्ञानिक तरीके से केवल वहां के स्थानीय ग्रामीण ही कर सकते हैं। इसके लिए पहले पंचायत को वन विभाग से मंजूरी लेना जरूरी होता है। इसके बाद ही जंगल में सितंबर माह के बाद लोग इसका दोहन कर सकते हैं।
जड़ी, बूटी की खुदाई की अनुमति नहीं
डीएफओ रोहड़ू सीबी तहशीलदार ने कहा कि अभी तक खशधार वन रेंज में जड़ी, बूटी की खुदाई की अनुमति नहीं है। अनुमति देने के बाद ही स्थानीय लोग इसका दोहन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जंगलों में आजकल चल रही खुदाई की जानकारी उनके पास नहीं है। यदि ऐसा है तो कार्रवाई की जाएगी।
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रोहड़ू। वन रेंज खशधार व डोडरा क्वार के जंगलों में नाग छतरी के तस्कर तंबू लगा कर बैठे हैं। नाग छतरी की खुदाई के लिए नेपाल से मजदूरों को रखा गया है। मजदूरों के ठहरने व खान पान की पूरी व्यवस्था जंगलों में की गई है। वन विभाग अवैध कारोबार को रोकने के लिए कार्रवाई करने को तैयार नहीं है। जड़ी-बूटी के अवैध दोहन से बहुमूल्य वन संपदा को खतरा पैदा हो रहा है।
सब कुछ होने के बावजूद कार्रवाई करने में कहां दिक्कत है, इस पर सवाल उठ रहे। खशधार वन रेंज के जंगलों में नाग छतरी के दोहन पर अभी तक प्रतिबंध है। गैर प्रतिबंधित क्षेत्र में भी सितंबर से पहले नाग छतरी की खुदाई कानून जुर्म है। प्रतिबंध के बाद खशधार रेंज में करीब एक महीने से इस बहुमूल्य जड़ी नाग छतरी का बेखौफ दोहन हो रहा है। खुदाई के बाद जंगलों में मौके पर ठेकेदार खुले मैदानों में इसको सूखा कर बाजार में पहुंचा रहे है। सरू झील से लेकर चंबी , गरजू, शगाली के जाखी, ढाक गांव, गवास, दली के बीच कई जगह पर जंगलों में नाग छतरी तस्करों के डेरे चल रहे हैं। वन विभाग से बचाने में ठेकेदार अहम भूमिका निभा रहे है। सूखने के बाद नाग छतरी को ठेकेदार के घर या जंगल से बाहर अपने ठिकाने में जमा कर रहे हैं। स्थानीय बाजार में ही एक किलो नाग छतरी के दाम तीन से चार हजार रुपये प्रति किलो मिल रहे हैं। प्रतिबंध हटने के बाद भी जड़ी, बूटी के दोहन के नियम बने हैं। इसकी खुदाई वैज्ञानिक तरीके से केवल वहां के स्थानीय ग्रामीण ही कर सकते हैं। इसके लिए पहले पंचायत को वन विभाग से मंजूरी लेना जरूरी होता है। इसके बाद ही जंगल में सितंबर माह के बाद लोग इसका दोहन कर सकते हैं।
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जड़ी, बूटी की खुदाई की अनुमति नहीं
डीएफओ रोहड़ू सीबी तहशीलदार ने कहा कि अभी तक खशधार वन रेंज में जड़ी, बूटी की खुदाई की अनुमति नहीं है। अनुमति देने के बाद ही स्थानीय लोग इसका दोहन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जंगलों में आजकल चल रही खुदाई की जानकारी उनके पास नहीं है। यदि ऐसा है तो कार्रवाई की जाएगी।
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