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Rampur Bushahar News: पत्नी और बेटे को मासिक भरण-पोषण राशि देने का आदेश
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अदालत ने पत्नी के आवेदन पर सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। रामपुर स्थित परिवार न्यायालय किन्नौर ने एक व्यक्ति को अपनी पत्नी और बेटे को मासिक भरण-पोषण राशि देने का आदेश दिया है। मासिक भरण-पोषण राशि देने के लिए आवेदन व्यक्ति की पत्नी ने दायर किया था। आवेदनकर्ता महिला के अनुसार उसके पति ने मार्च 2019 के बाद से क्रूरतापूर्ण व्यवहार करना शुरू कर दिया था। वह अक्सर नशे की हालत में रहता था और दहेज की मांग करता था। उसके कृत्य और आचरण के कारण पत्नी और बेटे का एक छत के नीचे रहना संभव नहीं हुआ और अलग होना पड़ा। पति एक स्वस्थ और सक्षम व्यक्ति है। उसकी निजी नौकरी के साथ कृषि/बागवानी से भी आय का पर्याप्त स्रोत है। इसलिए प्रार्थना है कि आवेदन को स्वीकार किया जाए। हालांकि पति ने भी आरोपों का खंडन करते हुए जवाब दाखिल किया। उसके अनुसार पत्नी के व्यवहार में नाटकीय रूप से बदलाव आया है और भाई और मां से अलग रहने के लिए मजबूर कर दिया। इसके बाद सूचित किए बिना ही ससुराल छोड़ दिया। वह पत्नी को वापस लेने के लिए तैयार है, लेकिन उसने तलाक के लिए दबाव डाला है क्योंकि वह किसी अन्य व्यक्ति से विवाह करना चाहती है। वह उसके बच्चे से भी मिलने नहीं दे रही है। इसलिए आवेदन खारिज किया जाए। अदालत ने निर्णय दिया है कि मामले का गुण-दोष के आधार पर निर्णय लेने में समय लगेगा। ऐसा होने तक न्याय के हित में यह उचित होगा कि प्रतिवादी को आवेदकों को भरण-पोषण राशि का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी ठहराया जाए। प्रतिवादी पति और पिता होने के नाते उचित भरण-पोषण प्रदान करने के लिए नैतिक और कानूनी रूप से बाध्य है। प्रतिवादी को कुल 4,500 रुपये मासिक भरण-पोषण राशि के रूप में देने का निर्देश दिया जाता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। रामपुर स्थित परिवार न्यायालय किन्नौर ने एक व्यक्ति को अपनी पत्नी और बेटे को मासिक भरण-पोषण राशि देने का आदेश दिया है। मासिक भरण-पोषण राशि देने के लिए आवेदन व्यक्ति की पत्नी ने दायर किया था। आवेदनकर्ता महिला के अनुसार उसके पति ने मार्च 2019 के बाद से क्रूरतापूर्ण व्यवहार करना शुरू कर दिया था। वह अक्सर नशे की हालत में रहता था और दहेज की मांग करता था। उसके कृत्य और आचरण के कारण पत्नी और बेटे का एक छत के नीचे रहना संभव नहीं हुआ और अलग होना पड़ा। पति एक स्वस्थ और सक्षम व्यक्ति है। उसकी निजी नौकरी के साथ कृषि/बागवानी से भी आय का पर्याप्त स्रोत है। इसलिए प्रार्थना है कि आवेदन को स्वीकार किया जाए। हालांकि पति ने भी आरोपों का खंडन करते हुए जवाब दाखिल किया। उसके अनुसार पत्नी के व्यवहार में नाटकीय रूप से बदलाव आया है और भाई और मां से अलग रहने के लिए मजबूर कर दिया। इसके बाद सूचित किए बिना ही ससुराल छोड़ दिया। वह पत्नी को वापस लेने के लिए तैयार है, लेकिन उसने तलाक के लिए दबाव डाला है क्योंकि वह किसी अन्य व्यक्ति से विवाह करना चाहती है। वह उसके बच्चे से भी मिलने नहीं दे रही है। इसलिए आवेदन खारिज किया जाए। अदालत ने निर्णय दिया है कि मामले का गुण-दोष के आधार पर निर्णय लेने में समय लगेगा। ऐसा होने तक न्याय के हित में यह उचित होगा कि प्रतिवादी को आवेदकों को भरण-पोषण राशि का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी ठहराया जाए। प्रतिवादी पति और पिता होने के नाते उचित भरण-पोषण प्रदान करने के लिए नैतिक और कानूनी रूप से बाध्य है। प्रतिवादी को कुल 4,500 रुपये मासिक भरण-पोषण राशि के रूप में देने का निर्देश दिया जाता है।