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Rampur Bushahar News: नाबालिग से दुष्कर्म मामले में दोषी को 20 साल की कैद, भाई बरी
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फास्ट ट्रैक विशेष अदालत ने सुनाया फैसला, दोषी पर 10 हजार का जुर्माना भी लगाया
पीड़िता इंस्टाग्राम के माध्यम से आई थी आरोपी के संपर्क में
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर।
रामपुर स्थित किन्नौर की फास्ट ट्रैक विशेष अदालत (पॉक्सो) ने नाबालिग से दुष्कर्म के एक मामले में दोषी ज्ञान दास को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसी मामले में ज्ञान दास के भाई को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया है। अदालत ने दोषी ज्ञान दास पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना न भरने पर उसे छह महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़िता इंस्टाग्राम के माध्यम से ज्ञान दास के संपर्क में आई थी। 9 फरवरी 2024 को ज्ञान दास ने पीड़िता को रिकांगपिओ बुलाया। शाम करीब पांच बजे पीड़िता उससे मिलने घर से निकली। ज्ञान दास उसे अपने घर ले गया। ज्ञान दास के घर पर पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया गया। उस समय घर पर ज्ञान दास का भाई भी मौजूद था। अगले दिन ज्ञान दास ने पीड़िता को उसके घर के पास पर छोड़ दिया। उसने पीड़िता को घटना के बारे में किसी को न बताने की धमकी दी।पीड़िता के लापता होने पर उसकी मां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने पीड़िता को बरामद किया। उसका बयान दर्ज किया गया। उसकी मेडिकल जांच भी करवाई गई। पुलिस ने ज्ञान दास और उसके भाई ज्ञान चंद को 10 फरवरी 2024 को गिरफ्तार किया। पीड़िता घटना के समय 14 साल साबित हुई। अभियोजन पक्ष ने कुल 27 गवाहों के बयान लिए। अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत गवाहों के बयानों पर विचार किया। पीड़िता के बयान को महत्वपूर्ण माना गया, जिसमें उसने दुष्कर्म की बात कही थी। ज्ञान चंद के मामले में अदालत ने पाया कि उसके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं था।
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पीड़िता इंस्टाग्राम के माध्यम से आई थी आरोपी के संपर्क में
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर।
रामपुर स्थित किन्नौर की फास्ट ट्रैक विशेष अदालत (पॉक्सो) ने नाबालिग से दुष्कर्म के एक मामले में दोषी ज्ञान दास को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसी मामले में ज्ञान दास के भाई को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया है। अदालत ने दोषी ज्ञान दास पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना न भरने पर उसे छह महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़िता इंस्टाग्राम के माध्यम से ज्ञान दास के संपर्क में आई थी। 9 फरवरी 2024 को ज्ञान दास ने पीड़िता को रिकांगपिओ बुलाया। शाम करीब पांच बजे पीड़िता उससे मिलने घर से निकली। ज्ञान दास उसे अपने घर ले गया। ज्ञान दास के घर पर पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया गया। उस समय घर पर ज्ञान दास का भाई भी मौजूद था। अगले दिन ज्ञान दास ने पीड़िता को उसके घर के पास पर छोड़ दिया। उसने पीड़िता को घटना के बारे में किसी को न बताने की धमकी दी।पीड़िता के लापता होने पर उसकी मां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने पीड़िता को बरामद किया। उसका बयान दर्ज किया गया। उसकी मेडिकल जांच भी करवाई गई। पुलिस ने ज्ञान दास और उसके भाई ज्ञान चंद को 10 फरवरी 2024 को गिरफ्तार किया। पीड़िता घटना के समय 14 साल साबित हुई। अभियोजन पक्ष ने कुल 27 गवाहों के बयान लिए। अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत गवाहों के बयानों पर विचार किया। पीड़िता के बयान को महत्वपूर्ण माना गया, जिसमें उसने दुष्कर्म की बात कही थी। ज्ञान चंद के मामले में अदालत ने पाया कि उसके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं था।