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Rampur Bushahar News: गवाह बोले पुलिस ने खाली कागज पर कराए हस्ताक्षर शराब की 936 बोतलों की बरामदगी में आरोपी बरी
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पुलिस ने भी स्वतंत्र गवाहों को शामिल करने के संबंध में कोई लिखित कार्रवाई तैयार नहीं की
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। शराब बरामदगी के एक मामले में आरोपी को न्यायिक मजिस्ट्रेट, प्रथम श्रेणी, आनी की अदालत ने बरी कर दिया है। अदालत ने पाया कि स्वतंत्र गवाहों ने बरामदगी से इन्कार किया। सरकारी गवाहों की गवाही में भी कई विसंगतियां थीं। यह मामला 10 जनवरी 2021 का है। दोपहर लगभग गश्त कर रहे निरमंड थाना के पुलिस दल को गुप्त सूचना मिली कि कलूत गांव में एक घर में भारी मात्रा में अवैध शराब रखी है। घटनास्थल पर पहुंचने से पहले पुलिस ने दो स्वतंत्र गवाहों को दल में शामिल किया गया। तलाशी के दौरान 78 कार्टन में शराब की कुल 936 बोतलें बरामद की गईं। अभियोजन पक्ष ने तलाशी प्रक्रिया को विश्वसनीय और पारदर्शी बनाने के लिए दो व्यक्तियों को स्वतंत्र गवाह के रूप में शामिल किया। हालांकि, दोनों गवाह अदालत में अपने बयान से पूरी तरह मुकर गए। एक गवाह ने साफ कहा कि उनकी मौजूदगी में आरोपी के घर से कोई शराब बरामद नहीं हुई थी। उन्होंने यह भी बताया कि पुलिस अधिकारियों ने उनसे जल्दबाजी में खाली कागजों पर हस्ताक्षर करवाए थे। दूसरे स्वतंत्र गवाह ने भी किसी भी तलाशी या बरामदगी को देखने से इन्कार किया। उन्होंने कहा कि पुलिस ने उनसे दस्तावेजों की सामग्री बताए बिना हस्ताक्षर लिए थे। दोनों गवाहों ने विशेष रूप से इस सुझाव का खंडन किया कि उनकी मौजूदगी में शराब के 78 कार्टन बरामद हुए थे। अदालत ने अभियोजन पक्ष के मामले में कई गंभीर संदेह पैदा करने वालीं परिस्थितियां पाईं। अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि जिस कमरे से कथित शराब बरामद हुई, वह आरोपी के विशेष कब्जे में था। परिसर पर आरोपी के कब्जे की प्रकृति दर्शाने वाला कोई स्वामित्व दस्तावेज, राजस्व रिकॉर्ड या घर का रिकॉर्ड पेश नहीं किया गया। घर में रहने वाले सदस्यों के बारे में भी रिकॉर्ड पर कोई सबूत नहीं था। इसके अतिरिक्त, तलाशी के दौरान पंचायत का कोई प्रतिनिधि या स्थानीय सम्मानित निवासी शामिल नहीं किया गया। अभियोजन पक्ष ने इस चूक के लिए कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया। सरकारी गवाह हेड कांस्टेबल ने स्वीकार किया कि स्वतंत्र गवाहों को शामिल करने के संबंध में कोई लिखित कार्रवाई तैयार नहीं की गई थी। इससे अदालत को उन परिस्थितियों को दिखाने वाले समकालीन सबूतों से वंचित कर दिया गया। वहीं, अदालत ने कहा कि वर्तमान मामले में अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि देसी शराब की 936 बोतलों वाले 78 कार्टन आरोपी के कब्जे में थे, इसलिए अदालत ने आरोपी को हिमाचल प्रदेश आबकारी अधिनियम की धारा 39(1)(ए) के तहत दंडनीय अपराध से बरी कर दिया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। शराब बरामदगी के एक मामले में आरोपी को न्यायिक मजिस्ट्रेट, प्रथम श्रेणी, आनी की अदालत ने बरी कर दिया है। अदालत ने पाया कि स्वतंत्र गवाहों ने बरामदगी से इन्कार किया। सरकारी गवाहों की गवाही में भी कई विसंगतियां थीं। यह मामला 10 जनवरी 2021 का है। दोपहर लगभग गश्त कर रहे निरमंड थाना के पुलिस दल को गुप्त सूचना मिली कि कलूत गांव में एक घर में भारी मात्रा में अवैध शराब रखी है। घटनास्थल पर पहुंचने से पहले पुलिस ने दो स्वतंत्र गवाहों को दल में शामिल किया गया। तलाशी के दौरान 78 कार्टन में शराब की कुल 936 बोतलें बरामद की गईं। अभियोजन पक्ष ने तलाशी प्रक्रिया को विश्वसनीय और पारदर्शी बनाने के लिए दो व्यक्तियों को स्वतंत्र गवाह के रूप में शामिल किया। हालांकि, दोनों गवाह अदालत में अपने बयान से पूरी तरह मुकर गए। एक गवाह ने साफ कहा कि उनकी मौजूदगी में आरोपी के घर से कोई शराब बरामद नहीं हुई थी। उन्होंने यह भी बताया कि पुलिस अधिकारियों ने उनसे जल्दबाजी में खाली कागजों पर हस्ताक्षर करवाए थे। दूसरे स्वतंत्र गवाह ने भी किसी भी तलाशी या बरामदगी को देखने से इन्कार किया। उन्होंने कहा कि पुलिस ने उनसे दस्तावेजों की सामग्री बताए बिना हस्ताक्षर लिए थे। दोनों गवाहों ने विशेष रूप से इस सुझाव का खंडन किया कि उनकी मौजूदगी में शराब के 78 कार्टन बरामद हुए थे। अदालत ने अभियोजन पक्ष के मामले में कई गंभीर संदेह पैदा करने वालीं परिस्थितियां पाईं। अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि जिस कमरे से कथित शराब बरामद हुई, वह आरोपी के विशेष कब्जे में था। परिसर पर आरोपी के कब्जे की प्रकृति दर्शाने वाला कोई स्वामित्व दस्तावेज, राजस्व रिकॉर्ड या घर का रिकॉर्ड पेश नहीं किया गया। घर में रहने वाले सदस्यों के बारे में भी रिकॉर्ड पर कोई सबूत नहीं था। इसके अतिरिक्त, तलाशी के दौरान पंचायत का कोई प्रतिनिधि या स्थानीय सम्मानित निवासी शामिल नहीं किया गया। अभियोजन पक्ष ने इस चूक के लिए कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया। सरकारी गवाह हेड कांस्टेबल ने स्वीकार किया कि स्वतंत्र गवाहों को शामिल करने के संबंध में कोई लिखित कार्रवाई तैयार नहीं की गई थी। इससे अदालत को उन परिस्थितियों को दिखाने वाले समकालीन सबूतों से वंचित कर दिया गया। वहीं, अदालत ने कहा कि वर्तमान मामले में अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि देसी शराब की 936 बोतलों वाले 78 कार्टन आरोपी के कब्जे में थे, इसलिए अदालत ने आरोपी को हिमाचल प्रदेश आबकारी अधिनियम की धारा 39(1)(ए) के तहत दंडनीय अपराध से बरी कर दिया।