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खनेरी अस्पताल में तैनात नर्स पर महकमे की अनदेखी पड़ी भारी
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रामपुर बुशहर। चार जिलों के हजारों लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं देने वाले महात्मा गांधी खनेरी अस्पताल में प्रबंधन की एक और नाकामी सामने आई है। गत वीरवार को अस्पताल में तैनात एक नर्स की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई है। गर्भावस्था के दौर से गुजर रही नर्स पर अस्पताल प्रशासन की अनदेखी भारी पड़ी है। नर्स के गर्भवती होने की सूचना के बावजूद अस्पताल प्रशासन ने उसे हाई रिस्क वार्ड में तैनात कर दिया और वह कोरोना संक्रमण की गिरफ्त में आ गईं। मामला सामने आने के बाद महकमे की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल उठे हैं।
गौरतलब है कि वीरवार को रामपुर में 11 लोगों की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। इनमें खनेरी अस्पताल में तैनात एक नर्स भी शामिल थीं। यह नर्स गर्भवती थी और बीते कई माह से विभिन्न वार्डों में सेवाएं दे रही थीं। कोरोना काल में गर्भवती होने के बावजूद वह ड्यूटी पर तैनात रही, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने उसे एक सुरक्षित जगह तैनात करने के बजाय जगह-जगह तैनात कर दिया। स्वास्थ्य विभाग खासकर नर्सिंग महकमे की नाकामी के चलते नर्स कोरोना संक्रमण की चपेट में आ गई। संक्रमित गर्भवती नर्स ने बताया कि कोरोना काल में उन्होंने गायनी, फीमेल, मेडिसिन और सर्जरी वार्ड में अपनी सेवाएं दीं। जबकि, वर्तमान में वह इंजेक्शन रूम में सेवाएं दे रही थीं। नर्स की कोई ट्रेवल हिस्ट्री भी नहीं है। ऐसे में अस्पताल में ड्यूटी के दौरान ही वह किसी संक्रमित के संपर्क में आ गईं। अब सवाल उठता है कि जब महकमे को जानकारी थी कि वह नर्स गर्भवती है तो उसकी हाई रिस्क वार्डों में क्यों तैनाती की गई? गर्भावस्था के दौरान संक्रमण से बचने को दी जा रही दवाएं शिशु पर कोई विपरीत प्रभाव न डालें, यह भी एक सवाल बना हुआ है। गर्भवती नर्स का कहना है कि वह तो संक्रमण की चपेट में आ गई, लेकिन कोई और न आए इसके लिए स्वास्थ्य महकमा क्या प्रावधान करेगा? उधर, अस्पताल की चीफ मेट्रन शांति ठाकुर ने कहा कि संक्रमण के लिहाज से अस्पताल में कोई भी स्थान सुरक्षित नहीं है। नर्सों की तैनाती स्टाफ नर्स की ओर से की जाती है। गर्भवती नर्स की तैनाती को लेकर उनके ध्यान में कोई मामला नहीं आया।
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गौरतलब है कि वीरवार को रामपुर में 11 लोगों की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। इनमें खनेरी अस्पताल में तैनात एक नर्स भी शामिल थीं। यह नर्स गर्भवती थी और बीते कई माह से विभिन्न वार्डों में सेवाएं दे रही थीं। कोरोना काल में गर्भवती होने के बावजूद वह ड्यूटी पर तैनात रही, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने उसे एक सुरक्षित जगह तैनात करने के बजाय जगह-जगह तैनात कर दिया। स्वास्थ्य विभाग खासकर नर्सिंग महकमे की नाकामी के चलते नर्स कोरोना संक्रमण की चपेट में आ गई। संक्रमित गर्भवती नर्स ने बताया कि कोरोना काल में उन्होंने गायनी, फीमेल, मेडिसिन और सर्जरी वार्ड में अपनी सेवाएं दीं। जबकि, वर्तमान में वह इंजेक्शन रूम में सेवाएं दे रही थीं। नर्स की कोई ट्रेवल हिस्ट्री भी नहीं है। ऐसे में अस्पताल में ड्यूटी के दौरान ही वह किसी संक्रमित के संपर्क में आ गईं। अब सवाल उठता है कि जब महकमे को जानकारी थी कि वह नर्स गर्भवती है तो उसकी हाई रिस्क वार्डों में क्यों तैनाती की गई? गर्भावस्था के दौरान संक्रमण से बचने को दी जा रही दवाएं शिशु पर कोई विपरीत प्रभाव न डालें, यह भी एक सवाल बना हुआ है। गर्भवती नर्स का कहना है कि वह तो संक्रमण की चपेट में आ गई, लेकिन कोई और न आए इसके लिए स्वास्थ्य महकमा क्या प्रावधान करेगा? उधर, अस्पताल की चीफ मेट्रन शांति ठाकुर ने कहा कि संक्रमण के लिहाज से अस्पताल में कोई भी स्थान सुरक्षित नहीं है। नर्सों की तैनाती स्टाफ नर्स की ओर से की जाती है। गर्भवती नर्स की तैनाती को लेकर उनके ध्यान में कोई मामला नहीं आया।
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